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बिहार विधानसभा चुनाव परिणाम 2025 : बीजेपी ने रच डाला इतिहास, महागठबंधन को मिली हार

2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने एक नई इतिहास रचते हुए सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरने में सफलता हासिल की है। बीजेपी ने इस बार 89 सीटें जीतकर एक मजबूत स्थिति बनाई। वहीं, राजद नेता तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाला महागठबंधन 50 सीटों का आंकड़ा भी पार करने में नाकाम रहा। इस चुनाव में जहां कुछ उम्मीदवारों ने शानदार जीत हासिल की, वहीं कुछ ने बेहद कम अंतर से जीत दर्ज की।

संकटपूर्ण अंतर से जीते उम्मीदवार

बिहार विधानसभा चुनाव के परिणामों ने यह साबित कर दिया कि छोटे अंतर से भी सत्ता की तस्वीर बदल सकती है। कुछ उम्मीदवारों ने शानदार जीत हासिल की, जबकि कुछ उम्मीदवारों को बेहद कम अंतर से जीत मिली, जिनके परिणाम चौंकाने वाले थे।

इस चुनाव में सबसे कम अंतर से जीतने वाले उम्मीदवारों में से एक नाम जेडीयू के रामचरण साह का है, जिन्होंने संदेश विधानसभा सीट पर महज 27 वोटों के अंतर से जीत हासिल की। रामचरण को 80,598 वोट मिले, जबकि आरजेडी के दीपु सिंह को 80,571 वोट मिले। इस सीट पर प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी के राजीव रंजन राज को सिर्फ 6,040 वोट मिले, जिन्होंने वोट कटवा साबित किया।

विपरीत अंतर से जीते बीजेपी और अन्य उम्मीदवार

अगिआंव विधानसभा सीट पर भी बीजेपी के उम्मीदवार महेश पासवान ने वामपंथियों के गढ़ को चुनौती दी और महज 95 वोटों के अंतर से जीत हासिल की। महेश पासवान को 69,412 वोट मिले, जबकि सीपीआई (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) के शिवप्रकाश रंजन को 69,317 वोट मिले।

बलरामपुर विधानसभा सीट से एलजेपी (रामविलास) की संगीता देवी ने एआईएमआईएम के मोहम्मद आदिल हुसैन को 389 वोटों के अंतर से हराया। संगीता देवी को 80,459 वोट मिले, जबकि आदिल हुसैन को 80,070 वोट मिले। इसके अलावा बख्तियारपुर सीट पर लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अरुण कुमार ने महज 981 वोटों से जीत दर्ज की। अरुण को 88,520 वोट मिले, जबकि आरजेडी के अनिरुद्ध कुमार को 87,539 वोट मिले।

राजद उम्मीदवारों की तंग जीत

राजद के उम्मीदवार कुमार सर्वजीत ने बोधगया सीट पर 881 वोटों के अंतर से जीत हासिल की। कुमार सर्वजीत को 100,236 वोट मिले, जबकि एलजेपी (रामविलास) के श्यामदेव पासवान को 99,355 वोट मिले। चनपटिया से कांग्रेस के अभिषेक रंजन ने महज 602 वोटों से बीजेपी के उमाकांत सिंह को हराया। अभिषेक रंजन को 87,538 वोट मिले, जबकि उमाकांत सिंह को 86,936 वोट मिले।

ढाका और फारबिसगंज सीट पर भी तंग मुकाबला

ढाका सीट पर आरजेडी के उम्मीदवार फैसल रहमान ने बीजेपी के पवन कुमार जैसवाल को महज 178 वोटों के अंतर से हराया। फैसल को 1,12,727 वोट मिले, जबकि पवन कुमार को 1,12,549 वोट मिले। फारबिसगंज सीट से कांग्रेस के मनोज विश्वास ने महज 221 वोटों के अंतर से बीजेपी के विद्या सागर केशरी को हराया। मनोज विश्वास को 1,19,893 वोट मिले।

न्यूनतम अंतर से जीते उम्मीदवारों का चुनाव पर प्रभाव

यह चुनाव परिणाम यह दर्शाते हैं कि कभी-कभी एक चुनाव परिणाम बहुत कम अंतर से तय हो सकता है। जहां कुछ उम्मीदवारों ने रिकॉर्ड जीत दर्ज की, वहीं कुछ ने नाकामी के बीच एक छोटा अंतर जीतने के बावजूद महत्वपूर्ण प्रभाव छोड़ा। इन तंग मुकाबलों ने बिहार की राजनीतिक स्थिति को नया मोड़ दिया है और इसने यह स्पष्ट कर दिया है कि हर एक वोट का महत्व है।

बीजेपी की ऐतिहासिक जीत इस चुनाव का मुख्य आकर्षण रही, लेकिन इसने यह भी दिखाया कि कुछ सीटों पर मामूली अंतर से चुनावों का परिणाम बदल सकता है। महागठबंधन अपनी उम्मीदों के अनुसार प्रदर्शन करने में असफल रहा और इसे सबक मिला कि हर सीट पर जितना महत्व है, उतना ही हर एक वोट का भी होता है।

इन परिणामों के बाद बिहार की राजनीति में नई दिशा देखने को मिल सकती है, जहां तंग जीत ने सबको यह समझाया कि चुनावों में हर एक कदम महत्वपूर्ण होता है।

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