क्या आप जानते हैं कि भारत में कुछ निर्माण सिर्फ कंक्रीट और लोहे से नहीं, बल्कि संघर्ष, राजनीति और इंसानी जिद से बने हैं? यह वीडियो आपको ले चलता है तीस्ता बराज की उस अनकही यात्रा पर, जहाँ एक नदी ने पूरे उत्तर बंगाल की तस्वीर बदल दी। यह कहानी है तीस्ता नदी की— जहाँ पौराणिक कथाएँ, विज्ञान, भारत–बांग्लादेश जल विवाद, किसानों की पीड़ा, जलवायु परिवर्तन और आधुनिक इंजीनियरिंग—सब एक साथ मिलते हैं। 1975 में शुरू हुई यह परियोजना कैसे 9.22 लाख हेक्टेयर ज़मीन की सिंचाई, बिजली उत्पादन और पीने के पानी की उम्मीद बनी? 2023 की ग्लेशियर त्रासदी ने किन सवालों को जन्म दिया? और कैसे गाजोल-डोबा आज एक उभरता हुआ इको-टूरिज्म हब बन चुका है? यह सिर्फ एक बराज की कहानी नहीं— यह कहानी है इंसान, प्रकृति और सत्ता के टकराव की। वीडियो अंत तक देखिए—यकीन मानिए, आप चौंक जाएंगे।
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