बिहार के भागलपुर जिले के गोराडीह इलाके में रविवार की शाम उस समय तनाव फैल गया जब मोहर्रम जुलूस के दौरान दो पक्षों के बीच भीषण हिंसक झड़प हो गई। इस झड़प में तलवारों का इस्तेमाल, पत्थरबाजी और फायरिंग तक हुई, जिससे कई लोग घायल हो गए।
स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यह कोई अचानक हुई घटना नहीं थी, बल्कि दोनों पक्षों के बीच पुराना विवाद पहले से चला आ रहा था, जो अब हिंसा में बदल गया।
कहां से शुरू हुआ विवाद?
घटना रविवार शाम की है जब एक स्थानीय मुहल्ले से मोहर्रम का ताज़िया जुलूस गुजर रहा था। जुलूस जैसे ही एक विशेष इलाके के पास पहुंचा, विवाद शुरू हो गया। एक पक्ष का आरोप है कि जैसे ही वे विरोधी पक्ष के घर के पास पहुंचे, अचानक उन पर हमला कर दिया गया।
“हम लोग शांतिपूर्वक जुलूस में जा रहे थे। अचानक उन लोगों ने पत्थर फेंकना शुरू किया, फिर तलवार से हमला किया और बाद में गोलीबारी भी करने लगे,”
वहीं दूसरे पक्ष का दावा है कि जुलूस के कुछ लोग जानबूझकर उनके इलाके में घुस आए और गाली-गलौज व उकसावे की भाषा का प्रयोग करने लगे, जिसके बाद हालात बेकाबू हो गए।
सड़कें बनीं रणभूमि
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, सड़कें देखते ही देखते युद्ध का मैदान बन गईं। दोनों पक्षों के लोग तलवारें लेकर भिड़ गए, फायरिंग की आवाजें गूंजने लगीं, लोग इधर-उधर भागने लगे। दुकानों के शटर बंद हो गए, और महिलाएं व बच्चे अपने घरों में डर से बंद हो गए।
एक स्थानीय दुकानदार ने बताया,
“ऐसा लगा जैसे जंग छिड़ गई हो। मैं तुरंत अपनी दुकान बंद करके अंदर छिप गया।”
वायरल हो रहे मोबाइल वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे लोगों के हाथ में हथियार हैं, और गली में गोलियां चल रही हैं। इस वीडियो को लेकर भी सोशल मीडिया पर काफी चर्चा है।
पुलिस की कार्रवाई और हालात पर नियंत्रण
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस ने तुरंत मोर्चा संभाला। गोराडीह थाना पुलिस के साथ-साथ आस-पास के थानों से भी फोर्स बुलाया गया। क्षेत्र में भारी पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है ताकि स्थिति और न बिगड़े।
पुलिस ने बताया:
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अभी तक किसी की मौत की पुष्टि नहीं हुई है।
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कई लोग घायल हुए हैं, जिनमें कुछ की हालत गंभीर है।
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तलवार और देसी कट्टे जैसे हथियारों का इस्तेमाल हुआ है।
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सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल वीडियो के आधार पर आरोपियों की पहचान की जा रही है।
अभी तक दोनों पक्षों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो
घटना के बाद सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हो रहे हैं। वीडियो में गोलियों की आवाज, लोगों का भागना और झड़प साफ नजर आ रही है। जिला प्रशासन ने लोगों से अफवाह न फैलाने और किसी भी अपुष्ट वीडियो को शेयर न करने की अपील की है।
“गलत सूचना या अफवाहें शांति व्यवस्था को और बिगाड़ सकती हैं,” — जिला प्रशासन
बिहार में लगातार सामने आ रही हैं मोहर्रम से जुड़ी घटनाएं
भागलपुर की यह घटना कोई अलग मामला नहीं है। बिहार के अन्य जिलों में भी मोहर्रम के दौरान तनाव की खबरें सामने आ रही हैं।
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दरभंगा में ताजिया जुलूस के दौरान ‘झरनी’ खेलने को लेकर विवाद हुआ। इसके बाद पत्थरबाजी हुई और एक दर्जन लोग घायल हो गए।
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वहीं एक अन्य जिले में एक युवक को फिलिस्तीन का झंडा लहराते हुए देखा गया, जिसके बाद प्रशासन ने जांच शुरू कर दी।
लगातार हो रही इन घटनाओं ने राज्य में कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
गहरी सामाजिक समस्या की ओर इशारा
यह केवल एक झड़प नहीं थी। यह दर्शाता है कि कई इलाकों में समुदायों के बीच आपसी विश्वास की कमी, पुरानी दुश्मनियों, और प्रशासनिक चूक के चलते धार्मिक अवसर पर तनाव बढ़ सकता है।
“त्योहारों का उद्देश्य आपसी भाईचारे को बढ़ाना होता है, लेकिन जब राजनीति, पुरानी रंजिश और अफवाहें मिल जाएं, तो जुलूस जंग का रूप ले सकता है।”
प्रशासन की अपील: शांति बनाएं रखें
भागलपुर के डीएम और एसपी ने संयुक्त बयान में जनता से शांति बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि:
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किसी निर्दोष को परेशान नहीं किया जाएगा।
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दोषियों की पहचान कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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समुदायिक बैठकें आयोजित कर आपसी संवाद और समझ को बढ़ावा दिया जाएगा।
भागलपुर की यह घटना हमें यह याद दिलाती है कि सांप्रदायिक तनाव सिर्फ घटना नहीं, एक चेतावनी है। जरूरत इस बात की है कि प्रशासन, समुदाय और नागरिक एक साथ मिलकर संवाद, विश्वास और शांति की दिशा में कदम बढ़ाएं।
हर बार ऐसा नहीं होना चाहिए कि पुलिस तब आए जब तलवारें चल चुकी हों और गोलियां चलने लगी हों। रोकथाम ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।
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