होमBiharबिहार बोर्ड टॉपर को मिलेगा बड़ा इनाम, 3 दिसंबर को होगा सम्मान...

बिहार बोर्ड टॉपर को मिलेगा बड़ा इनाम, 3 दिसंबर को होगा सम्मान समारोह

Published on

बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) द्वारा 3 दिसंबर को आयोजित होने वाले मेधा दिवस समारोह की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। यह दिन देशरत्न डॉ. राजेन्द्र प्रसाद की जयंती के अवसर पर मनाया जाएगा। इस अवसर पर बिहार बोर्ड की मैट्रिक और इंटर परीक्षा में टॉप करने वाले 151 मेधावी छात्रों को सम्मानित किया जाएगा। इस वर्ष पुरस्कार राशि में दोगुनी वृद्धि की गई है, जो पिछले साल के मुकाबले कहीं अधिक है।

समारोह की विशेषताएं:

बिहार बोर्ड द्वारा आयोजित मेधा दिवस समारोह इस बार और भी भव्य होगा। इस वर्ष, कुल 151 छात्रों को सम्मानित किया जाएगा, जिनमें 123 मैट्रिक और 28 इंटर के छात्र-छात्राएं शामिल होंगे। पुरस्कार राशि को दोगुना करने का निर्णय बोर्ड ने इस साल लिया है, ताकि छात्रों को अपनी पढ़ाई में आगे बढ़ने और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने में मदद मिल सके।

टॉपरों को मिलने वाली पुरस्कार राशि:

इस बार मैट्रिक और इंटर में टॉप करने वाले विद्यार्थियों को शानदार पुरस्कार मिलेगा। प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले छात्र को दो लाख रुपये की पुरस्कार राशि दी जाएगी, वहीं द्वितीय स्थान पर रहने वाले छात्र को 1.5 लाख रुपये और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले छात्र को एक लाख रुपये दिए जाएंगे। पिछले वर्ष की तुलना में यह राशि काफी अधिक है, क्योंकि पिछले साल प्रथम स्थान पाने वाले को एक लाख, द्वितीय को 75 हजार और तृतीय को 50 हजार रुपये मिले थे।

अन्य पुरस्कार और सम्मान:

इस बार सिर्फ पहले तीन स्थानों पर रहने वाले छात्रों को ही नहीं, बल्कि अन्य उच्च स्थानों पर रहने वाले छात्रों को भी सम्मानित किया जाएगा। मैट्रिक में चौथे से लेकर दसवें स्थान तक रहने वाले छात्रों को 20 हजार रुपये की पुरस्कार राशि दी जाएगी। पिछले साल इन छात्रों को 10 हजार रुपये दिए गए थे, लेकिन इस बार राशि दोगुनी कर दी गई है। इंटर के छात्रों के लिए भी पुरस्कार राशि में बढ़ोतरी की गई है। चौथे और पांचवे स्थान पर रहने वाले छात्रों को 30 हजार रुपये दिए जाएंगे, जबकि पिछले साल उन्हें 15 हजार रुपये मिलते थे।

लैपटॉप, मेडल और प्रमाण पत्र:

इस बार बोर्ड ने टॉपरों को लैपटॉप देने का भी निर्णय लिया है। इसके अलावा, उन्हें मेडल और प्रमाण पत्र भी दिए जाएंगे। लैपटॉप देने का उद्देश्य यह है कि छात्र तकनीकी रूप से मजबूत बने और ऑनलाइन माध्यम से अपनी पढ़ाई जारी रख सकें। आज के डिजिटल युग में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए यह कदम महत्वपूर्ण है, जिससे छात्र अपने भविष्य को और बेहतर बना सकें।

समारोह में होंगे विशिष्ट अतिथि:

इस समारोह में कई प्रमुख शिक्षा विद भी शामिल होंगे। इसमें प्रमुख शिक्षा विद् अजय घटक का भी संबोधन होगा। इसके अलावा, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद मेमोरियल व्याख्यान भी दिया जाएगा, जो इस कार्यक्रम का एक अहम हिस्सा होगा। यह व्याख्यान डॉ. राजेन्द्र प्रसाद के योगदान और उनके विचारों पर आधारित होगा, जो न केवल बिहार बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत रहे हैं।

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए प्रेरणा:

बिहार बोर्ड के इस कदम से छात्र न केवल अपनी पढ़ाई में अच्छा प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित होंगे, बल्कि उन्हें विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए भी जरूरी संसाधन मिलेंगे। बोर्ड ने अपनी पुरस्कार राशि बढ़ाकर यह सुनिश्चित किया है कि छात्र आने वाली चुनौतियों का सामना बेहतर तरीके से कर सकें। विशेषकर ऐसे छात्र जो मेडिकल, इंजीनियरिंग जैसे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, उनके लिए यह एक शानदार अवसर होगा।

मेधा दिवस का महत्व:

मेधा दिवस समारोह का आयोजन बिहार के शिक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण घटना है। यह न केवल उन छात्रों को मान्यता देने का एक अवसर है जिन्होंने कठिन मेहनत से उत्कृष्टता प्राप्त की है, बल्कि यह दूसरों के लिए भी प्रेरणा का काम करता है। इस कार्यक्रम के माध्यम से बिहार बोर्ड का उद्देश्य छात्र समुदाय में शिक्षा के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण को बढ़ावा देना है।

बिहार बोर्ड का यह समारोह राज्य के लिए एक ऐतिहासिक घटना साबित होगा। 3 दिसंबर को आयोजित होने वाले इस मेधा दिवस समारोह में टॉप करने वाले छात्रों को सम्मानित किया जाएगा। बढ़ी हुई पुरस्कार राशि, लैपटॉप और अन्य पुरस्कारों के साथ, यह कार्यक्रम छात्रों के लिए एक अनमोल अवसर होगा। इसके माध्यम से बिहार बोर्ड छात्रों को भविष्य के लिए बेहतर अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध है। यह कदम राज्य के शिक्षा क्षेत्र में सुधार की दिशा में एक अहम पहल है।

Read this article in

KKN लाइव WhatsApp पर भी उपलब्ध है, खबरों की खबर के लिए यहां क्लिक करके आप हमारे चैनल को सब्सक्राइब कर सकते हैं।

KKN Public Correspondent Initiative


Discover more from

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Latest articles

मीनापुर की राजनीति: 1951 से 2025 तक सत्ता बदलती रही, लेकिन क्या बदला राजनीति का मिजाज?

मीनापुर की राजनीति को अगर सिर्फ पिछले 10 या 15 वर्षों के चुनाव से...

ब्रह्मपुत्र पर चीन की चाल? महाडैम के नीचे क्या छिपा है

ब्रह्मपुत्र नदी के रास्ते में क्या कोई ऐसा खतरा तैयार हो रहा है, जिसका...

बिहार का पलायन: क्या रोज़गार की तलाश में निकलती पीढ़ियां कभी लौटेंगी?

बिहार के किसी छोटे से गांव में शाम ढलते ही अगर आप बस अड्डे,...

कहां गुम हो रही हैं बिहार की बेटियां?

गुमशुदगी का आंकड़ा गंभीर है एक लड़की घर से निकलती है। परिवार समझता है कि...

More like this

बिहार का पलायन: क्या रोज़गार की तलाश में निकलती पीढ़ियां कभी लौटेंगी?

बिहार के किसी छोटे से गांव में शाम ढलते ही अगर आप बस अड्डे,...

कहां गुम हो रही हैं बिहार की बेटियां?

गुमशुदगी का आंकड़ा गंभीर है एक लड़की घर से निकलती है। परिवार समझता है कि...

बिहार में बारिश और तेज हवा ने फिर बदला मौसम का मिजाज, 26 जिलों में अलर्ट; आखिर कब थमेगा यह सिलसिला?

आसमान में बादल हैं। रुक-रुक कर बारिश लगातार हो रही है, अचानक तेज बौछार...

शिक्षक से बड़ा कौन? भारत की उस परंपरा की पड़ताल, जहाँ गुरु को देवता कहा गया

KKN पड़ताल। किसी बच्चे के हाथ में पहली बार कलम आती है, तो वह...

क्या एक विधायक पांच साल में अपने क्षेत्र की तस्वीर बदल सकता है?

KKN ब्यूरो। विधायक के पास अपने विधानसभा क्षेत्र के लिए 5 वर्षों में 20...

एक सच, दो नज़रिया: दिमाग की गलती, समाज का असर या सोच का खेल?

क्यों एक ही तथ्य किसी को अवसर लगता है, तो किसी को खतरा? क्या...

हिंदी सिर्फ एक भाषा नहीं, भारत की चलती-फिरती कहानी है

हिंदी दिवस पर विशेष: क्या आप जानते हैं कि हिंदी को ‘राष्ट्रभाषा’ नहीं, ‘राजभाषा’...

मीनापुर की जुड़वा बहनों ने CSIR-NET में लहराया परचम, शनाया को ऑल इंडिया 92वीं रैंक

मुजफ्फरपुर के मीनापुर प्रखंड की जुड़वा बहनों शनाया निशांत और शोनाया निशांत ने CSIR-NET...

बिहार की सड़कें बन गईं मौत की सड़क? 5 साल में 34% बढ़े हादसे, 9,347 लोगों की गई जान

आंकड़ों का एक्स-रे: दुर्घटनाएं बढ़ीं, मौतें उससे भी तेज बढ़ीं KKN ब्यूरो। एक सड़क। एक...

लग गया ट्रांसफार्मर; किसानों की लड़ाई रंग लाई

जिस समस्या के समाधान की उम्मीद किसानों ने लगभग छोड़ दी थी, आखिरकार उसी...

बिहार की बाढ़: पानी उतर जाएगा, लेकिन कब तक पटरी पर लौटेंगी लोगों की जिंदगी?

क्या बाढ़ आने के बाद नाव भेज देना, राहत शिविर खोल देना और कुछ...

ध्वनि प्रदूषण: जुलूस आगे बढ़ता रहा… लेकिन, कानों में पड़ने वाला शोर वहीं रह गया

डीजे की धुन पर नाचते बच्चों को देखकर भीड़ तालियां बजाती है। किसी को...

क्या नकारात्मक सोच इंसान को उसी अंधेरे में धकेल देती है, जिसे वह दुनिया में खोज रहा होता है?

हर घटना में षड्यंत्र, हर परंपरा में खामी, हर व्यक्ति में स्वार्थ और हर...

मीनापुर की क्रांति गाथा: इतिहास के हाशिये से उठती एक पूरी पीढ़ी की आवाज

मीनापुर की क्रांति गाथा पुस्तक की संक्षिप्त समीक्षा लेखक : कौशलेन्द्र झा KKN पुस्तक समीक्षा। इतिहास...

डैम, मानव सभ्यता की प्यास बुझाने वाला वरदान या आने वाली पीढ़ियों के लिए खड़ा किया जा रहा जल-खतरा?

नदियों को बांधकर इंसान ने पानी, बिजली और खेती पर नियंत्रण हासिल किया। लेकिन...