क्रांति महोत्सव-2026 में विधायक अजय कुमार ने की घोषणा, विधान पार्षद वंशीधर ब्रजवासी बोले—राजकीय समारोह का दर्जा दिलाने के लिए उठाएंगे आवाज
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KKN ब्यूरो। आजादी की लड़ाई में मीनापुर की मिट्टी ने जिन अनाम और अमर सेनानियों के कदमों की आहट सुनी थी, रविवार को उसी इतिहास को फिर से याद किया गया। कविवासर विकास परिषद की ओर से यदु भगत किसान महाविद्यालय परिसर में क्रांति महोत्सव के तहत जश्न-ए-आजादी समारोह का आयोजन किया गया। समारोह का उद्घाटन मीनापुर के विधायक अजय कुमार ने किया। इस अवसर पर विधायक ने मीनापुर के स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास को संरक्षित करने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि अमर शहीद जुब्बा सहनी, वांगुर सहनी, पंडित सहदेव झा समेत अन्य स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृति में मीनापुर में शहीद स्मृति पार्क बनाया जाएगा। इसके साथ ही रामपुरहरि में स्थित शहीद स्मारक के समीप एक भव्य तोरण द्वार बनाने की भी घोषणा की।
गुमनाम सेनानियों को मिलेगा सम्मान: विधायक
विधायक अजय कुमार ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन में मीनापुर के अनेक लोगों ने अपना सर्वस्व न्योछावर किया, लेकिन उनमें से कई नाम इतिहास के पन्नों में अपेक्षित स्थान नहीं पा सके। उन्होंने कहा कि 16 अगस्त 1942 को अंग्रेजी पलटन को खदेड़ने वाले गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों को उचित सम्मान दिलाने के लिए पहल की जाएगी। उन्होंने कहा कि क्रांति महोत्सव को आने वाले वर्षों में और व्यापक बनाया जाएगा। इसका उद्देश्य केवल एक आयोजन करना नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास, सेनानियों के त्याग और राष्ट्र के प्रति समर्पण से परिचित कराना है। विधायक ने कहा कि जिन लोगों ने आजादी के लिए अपना जीवन दांव पर लगा दिया, उनकी स्मृतियों को संरक्षित करना वर्तमान पीढ़ी की जिम्मेदारी है।
‘राष्ट्रप्रेम सबसे ऊपर’ : वंशीधर ब्रजवासी
समारोह में विधान पार्षद वंशीधर ब्रजवासी ने कहा कि राष्ट्रप्रेम से बड़ी कोई भावना नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति के मन में राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना हो जाए तो किसी भी चुनौती का सामना किया जा सकता है। उन्होंने क्रांति महोत्सव को राजकीय समारोह का दर्जा दिलाने के लिए विधान परिषद में आवाज उठाने की घोषणा की। वंशीधर ब्रजवासी ने कहा कि इस संबंध में वह मुख्यमंत्री को पत्र भी लिख चुके हैं। उन्होंने कहा कि मीनापुर के स्वतंत्रता आंदोलन की ऐतिहासिक भूमिका को व्यापक स्तर पर पहचान दिलाने की आवश्यकता है।
सहदेव झा के पौत्र हुए सम्मानित
समारोह के दौरान स्वतंत्रता सेनानी पंडित सहदेव झा के पौत्र परमानंद झा को मंच पर सम्मानित किया गया। यह सम्मान केवल एक परिवार के लिए नहीं, बल्कि उन तमाम परिवारों के प्रति सम्मान का प्रतीक रहा, जिनके पूर्वजों ने स्वतंत्रता आंदोलन में अपना योगदान दिया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों के परिजनों को सार्वजनिक रूप से सम्मानित करने से नई पीढ़ी को स्थानीय इतिहास से जुड़ने का अवसर मिलता है।

लोकगीतों में जीवंत हुआ स्वतंत्रता आंदोलन
क्रांति महोत्सव का स्वर केवल भाषणों तक सीमित नहीं रहा। मंच पर लोकगीत, देशभक्ति गीत, नृत्य, झांकी और नाटक के जरिए बिहार की लोक संस्कृति और स्वतंत्रता आंदोलन की स्मृतियों को जीवंत किया गया। आकाशवाणी पटना के लोकगीत गायक शंभू राम ने लोकगीत प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। लोक कलाकार प्रेम रंजन ने ‘सोने की चिड़ैया बोले’ गीत की प्रस्तुति दी। सचिन राज के निर्देशन में ‘बटोहिया—सुंदर सुभूमि भैया भारत के देशवा’ गीत पर आकर्षक झांकी प्रस्तुत की गई। वहीं ऋषिका पोद्दार ने विद्यापति के ‘जय जय भैरवी असुर भयावनि’ गीत की प्रस्तुति से दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी।
बच्चों ने संविधान और देशभक्ति का दिया संदेश
आदर्श विद्यापीठ, टेंगरारी के बच्चों ने संविधान पर आधारित लघु नाटक प्रस्तुत किया। नन्हे कलाकार तेजस्वी रंजन ने देशभक्ति गीत पेश किया। नरेश सावन ने ‘सैंया गइलें कारगिल बॉर्डरवा’ गीत प्रस्तुत किया। वहीं आदर्श मध्य विद्यालय, मीनापुर के बच्चों ने ‘तोहार बाप के ना हऽ कश्मीर’ गीत पर सामूहिक नृत्य प्रस्तुत किया। यदु भगत किसान महाविद्यालय की छात्राओं ने ‘मिथिला नगरिया निहाल सखिया’ गीत पर नृत्य प्रस्तुत कर मिथिला की सांस्कृतिक छटा बिखेरी। ऋषिका पोद्दार ने ‘हमार देशवा सोनवा के चिड़ैया’ गीत की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम की सबसे प्रभावशाली प्रस्तुतियों में ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ गीत पर आधारित झांकी रही। इसके अलावा आदर्श विद्यापीठ टेंगरारी और यदु भगत कॉलेज के विद्यार्थियों ने छठ, झिझिया और बिहारी संस्कृति पर आधारित झांकियां प्रस्तुत कीं।

महंगाई पर गजल ने भी खींचा ध्यान
कार्यक्रम में कैलाश महतो ने महंगाई के मुद्दे पर गजल प्रस्तुत की। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच सामाजिक सरोकार से जुड़े इस कार्यक्रम ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। इस दौरान आयोजन स्थल पर देशभक्ति, लोक संस्कृति और बिहार की परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिला।
नई पीढ़ी को इतिहास से जोड़ने की पहल
क्रांति महोत्सव का मूल उद्देश्य मीनापुर के स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुंचाना रहा। आयोजकों और वक्ताओं ने कहा कि इतिहास केवल किताबों में दर्ज घटनाओं का नाम नहीं है। वह उन लोगों की स्मृति भी है, जिन्होंने कठिन समय में अपने वर्तमान को देश के भविष्य के लिए कुर्बान कर दिया। मीनापुर के संदर्भ में 1942 का भारत छोड़ो आंदोलन विशेष महत्व रखता है। ऐसे आयोजनों के जरिए स्थानीय स्वतंत्रता सेनानियों और उनके संघर्षों को सार्वजनिक स्मृति में जीवित रखने की कोशिश की जा रही है।
इन लोगों की रही मौजूदगी
कार्यक्रम की अध्यक्षता सेवानिवृत्त बीईओ शंभू प्रसाद ने की। संचालन वरीय शिक्षक डॉ. श्यामबाबू प्रसाद ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन नीरज कुमार सिंह ने किया। समारोह में सेवानिवृत्त डीएसपी मिथिलेश झा, थानाध्यक्ष सुभाष मुखिया, सांसद प्रतिनिधि प्रो. जयनंदन सहनी, पंकज किशोर पप्पू, सदरूल खान, अमित साह, जदयू के पूर्व जिलाध्यक्ष रामबाबू कुशवाहा, जिला पार्षद हिमांशु गुप्ता, नीलम कुशवाहा, सूर्यदेव देहाती, सरपंच संघ के जिलाध्यक्ष मनोज सिंह, अशोक दीवाना, ऋषिकेश राज, अवधेश श्रीवास्तव, विजय प्रसाद, पवन कुमार समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
अब सवाल स्मृति को संरक्षित करने का है
मीनापुर में क्रांति महोत्सव के विस्तार और शहीद स्मृति पार्क की घोषणा ने स्थानीय इतिहास को संरक्षित करने की बहस को नई दिशा दी है। यदि घोषणाएं धरातल पर उतरती हैं, तो यह केवल स्मारक निर्माण नहीं होगा, बल्कि मीनापुर के स्वतंत्रता आंदोलन की सामूहिक स्मृति को स्थायी स्वरूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा। क्योंकि आजादी केवल 15 अगस्त की तारीख नहीं है। आजादी उन अनगिनत बलिदानों की विरासत है, जिनमें कई नाम इतिहास के शोर में कहीं दब गए। उन्हें फिर से स्मृति में लाना ही शायद किसी समाज की अपने अतीत के प्रति सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
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