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माघी पूर्णिमा पर बिहार में सड़क दुर्घटनाओं और गंगा में डूबने से 9 लोगों की मौत

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बिहार में माघी पूर्णिमा के पावन अवसर पर गंगा स्नान के लिए जा रहे श्रद्धालुओं के लिए यह दिन बेहद दुखद साबित हुआ। अलग-अलग घटनाओं में कुल नौ लोगों की जान चली गई। बक्सर और मोकामा में सड़क दुर्घटनाओं में सात लोगों की मौत हो गई, जबकि राजधानी पटना में गंगा स्नान के दौरान दो लोग नदी में डूब गए।

इन घटनाओं से पूरे राज्य में शोक का माहौल है। धार्मिक आस्था के साथ निकले परिवारों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। प्रशासन की ओर से जांच और राहत कार्य जारी हैं।

बक्सर में सड़क हादसे में चार लोगों की मौत

Buxar जिले में नया भोजपुर थाना क्षेत्र के चंदा गांव के पास राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना हुई। माघी पूर्णिमा के मौके पर एक ही परिवार के चार लोग गंगा स्नान के लिए बक्सर जा रहे थे।

इसी दौरान उनकी कार की टक्कर एक डंपर से हो गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि मौके पर ही तीन लोगों की मौत हो गई। गंभीर रूप से घायल एक व्यक्ति को सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी भी मौत हो गई।

हादसे के बाद कुछ समय के लिए सड़क पर अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और यातायात को नियंत्रित किया गया।

हादसे की जांच में जुटी पुलिस

पुलिस अधिकारियों के अनुसार दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है। प्रारंभिक तौर पर तेज रफ्तार और भारी वाहनों की आवाजाही को हादसे की वजह माना जा रहा है। क्षतिग्रस्त वाहनों को सड़क से हटाकर traffic सामान्य कराया गया।

स्थानीय लोगों ने बताया कि माघी पूर्णिमा के कारण इस मार्ग पर वाहनों की संख्या अधिक थी। पुलिस ने लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है।

मोकामा जा रहे श्रद्धालुओं की गाड़ी को मारी टक्कर

Patna जिले में एक और बड़ा हादसा सामने आया। घोसवरी थाना क्षेत्र के सहरी गांव के पास एनएच-33 पर शनिवार देर रात यह दुर्घटना हुई। गब्बे लोदीपुर थाना क्षेत्र के मेहुस शेखपुरा गांव से पांच लोग जुगाड़ गाड़ी पर सवार होकर मोकामा गंगा स्नान के लिए जा रहे थे।

रास्ते में उनकी गाड़ी को एक अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी। इस हादसे में प्रयाग मांझी की पत्नी मुन्नी मांझी (33), चांद मांझी के पुत्र महेश मांझी (30) और रामस्वरूप मांझी के पुत्र संजय मांझी (33) की मौके पर ही मौत हो गई।

दो घायलों की हालत गंभीर

हादसे में दो अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। बच्चू मांझी के पुत्र घनश्याम मांझी और लच्चो मांझी के पुत्र अशोक मांझी को इलाज के लिए NMCH भेजा गया है।

डॉक्टरों के अनुसार दोनों की हालत नाजुक बनी हुई है। पुलिस अज्ञात वाहन की पहचान के लिए आसपास के इलाकों में जांच कर रही है।

त्योहारों में यात्रा सुरक्षा पर उठे सवाल

लगातार हो रही दुर्घटनाओं ने festival travel safety को लेकर चिंता बढ़ा दी है। त्योहारों के दौरान रात में यात्रा, असुरक्षित वाहन और भीड़भाड़ हादसों का कारण बन रही है।

प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे सुरक्षित साधनों से ही यात्रा करें। भविष्य में ऐसे हादसों से बचने के लिए निगरानी बढ़ाने की बात कही गई है।

पटना में गंगा स्नान के दौरान दो श्रद्धालु डूबे

सड़क हादसों के अलावा पटना में गंगा नदी ने भी दो लोगों की जान ले ली। दीघा क्षेत्र के पाटीपुल घाट पर माघी पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान के दौरान दो श्रद्धालु नदी में डूब गए।

दोनों गयाजी जिले के चाकन स्थित ततारपुर गांव के निवासी थे। वे अपने परिवार के साथ स्नान के लिए आए थे। स्नान के दौरान तेज धारा में बह जाने से यह हादसा हुआ।

डूबने वाले लोगों की पहचान गार्ड बाबू (45) और धनंजय कुमार (25) के रूप में हुई है।

एसडीआरएफ की तलाश जारी

घटना की सूचना मिलते ही एसडीआरएफ की टीम ने गंगा में search operation शुरू कर दिया। नावों और गोताखोरों की मदद से दोनों की तलाश की जा रही है।

स्थानीय लोग भी राहत कार्य में जुटे हैं। घाट पर मौजूद परिजन, खासकर महिलाएं, रोते-बिलखते नजर आए। देर शाम तक तलाश अभियान जारी रहा।

प्रशासन ने की सतर्कता बरतने की अपील

प्रशासन का कहना है कि गंगा में जलस्तर और बहाव तेज होने के कारण स्नान करना जोखिम भरा था। घाटों पर warning announcements की गई थीं, लेकिन भारी भीड़ के कारण नियंत्रण कठिन हो गया।

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।

शोक में डूबा बिहार

माघी पूर्णिमा को लेकर जहां श्रद्धा और आस्था का माहौल होना चाहिए था, वहीं इन हादसों ने कई परिवारों को गहरे दुख में डाल दिया। एक ही दिन में इतनी मौतों ने राज्य को झकझोर कर रख दिया है।

परिजन और स्थानीय लोग प्रशासन से बेहतर road safety और river security व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।

भविष्य के लिए सबक

इन घटनाओं ने साफ कर दिया है कि बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान अतिरिक्त सतर्कता जरूरी है। सड़क और नदी दोनों जगहों पर सख्त निगरानी और व्यवस्थाओं की जरूरत है।

अब सभी की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है, ताकि भविष्य में माघी पूर्णिमा जैसे पावन अवसर फिर कभी शोक में न बदलें।

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