होमBiharArariaबिहार के अररिया में करंट लगने से पिता-पुत्र दोनों की एक साथ...

बिहार के अररिया में करंट लगने से पिता-पुत्र दोनों की एक साथ मौत, जानिए कहा पहुंचा मामला

Published on

20 अक्टूबर 2025 को बिहार के अररिया जिले में दीपावली के दिन एक दुखद घटना घटी, जिसमें एक पिता और उसके 14 वर्षीय बेटे की करंट लगने से मौत हो गई। यह हादसा खवासपुर-फारबिसगंज सड़क पर स्थित करिया पुल के पास हुआ, जहां दोनों ने पानी में डूबे हुए बिजली के तार से संपर्क किया। इस घटना ने दीपावली के दिन को दुख और शोक में बदल दिया, जो परिवार के लिए एक बड़ी त्रासदी बन गया।

घटना की पूरी जानकारी

हादसे में मारे गए व्यक्तियों की पहचान 47 वर्षीय विद्यानंद मलिक और उनके 14 वर्षीय बेटे सागर मलिक के रूप में हुई है। दोनों खवासपुर गांव के निवासी थे। रिपोर्ट्स के अनुसार, करिया पुल के पास एक उच्च वोल्टेज का बिजली का तार पानी में कई दिनों से गिरा हुआ था। परिवार के सदस्य और स्थानीय निवासी बार-बार बिजली विभाग से इस खतरनाक स्थिति के बारे में शिकायत कर चुके थे, लेकिन विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की थी।

20 अक्टूबर को विद्यानंद मलिक पुल के पास पानी में सुअर पकड़ने के लिए उतरे, तभी उनका संपर्क बिजली के तार से हो गया और वह तुरंत करंट लगने से गिर पड़े। यह दृश्य देखकर उनके बेटे सागर ने उन्हें बचाने के लिए पानी में कूदने की कोशिश की, लेकिन वह भी करंट की चपेट में आ गए और पिता-पुत्र दोनों की मौके पर ही मौत हो गई।

जनता का आक्रोश और सड़क जाम

हादसे के बाद गांव में शोक का माहौल था, लेकिन यह जल्द ही गुस्से में बदल गया। परिवार के सदस्य और ग्रामीण बिजली विभाग को लापरवाही के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए विरोध प्रदर्शन करने लगे। उनका कहना था कि कई बार बिजली विभाग से तार के गिरने की शिकायत की गई थी, लेकिन विभाग ने कोई कदम नहीं उठाया, जिससे यह दुखद घटना घटी।

ग्रामीणों ने खवासपुर-फारबिसगंज मुख्य मार्ग को जाम कर दिया और बिजली विभाग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। यह जाम स्थानीय यातायात में बड़ी रुकावट का कारण बना, क्योंकि ग्रामीणों ने अधिकारियों के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की।

अधिकारियों की प्रतिक्रिया और जांच की स्थिति

घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे। थाना प्रभारी राघवेंद्र कुमार सिंह ने पुष्टि की कि दोनों की मौत करंट लगने से हुई है। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया ताकि मौत के कारण की पूरी जानकारी मिल सके।

प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों को शांत किया और उन्हें आश्वासन दिया कि उचित कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद जाम को हटा लिया गया।

राजनीतिक हस्तक्षेप और मुआवजे की मांग

घटना के बाद भाजपा ओबीसी नेता दिलीप पटेल ने मृतक परिवार से मिलने का निर्णय लिया और मुआवजे की मांग की। उन्होंने कहा कि परिवार को उचित वित्तीय मुआवजा दिया जाए। हालांकि, अभी तक मुआवजे या बिजली विभाग के अधिकारियों के खिलाफ किसी प्रकार की अनुशासनात्मक कार्रवाई की घोषणा नहीं की गई है।

बिजली विभाग की एसडीओ ने कहा कि प्रारंभिक जांच में पानी में करंट होने की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस बयान ने स्थानीय निवासियों के बीच शक और चिंता पैदा की है। उनकी पारदर्शिता पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

अररिया में सुरक्षा की लापरवाही की आदत

यह घटना अररिया जिले में अकेली नहीं है। इस क्षेत्र में पहले भी कई बार करंट लगने की घटनाएं हो चुकी हैं, जो मुख्य रूप से बिजली विभाग की लापरवाही का परिणाम मानी जाती हैं। पिछले कुछ महीनों में कई ऐसे हादसे हुए हैं, जिनसे यह साबित होता है कि सुरक्षा उपायों की कमी और बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर की देखभाल में गंभीर लापरवाही हो रही ह

जांच की स्थिति: मामला कहां खड़ा है?

जांच की स्थिति (21 अक्टूबर 2025 तक):

  • पोस्टमार्टम: शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है।

  • पुलिस कार्रवाई: मामला दर्ज कर लिया गया है, और सदार एसडीपीओ रामपुकार सिंह के मार्गदर्शन में जांच जारी है।

  • विभागीय प्रतिक्रिया: बिजली विभाग की एसडीओ ने कहा कि प्रारंभिक जांच में पानी में करंट की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन अब भी यह सवाल उठ रहा है कि क्या विभाग ने पूरी जांच की है।

  • कोई गिरफ्तारी नहीं: अभी तक बिजली विभाग के किसी अधिकारी को गिरफ्तार या निलंबित नहीं किया गया है।

  • मुआवजा: मुआवजे के बारे में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, जबकि राजनीतिक नेताओं ने इसे मांग किया है।

  • संवेदनशील मुद्दे: जिले में करंट लगने की घटनाओं का बढ़ता हुआ पैटर्न सुरक्षा की गंभीर समस्या को दर्शाता है, लेकिन अभी तक कोई व्यापक सुधार या सुरक्षा ऑडिट नहीं किया गया है।

बिहार में बिजली सुरक्षा संकट

बिहार में बिजली से होने वाली मौतों का बढ़ता हुआ आंकड़ा राज्य में बड़ी चिंता का विषय बन गया है। यह घटनाएं मुख्य रूप से पुराने इंफ्रास्ट्रक्चर, अपर्याप्त देखरेख, और सरकारी लापरवाही के कारण हो रही हैं। इस संकट का प्रभाव अररिया तक ही सीमित नहीं है, बल्कि राज्य के विभिन्न हिस्सों में इसी तरह की घटनाएं हो रही हैं।

  • मई 2025 में, बेगूसराय जिले में बिजली विभाग के एक कर्मचारी की काम करते समय departmental negligence के कारण मौत हो गई थी।

  • अक्टूबर 2025 में, गया जिले में एक 22 वर्षीय युवक और उसके पिता करंट की चपेट में आ गए थे, जब वे 11,000 वोल्ट के तार से टकरा गए थे।

  • धार्मिक जुलूसों के दौरान भी कई घटनाएं हुई हैं, जब धार्मिक संरचनाओं का संपर्क ओवरहेड वायर्स से हुआ और बड़ी संख्या में लोग करंट की चपेट में आए।

इन घटनाओं ने यह साबित कर दिया है कि राज्य में बिजली सुरक्षा मानकों में गंभीर कमियां हैं और विभाग की अनदेखी के कारण कई जिंदगियां चली गई हैं।

कानूनी दायित्व और मुआवजा

भारत में कई सरकारी आदेश और न्यायालयिक निर्णयों के तहत, अगर बिजली विभाग की लापरवाही से किसी की मौत होती है, तो परिवार को मुआवजा देने का प्रावधान है। पहले के मामलों में अदालतों ने ₹4 लाख से ₹25 लाख तक के मुआवजे का आदेश दिया है, जो यह साबित करता है कि जब सुरक्षा उपायों की कमी होती है तो विभाग को जिम्मेदार ठहराया जाता है।

हालांकि, इस मामले में परिवार को अभी तक कोई आधिकारिक मुआवजा नहीं मिला है, जबकि स्थिति पूरी तरह से विभाग की लापरवाही को दर्शाती है।

अररिया जिले में इस दीपावली पर विद्यावंद और सागर मलिक की मौत ने यह स्पष्ट कर दिया कि यह एक रोका जा सकने वाला हादसा था, जो विभागीय लापरवाही के कारण हुआ। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, लेकिन अभी तक कोई अधिकारी जिम्मेदार नहीं ठहराए गए हैं।

यह घटना अररिया जिले में बिजली सुरक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर की गंभीर कमियों को उजागर करती है और विभागीय जवाबदेही के सवाल उठाती है। परिवार को मुआवजे और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की उम्मीद है, जबकि स्थानीय समुदाय भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए व्यापक सुधारों की मांग कर रहा है।

जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, यह मामला एक कठोर याद दिलाने के रूप में सामने आएगा कि जब तक इन्फ्रास्ट्रक्चर की देखरेख और सुरक्षा उपायों को प्राथमिकता नहीं दी जाएगी, ऐसे दुखद हादसे होते रहेंगे।

Read this article in

KKN लाइव WhatsApp पर भी उपलब्ध है, खबरों की खबर के लिए यहां क्लिक करके आप हमारे चैनल को सब्सक्राइब कर सकते हैं।

KKN Public Correspondent Initiative


Discover more from

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Latest articles

बिहार में भूमि सर्वेक्षण और भूमाफिया का कॉकटेल?

क्या रिकॉर्ड सुधार की मुहिम में सेंध लगा रहे हैं फर्जी दावेदार KKN ब्यूरो। जमीन...

बिहार की सड़कें समय से पहले क्यों टूट जाती हैं?

जब सड़क टूटती है, तो केवल डगर नहीं बिखरता... KKN ब्यूरो। बारिश की पहली फुहार...

पेपर लीक का काला कारोबार: किसने चुराए करोड़ों युवाओं के सपने, कौन है इस संगठित अपराध का असली सरगना? (भाग–2)

क्या पेपर लीक केवल आज की समस्या है? KKN ब्यूरो। यदि कोई यह मानता...

पेपर लीक का काला कारोबार: किसने चुराए करोड़ों युवाओं के सपने, कौन है इस संगठित अपराध का असली सरगना?

जब प्रश्नपत्र नहीं, भविष्य लीक होने लगे... KKN ब्यूरो। किसी राष्ट्र का भविष्य उसकी सीमाओं...

More like this

बिहार में भूमि सर्वेक्षण और भूमाफिया का कॉकटेल?

क्या रिकॉर्ड सुधार की मुहिम में सेंध लगा रहे हैं फर्जी दावेदार KKN ब्यूरो। जमीन...

बिहार की सड़कें समय से पहले क्यों टूट जाती हैं?

जब सड़क टूटती है, तो केवल डगर नहीं बिखरता... KKN ब्यूरो। बारिश की पहली फुहार...

तीन दशक की राजनीति जिसने बांकीपुर की पहचान बदल दी

कौशलेन्द्र झा KKN। आज बांकीपुर का नाम आते ही सबसे पहले भारतीय जनता पार्टी का...

एक सीट… कई संदेश: आखिर क्यों पूरे बिहार की नजर बांकीपुर पर है?

क्या बांकीपुर का फैसला सिर्फ एक विधायक चुनेगा या बिहार की राजनीति की नई...

बांकीपुर की जंग: भाजपा का अभेद्य किला या प्रशांत किशोर की पहली राजनीतिक परीक्षा?

**KKN Live Special | Election Report KKN ब्यूरो। बिहार की राजनीति में कई चुनाव ऐसे...

बंटी यादव हत्याकांड: आखिर सच क्या है? पुलिस की कहानी और परिवार के आरोपों के बीच उलझी जांच

KKN ब्यूरो। पटना के बंटी यादव हत्याकांड ने बिहार की कानून-व्यवस्था के साथ-साथ पुलिस...

मामुली बारिश… और अंधेरे में डूब जाता है बिहार का गांव

ट्री कटिंग पर हर साल करोड़ों के टेंडर, फिर भी पेड़ की टहनी से...

बांकीपुर उपचुनाव: क्या बीजेपी का अभेद्य किला दरकेगा या बदलेगी बिहार की राजनीति?

KKN ब्यूरो। पटना का बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र केवल एक सीट नहीं है। यह बिहार...

कोल्ड ड्रिंक: ताजगी या धीमा ज़हर? क्या कहती है वैज्ञानिक रिसर्च?

KKN ब्यूरो। गर्मी हो, पार्टी हो या सफर, कोल्ड ड्रिंक आज हमारी जीवनशैली का...

ग्रामीण सड़कों के ‘जानलेवा’ स्पीड ब्रेकर: सुरक्षा के नाम पर जनता की जेब और सेहत पर हमला?

KKN ब्यूरो। ग्रामीण भारत में पक्की सड़कों का जाल तेजी से बिछा है। प्रधानमंत्री...

बिहार के किसान और बेरोजगार: आखिर क्या है असली समाधान?

बिहार की सबसे बड़ी समस्या बेरोजगारी नहीं, आय की कमी है KKN ब्यूरो। बिहार की...

भरत तिवारी एनकाउंटर: कानून का सवाल, जाति की बहस और सच की तलाश

KKN ब्यूरो। भोजपुर के बिलौटी गांव का एक युवक...। फेसबुक लाइव...। पुलिस पर पिस्टल...

बिहार में शराबबंदी: सामाजिक सुधार या भ्रष्टाचार की नई अर्थव्यवस्था?

क्या शराबबंदी सफल हुई या उसने भ्रष्टाचार को नया ईंधन दिया? KKN ब्यूरो। एक  अप्रैल...

श्रेष्ठता का भ्रम: जब गाली, दोषारोपण और अपमान बन जाते हैं सामाजिक फैशन

क्या दूसरों को नीचा दिखाकर कोई वास्तव में बड़ा बन सकता है? KKN ब्यूरो। आज...

हिन्दी पत्रकारिता: मिशन से बाज़ार तक का सफर

क्या हिन्दी पत्रकारिता आज भी जनता की आवाज़ है? हिन्दी पत्रकारिता दिवस विशेष KKN ब्यूरो। क्या...