Home Bihar बिहार विधानसभा ‘मिथिलामय’ हो गई, 14 विधायकों ने मैथिली में शपथ ली

बिहार विधानसभा ‘मिथिलामय’ हो गई, 14 विधायकों ने मैथिली में शपथ ली

18वीं बिहार विधानसभा के शीतकालीन सत्र का उद्घाटन सोमवार को बिहार की सांस्कृतिक विविधता के साथ हुआ। इस दिन बिहार विधानसभा में नए निर्वाचित विधायकों ने शपथ ली और इस मौके पर मिथिला का विशेष सांस्कृतिक गर्व दिखा। 243 विधायकों में से 237 विधायकों ने शपथ ली, जबकि 6 विधायक मंगलवार को शपथ लेंगे। इस दौरान 14 नए विधायकों ने मैथिली में शपथ लेकर विधानसभा में मिथिला की पहचान को और मजबूत किया। यह संख्या अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है।

मैथिली का प्रभाव और विधानसभा में प्रमुखता

बिहार विधानसभा में शपथ लेने के लिए विधायकों को हिंदी, संस्कृत, उर्दू, अंग्रेजी और मैथिली में से कोई भी भाषा चुनने का विकल्प दिया गया था। हालांकि, इस दिन मैथिली का प्रभाव साफ देखा गया। मैथिली में शपथ लेने वाले विधायकों की संख्या सबसे अधिक रही, जिससे विधानसभा का माहौल पूरी तरह से ‘मिथिलामय’ हो गया। इस अवसर पर कई विधायक पारंपरिक मिथिला पगड़ी और गमछा पहनकर आए थे। सबसे युवा विधायक, मैथिली ठाकुर, ने पीले रंग की साड़ी पहनकर और माथे पर पगड़ी बांधकर मैथिली में शपथ ली।

मैथिली में शपथ लेने वाले विधायक

मैथिली में शपथ लेने वाले विधायकों की सूची में प्रमुख नामों में मैथिली ठाकुर, राजेश कुमार मंडल, संजय सरावगी, रामचंद्र प्रसाद, मुरारी मोहन झा, सुधांशु शेखर, विनोद नारायण झा, मीना कुमारी, माधव आनंद, नीतीश मिश्रा, सुजीत कुमार, विनय कुमार चौधरी और आसिफ अहमद शामिल हैं। आसिफ अहमद ने बीजेपी के वरिष्ठ नेता को बछौल में हराकर इस विधानसभा में प्रवेश किया।

संस्कृत, उर्दू और अंग्रेजी में भी शपथ

मैथिली के अलावा, संस्कृत, उर्दू और अंग्रेजी में भी विधायकों ने शपथ ली। संस्कृत में शपथ लेने वाले विधायकों में तर्किशोर प्रसाद, रत्नेश सदा, मिथिलेश तिवारी, संजय कुमार सिंह और वीरेंद्र कुमार शामिल थे। वहीं, उर्दू में AIMIM के विधायकों ने शपथ ली, जिनमें आबिदुर रहमान, मोहम्मद मुर्शिद आलम, मोहम्मद कमरूल हुदा, सरवर आलम और अख्तरुल ईमान शामिल थे। अंग्रेजी में शपथ लेने वालों में जद (यू) के चेतन आनंद और एलजेपी (रामविलास) के विष्णु देव पासवान थे।

विधानसभा में गूंजे ‘वन्दे मातरम्’ और ‘बिस्मिल्लाह’

हर शपथ के बाद विधानसभा कक्ष में “वन्दे मातरम्” और “बिस्मिल्लाह” के उद्घोष हुए, जो कि न केवल धार्मिक बल्कि सांस्कृतिक विविधता का प्रतीक था। यह क्षण यह दर्शाता है कि बिहार की नई विधानसभा सभी समुदायों और भाषाओं का प्रतिनिधित्व करती है, जो राज्य के लोकतंत्र की समृद्धि को दर्शाता है।

युवा और शिक्षित नेताओं की उपस्थिति

इस विधानसभा में युवा और शिक्षित नेताओं की संख्या पहले से कहीं अधिक है, जो राज्य के भविष्य के लिए आशावादी संकेत हैं। रLM विधायक आनंद माधव ने कहा कि बिहार अब “सुनहरे पांच साल के चक्र” में प्रवेश कर चुका है, जिसमें कई विधायक प्रतिष्ठित संस्थानों जैसे IIT और IIM से आए हैं। समृद्धि वर्मा, जो सिक्त से बीजेपी विधायक हैं और यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के स्नातक हैं, ने कहा कि यह जनादेश “मोदी-नीतीश 2.0” के तहत एक विकसित बिहार बनाने का अवसर है।

कैबिनेट की जिम्मेदारियां और नई महत्वाकांक्षाएं

श्रम संसाधन मंत्री के रूप में नियुक्त संजय टाइगर ने कहा कि NDA ने एक करोड़ नौकरियां देने का वादा किया है, और केंद्र सरकार ने पिछले पांच सालों में 50 लाख लोगों को रोजगार के अवसर प्रदान किए हैं। जद (यू) के शुभानंद मुकेश, जो काहलागांव से विधायक हैं, ने कहा कि वह नीतीश कुमार के द्वारा दी गई जिम्मेदारी को निभाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

वहीं, विपक्ष की ओर से पलिगंज के विधायक संदीप सौरभ ने यह आश्वासन दिया कि भले ही विपक्षी दलों की संख्या में कमी आई हो, उनका संघर्ष जारी रहेगा और बिहार की जनता के लिए वे लगातार आवाज उठाते रहेंगे।

एक हल्का पल

विधानसभा में एक हल्का पल भी आया जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक नव-शपथ ग्रहण विधायक से मजाक करते हुए कहा, “मैंने तुम्हारे लिए वोट दिया था!” इस बयान ने पूरी विधानसभा को हंसी में डाल दिया। इस पल ने यह भी दर्शाया कि राजनीति और व्यक्तिगत संबंधों के बीच संतुलन बनाए रखना कितना जरूरी है।

मिथिला के विकास पर जोर

बहुत से नए विधायकों ने अपने क्षेत्रों में विकास की गति को तेज करने की आवश्यकता पर जोर दिया। बेंपुर विधायक अजय चौधरी, जो एक शानदार मिथिला पगड़ी पहने हुए थे, ने कहा कि “नीतीश कुमार ने मिथिला के लोगों पर गहरी विश्वास रखा है। बिहार का विकास बिना मिथिला के विकास के संभव नहीं है।” बीजेपी के विधायक सुजीत कुमार ने सदन में याद दिलाया कि यह अटल बिहारी वाजपेयी का योगदान था जिसने मैथिली को आठवीं अनुसूची में शामिल कराया था।

बिहार राजनीति में नया मोड़

18वीं बिहार विधानसभा का शीतकालीन सत्र बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत का प्रतीक है। युवा और शिक्षित नेताओं का आना यह संकेत देता है कि बिहार को अब एक नई दिशा मिलेगी। इन नेताओं का विकास और शिक्षा पर जोर यह दर्शाता है कि बिहार के आगामी पांच सालों में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिलेंगे।

बिहार विधानसभा का शीतकालीन सत्र मिथिला की सांस्कृतिक धरोहर और नए नेताओं के उत्थान का प्रतीक है। मैथिली में शपथ लेने वाले विधायकों की संख्या का रिकॉर्ड टूटना, युवा नेताओं का विधानसभा में प्रवेश और विकास की दिशा में कई नई योजनाओं की शुरुआत इस सत्र को ऐतिहासिक बनाती है। जैसे-जैसे यह सत्र आगे बढ़ेगा, बिहार के लिए न केवल राजनीतिक बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक बदलाव की दिशा भी तय होगी।

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