बिहार के खगड़िया जिले में एक शादी की खुशी मातम में बदल गई। शनिवार रात कुतुबपुर गांव में एक शादी के दौरान अचानक गोली चलने से दूल्हे मो. इरशाद की मौत हो गई। 25 वर्षीय इरशाद की गर्दन में गोली लगी, जिसके बाद वह अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। यह घटना जिले के मुफस्सिल थाना क्षेत्र में हुई। मृतक इरशाद गांव का निवासी था, और इस हादसे ने पूरे गांव को स्तब्ध कर दिया है। वहीं दुल्हन, जो अभी शादी के बाद विधवा हो गई है, शोक में डूब चुकी है।
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दुल्हे के भाई का बयान: गोलीबारी के दौरान हुआ हादसा
दूल्हे के भाई मोहम्मद शमशाद ने बताया कि शादी के बाद सभी लोग एक-दूसरे को बधाई दे रहे थे। तभी जश्न के तौर पर हर्ष फायरिंग की गई। एक गोली मिस हो गई, जिसके बाद बंदूकधारी युवक ने फिर से बंदूक लोड किया और हवा में गोली चलाई। लेकिन उस समय बंदूक का मुँह नीचे था, और गोली सीधे इरशाद की गर्दन में लग गई।
गोली लगने के बाद इरशाद को आनन-फानन में पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां डॉक्टरों ने उसकी गंभीर हालत को देखते हुए उसे बेहतर इलाज के लिए रेफर कर दिया। इसके बाद, उसे बेगूसराय जिले के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। फिर उसे पटना भेजा गया, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।
परिजनों की शोक में डूबती कहानी और पुलिस की जांच
घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। घटना के तुरंत बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ FIR दर्ज की और उसकी तलाश शुरू कर दी। आरोपी घटना के बाद फरार हो गया है, और पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए प्रयासरत है।
परिजनों का कहना है कि इरशाद मुंबई में सिलाई का काम करता था। वह अपने घर कुतुबपुर आया था, अपनी शादी के लिए। इरशाद की शादी रुखसार से हो रही थी, जो कुतुबपुर के मोहम्मद अमजद की बेटी थी। दोनों का निकाह संपन्न हो चुका था, और जैसे ही छोहारा (संगत वितरित करने की परंपरा) बांटा जा रहा था, गोलीबारी हुई। एक गोली तो खाली चली गई, लेकिन दूसरी गोली सीधे दूल्हे की गर्दन में लग गई। इस घटना ने खुशी के इस मौके को पल भर में गम में बदल दिया।
शादी के दौरान गोलीबारी की परंपरा और उसके खतरनाक परिणाम
यह घटना एक बार फिर यह सवाल उठाती है कि शादी जैसे खुशी के मौके पर हर्ष फायरिंग जैसी परंपरा का पालन क्यों किया जाता है। ऐसी घटनाएं अब आम होती जा रही हैं, जहां शादी के जश्न में चलाई गई गोली किसी की जान ले लेती है। यह स्पष्ट है कि इस परंपरा को खत्म करने की आवश्यकता है, क्योंकि इससे न केवल एक व्यक्ति की जान जा सकती है, बल्कि परिवार और समुदाय के लिए यह दुखद अनुभव भी बन सकता है।
पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई
इस घटना के बाद सदर एसडीपीओ, मुकुल कुमार रंजन ने कहा कि पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है। साथ ही, मामले में FIR की कार्रवाई की जा रही है और आरोपी की शीघ्र गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें लगातार काम कर रही हैं।
यह घटना एक बार फिर यह दिखाती है कि हर्ष फायरिंग, जो शादी के समय खुशी और उत्साह का प्रतीक मानी जाती है, कितनी खतरनाक हो सकती है। जब भी ऐसे आयोजनों में हथियारों का इस्तेमाल होता है, तो जोखिम बढ़ जाता है। पुलिस और प्रशासन को अब इस पर कड़ी नजर रखनी चाहिए, ताकि भविष्य में इस प्रकार के हादसे न हों।
शादी की खुशी से लेकर मातम तक का सफर
इरशाद के परिवार और पूरे गांव के लिए यह घटना बेहद दुखद है। इरशाद, जो मुंबई में काम करता था, अपने घर लौटकर शादी की तैयारी कर रहा था। उसकी शादी की खुशी एक पल में दुख में बदल गई। जिस लड़की से उसने शादी की थी, वह अब विधवा हो चुकी है। उसकी आंखों में केवल आंसू हैं, और उसकी जीवन यात्रा में एक गहरा खालीपन छोड़ गया है।
इस घटना ने यह भी साबित कर दिया कि हर्ष फायरिंग जैसे खतरनाक क्रियाकलापों से समाज को पूरी तरह जागरूक करना जरूरी है। ऐसे क्रियाकलापों की अनदेखी से किसी की जान जा सकती है। प्रशासन को इसे लेकर सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि इस तरह के हादसों से भविष्य में बचा जा सके।
यह घटना न केवल एक व्यक्तिगत नुकसान है, बल्कि समाज के लिए भी एक बड़ी चेतावनी है। हर्ष फायरिंग जैसे परंपराओं को अब समाप्त किया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं से बचा जा सके। शादी के जैसे खुशनुमा मौके को अब कभी भी ऐसे खतरनाक हादसों से बचाया जा सकता है, अगर हम इसे रोकने के लिए जरूरी कदम उठाएं।
इस घटना ने यह साबित कर दिया कि कभी भी एक छोटी सी लापरवाही एक जीवन का अंत कर सकती है। इस घटना से हमें सिखने की जरूरत है कि जब भी हथियारों का इस्तेमाल किया जाए, तो पूरी तरह से सावधानी बरती जानी चाहिए।



