ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने बिहार विधानसभा चुनाव के लिए 25 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। AIMIM ने अपनी पूरी ताकत के साथ आगामी चुनावों में अपनी स्थिति मजबूत करने की योजना बनाई है। इस चुनाव में पार्टी के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी का फोकस विशेष रूप से सीमांचल क्षेत्र में है, जहां मुस्लिम मतदाताओं की संख्या अधिक है। इन चुनावों के लिए मतदान दो चरणों में 6 और 11 नवंबर 2025 को होगा, और 14 नवंबर को मतगणना की जाएगी।
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प्रशांत किशोर की टिप्पणी पर AIMIM का तीखा जवाब
AIMIM ने जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर की टिप्पणियों पर कड़ा जवाब दिया है। किशोर ने हाल ही में असदुद्दीन ओवैसी को सलाह दी थी कि वह सीमांचल की बजाय हैदराबाद पर ध्यान केंद्रित करें। AIMIM के प्रवक्ता वारिस पठान ने कहा कि सलाह देना सबसे आसान काम है, और उन्होंने किशोर को जवाब देते हुए कहा कि उनकी सलाह सिर्फ उनकी घबराहट और डर को दर्शाती है।
पठान ने आरोप लगाया कि प्रशांत किशोर अपनी राजनीतिक छवि चमकाने के लिए ओवैसी का नाम ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिन नेताओं ने ओवैसी की सीमांचल यात्रा के दौरान लाखों लोगों की भीड़ देखी, उनका अब पेट दर्द होने लगा है। यह बयान AIMIM के आंतरिक संघर्षों और बिहार की राजनीति में ओवैसी की बढ़ती ताकत को लेकर आया है।
प्रशांत किशोर की प्रतिक्रिया
प्रशांत किशोर ने ओवैसी को लेकर अपनी टिप्पणियों में कहा था कि ओवैसी को अपनी ताकत और प्रभाव हैदराबाद में ही बनाए रखना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि ओवैसी को सीमांचल आकर बेवजह कंफ्यूजन नहीं बढ़ाना चाहिए। किशोर ने यह भी कहा कि ओवैसी को अपनी पार्टी और राजनीति को हैदराबाद में मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए और यहाँ, बिहार में उन्हें अपनी उपस्थिति को लेकर ज्यादा चिंता नहीं करनी चाहिए।
किशोर ने कहा कि सीमांचल के मुसलमानों को 2020 की गलती नहीं दोहरानी चाहिए और उन्हें राजनीतिक समीकरणों के बारे में सोचना चाहिए। ओवैसी के सम्मान और शिक्षा की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें हैदराबाद में रहकर मुसलमानों की भलाई के लिए काम करना चाहिए, लेकिन बिहार में न आकर स्थिति को जटिल नहीं करना चाहिए।
AIMIM की चुनावी तैयारी और उम्मीदवारों की सूची
AIMIM ने बिहार विधानसभा चुनाव के लिए 25 उम्मीदवारों की सूची जारी की है। पार्टी ने इन उम्मीदवारों को मैदान में उतारने का फैसला किया है ताकि वह बिहार के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी राजनीतिक उपस्थिति मजबूत कर सके। AIMIM का मुख्य लक्ष्य सीमांचल क्षेत्र में मुस्लिम वोटों को आकर्षित करना है, जहाँ वह पहले से सक्रिय है।
इस घोषणा के बाद, AIMIM बिहार में अपनी राजनीतिक यात्रा को और तेज़ी से आगे बढ़ाने के लिए तैयार है। पार्टी ने राज्य में अपनी स्थिति को बेहतर करने के लिए सभी संसाधनों का इस्तेमाल करने का निर्णय लिया है। बिहार की राजनीति में AIMIM का बढ़ता प्रभाव पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ हो सकता है, खासकर जब पार्टी अपनी ताकत बढ़ाने के लिए नए उम्मीदवारों के साथ मैदान में है।
बिहार विधानसभा चुनाव की तिथियाँ
बिहार विधानसभा चुनाव के लिए मतदान 6 और 11 नवंबर 2025 को दो चरणों में होगा। इसके बाद, 14 नवंबर 2025 को वोटों की गिनती की जाएगी। इस चुनावी प्रक्रिया के दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच कांटे की टक्कर होने की संभावना है। AIMIM और जन सुराज जैसे नए राजनीतिक दल अपने-अपने तरीके से बिहार की राजनीतिक स्थिति को प्रभावित करने के लिए तैयार हैं।
जन सुराज का राज्य की सभी 243 सीटों पर दावा
AIMIM के साथ-साथ, जन सुराज पार्टी ने भी बिहार विधानसभा चुनाव में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करने के लिए सभी 243 सीटों पर दावेदारी पेश की है। जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने इस चुनाव में पार्टी के लिए पूरा राज्य चुनने का निर्णय लिया है। यह कदम एक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि जन सुराज ने बड़े राजनीतिक दलों को चुनौती देने का वादा किया है।
बिहार की राजनीति में एक नया मोड़
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में AIMIM और जन सुराज दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दलों के रूप में उभर रहे हैं। AIMIM की रणनीति सीमांचल क्षेत्र पर केंद्रित है, जहां मुस्लिम मतदाता महत्वपूर्ण संख्या में हैं। दूसरी ओर, जन सुराज ने राज्य की सभी 243 सीटों पर अपनी दावेदारी पेश कर दी है, जिससे चुनावी मुकाबला और भी रोचक हो गया है।
यह चुनावी युद्ध बिहार की राजनीति के लिए निर्णायक साबित हो सकता है, क्योंकि इन नई पार्टियों का उदय राज्य के पुराने राजनीतिक समीकरणों को चुनौती दे सकता है। चुनावों के परिणाम राज्य की राजनीतिक दिशा को नए रूप में आकार देने में मदद कर सकते हैं।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 AIMIM और जन सुराज जैसे दलों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर होगा। AIMIM ने अब तक की सबसे बड़ी तैयारी की है, और पार्टी के उम्मीदवारों की सूची से साफ है कि वह बिहार की राजनीति में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। चुनाव में सबकी नजरें इस बात पर होंगी कि क्या AIMIM सीमांचल में अपनी पकड़ बना पाता है और क्या जन सुराज अपने बड़े चुनावी दावे को सही ठहरा पाता है। इन दोनों दलों के बीच होने वाली कड़ी टक्कर बिहार की राजनीति के लिए नए मोड़ का संकेत दे सकती है।



