होमSocietyट्रक हड़ताल का ग्रामीण मार्केट पर असर

ट्रक हड़ताल का ग्रामीण मार्केट पर असर

Published on

बालू, सीमेंट, गिट्टी, छड़ व चावल का कारोबार चौपट

कौशलेन्द्र झा

मुजफ्फरपुर। बिहार में लागू नई खनन व भूतत्व नीति के बिरोध में गुरुवार से ट्रक मालिको के हड़ताल पर चले जाने का ग्रामीण बाजारो पर असर दिखने लगा है। विशेषकर बालू, गिट्टी व चावल का आबक बंद होने से मीनापुर के नेउरा, मुस्तफागंज, बनघारा, सिवाइपट्टी, टेंगरारी, डेराचौक, छपरा, रामपुरहरी व धरमपुर आदि बाजार की रौनक खत्म होने लगी है।
शुक्रवार को नेउरा बाजार पहुंचने पर शंकर ट्रेडर्स के मालिक रवि शंकर ने बताया कि बालू व गिट्टी नही आने से कारोबार चौपट होने के कगार पर है। चावल कारोबारी सुनील कुमार बतातें हैं कि उनका कई ट्रक रास्ते में फंसा है और दुकान पर माल समाप्त होने को है। बालू दुकानदार गरीबनाथ साह ने आज देापहर को ही अपना दुकान बंद कर लिया है। क्योंकि उनके पास अब बेचने को बालू नही है। सीमेंट कारोबारी अरविन्द कुमार बतातें है कि पूरा गोदाम खाली पड़ा है और ट्रक हड़ताल पर है। यही मौजूद युवा कारोबारी हिमांशु गुप्ता कहतें हैं कि जिन कारोबारी के पास जीएसटी नम्बर है, सरकार को उनके लिए विशेष व्यवस्था करनी चाहिए।

ग्राहक, मजदूर व छोटे दुकानदार परेशान

परेशानी सिर्फ कारोबारियों को है, ऐसा नही है। बाजार पर बालू खरीदने आये प्रशांत कुमार को निराश होकर घर लौटना पड़ा। क्योंकि, बाजार में बालू है ही नही। किराना दुकानदार अशोक कुमार बतातें हैं खुदार मार्केट में बिकने वाला चावल, दाल व प्याज की कीमतो में उछाल आ गया है। हालात में शीघ्र सुधार नही हुआ तो स्थिति और भी बिगड़ने का खतरा है। ट्रक चालक ब्रजेश कुमार यादव बतातें हैं कि दो रोज से बेकार बैठे है। लिहाजा, घर का खर्चा चलाना मुश्किल हो रहा है। इसी प्रकार छोटे कारोबारी चंदन कुमार हो या शुभम कुमार ट्रक के हड़ताल को लेकर सभी ने अपने अपने तरीके से परेशानी बयां कर के आने वाले दिनो में संकट के और गहराने का संकेत दिया है।

KKN लाइव WhatsApp पर भी उपलब्ध है, खबरों की खबर के लिए यहां क्लिक करके आप हमारे चैनल को सब्सक्राइब कर सकते हैं।

KKN Public Correspondent Initiative


Discover more from

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Latest articles

तीस मिनट में 9 मीटर पानी! क्या हिमालय बदल रहा है?

26 अगस्त 2026 को नेपाल-चीन सीमा के पास आई विनाशकारी बाढ़ ने हिमालय की...

बिहार की सड़कें बन गईं मौत की सड़क? 5 साल में 34% बढ़े हादसे, 9,347 लोगों की गई जान

आंकड़ों का एक्स-रे: दुर्घटनाएं बढ़ीं, मौतें उससे भी तेज बढ़ीं KKN ब्यूरो। एक सड़क। एक...

लग गया ट्रांसफार्मर; किसानों की लड़ाई रंग लाई

जिस समस्या के समाधान की उम्मीद किसानों ने लगभग छोड़ दी थी, आखिरकार उसी...

बिहार की बाढ़: पानी उतर जाएगा, लेकिन कब तक पटरी पर लौटेंगी लोगों की जिंदगी?

क्या बाढ़ आने के बाद नाव भेज देना, राहत शिविर खोल देना और कुछ...

More like this

बिहार की सड़कें बन गईं मौत की सड़क? 5 साल में 34% बढ़े हादसे, 9,347 लोगों की गई जान

आंकड़ों का एक्स-रे: दुर्घटनाएं बढ़ीं, मौतें उससे भी तेज बढ़ीं KKN ब्यूरो। एक सड़क। एक...

लग गया ट्रांसफार्मर; किसानों की लड़ाई रंग लाई

जिस समस्या के समाधान की उम्मीद किसानों ने लगभग छोड़ दी थी, आखिरकार उसी...

बिहार की बाढ़: पानी उतर जाएगा, लेकिन कब तक पटरी पर लौटेंगी लोगों की जिंदगी?

क्या बाढ़ आने के बाद नाव भेज देना, राहत शिविर खोल देना और कुछ...

ध्वनि प्रदूषण: जुलूस आगे बढ़ता रहा… लेकिन, कानों में पड़ने वाला शोर वहीं रह गया

डीजे की धुन पर नाचते बच्चों को देखकर भीड़ तालियां बजाती है। किसी को...

क्या नकारात्मक सोच इंसान को उसी अंधेरे में धकेल देती है, जिसे वह दुनिया में खोज रहा होता है?

हर घटना में षड्यंत्र, हर परंपरा में खामी, हर व्यक्ति में स्वार्थ और हर...

डैम, मानव सभ्यता की प्यास बुझाने वाला वरदान या आने वाली पीढ़ियों के लिए खड़ा किया जा रहा जल-खतरा?

नदियों को बांधकर इंसान ने पानी, बिजली और खेती पर नियंत्रण हासिल किया। लेकिन...

मीनापुर में बनेगा शहीद स्मृति पार्क, रामपुरहरि में प्रस्तावित है भव्य तोरण द्वार

अमर शहीद जुब्बा सहनी, वांगुर सहनी और पंडित सहदेव झा समेत स्वतंत्रता सेनानियों की...

मीनापुर में भूमि सर्वेक्षण: जमीन आपकी, लेकिन रिकॉर्ड में किसका नाम?

पुराने खतियान, बदली हुई चौहद्दी और अधूरे उत्तराधिकार के बीच रैयतों के सामने नई...

मीनापुर में गूंजा जश्न-ए-आजादी: शहीद स्मृति पार्क और भव्य तोरण द्वार बनाने का ऐलान

क्रांति महोत्सव-2026 में विधायक अजय कुमार ने की घोषणा, विधान पार्षद वंशीधर ब्रजवासी बोले—राजकीय...

मामुली बारिश… और अंधेरे में डूब जाता है बिहार का गांव

ट्री कटिंग पर हर साल करोड़ों के टेंडर, फिर भी पेड़ की टहनी से...

कोल्ड ड्रिंक: ताजगी या धीमा ज़हर? क्या कहती है वैज्ञानिक रिसर्च?

KKN ब्यूरो। गर्मी हो, पार्टी हो या सफर, कोल्ड ड्रिंक आज हमारी जीवनशैली का...

ग्रामीण सड़कों के ‘जानलेवा’ स्पीड ब्रेकर: सुरक्षा के नाम पर जनता की जेब और सेहत पर हमला?

KKN ब्यूरो। ग्रामीण भारत में पक्की सड़कों का जाल तेजी से बिछा है। प्रधानमंत्री...

बिहार में शराबबंदी: सामाजिक सुधार या भ्रष्टाचार की नई अर्थव्यवस्था?

क्या शराबबंदी सफल हुई या उसने भ्रष्टाचार को नया ईंधन दिया? KKN ब्यूरो। एक  अप्रैल...

श्रेष्ठता का भ्रम: जब गाली, दोषारोपण और अपमान बन जाते हैं सामाजिक फैशन

क्या दूसरों को नीचा दिखाकर कोई वास्तव में बड़ा बन सकता है? KKN ब्यूरो। आज...

हिन्दी पत्रकारिता: मिशन से बाज़ार तक का सफर

क्या हिन्दी पत्रकारिता आज भी जनता की आवाज़ है? हिन्दी पत्रकारिता दिवस विशेष KKN ब्यूरो। क्या...