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बहराइच में मां ने बेटे को बचाने के लिए लगा दी जान की बाजी

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उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक मां ने अपने बेटे को तेंदुए से बचाने के लिए अपनी जान की बाजी लगा दी। शनिवार रात को जंगल से निकले तेंदुए ने खेल रहे बच्चे पर झपट्टा मारा। बच्चे को बचाने के लिए मां ने तेंदुए से संघर्ष किया, लेकिन जब ग्रामीण और परिजन शोर सुनकर मौके पर पहुंचे, तब तक तेंदुआ घायल मां-बेटे को छोड़कर जंगल की ओर भाग चुका था।

घायल मां-बेटे को तुरंत एंबुलेंस के माध्यम से मोतीपुर सीएचसी लाया गया। यहां पर प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। यह घटना बहराइच के कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग के सुजौली रेंज के जंगल के पास स्थित दुर्गा गौढ़ी गांव की है।

घटना की पूरी जानकारी

शनिवार की रात, 22 वर्षीय श्री देवी अपने 5 साल के बेटे जितिन के साथ घर के बाहर दरवाजे पर बैठी हुई थीं। उस समय जितिन अपनी मां के पास खेल रहा था। अचानक जंगल से निकला तेंदुआ जितिन पर झपट पड़ा। अपनी जान की परवाह किए बिना मां ने तेंदुए से संघर्ष किया और उसे अपने बेटे से दूर करने की कोशिश की। लेकिन तेंदुए ने श्री देवी पर हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गईं।

तेंदुए के हमले के बाद, मां और बेटे की चीखें सुनकर परिजन और अन्य ग्रामीण दौड़े और शोर मचाते हुए तेंदुए का पीछा किया। शोर सुनकर तेंदुआ घायल मां-बेटे को छोड़कर जंगल की ओर भाग गया। स्थानीय पुलिस और एंबुलेंस की मदद से घायल मां-बेटे को मोतीपुर सीएचसी लाया गया, जहां चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार किया और फिर दोनों को मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया।

तेंदुए का खतरा बढ़ता जा रहा है

बहराइच जिले के कई इलाकों में तेंदुए का खतरा लगातार बढ़ रहा है। कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग के आस-पास के गांवों में तेंदुए और अन्य जंगली जानवरों के देखे जाने की घटनाएं आम हो गई हैं। ये जंगली जानवर आबादी वाले इलाकों में अक्सर घुस आते हैं, जिससे ग्रामीणों के लिए खतरे की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।

वन विभाग द्वारा ग्रामीणों को इस खतरे से निपटने के लिए सावधान रहने की सलाह दी जा रही है। उन्हें कहा गया है कि वे समूहों में चलें और रात के समय विशेष सतर्कता बरतें। इसके अलावा, विभाग ने जंगली जानवरों से बचने के लिए अन्य सुरक्षा उपायों पर भी काम करने का आश्वासन दिया है।

वन विभाग और पुलिस की कार्रवाई

तेंदुए के हमलों को देखते हुए, वन विभाग और स्थानीय पुलिस द्वारा सक्रिय कदम उठाए जा रहे हैं। इन घटनाओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए, विभाग ने जंगली जानवरों की गतिविधियों पर नजर रखने और जंगलों के आसपास के इलाकों में गश्त बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही, ग्रामीणों को इस स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक सावधानियों के बारे में भी जागरूक किया जा रहा है।

तेंदुए और अन्य जंगली जानवरों के हमलों से बचाव के लिए लगातार ग्रामीणों को सचेत किया जा रहा है। वन विभाग ने निर्देश दिए हैं कि वे रात के समय अकेले बाहर न निकलें और अपने बच्चों को बाहर खेलने से बचाएं। इसके अलावा, यदि कोई जंगली जानवर दिखाई दे तो तुरंत वन विभाग को सूचित किया जाए।

घायल मां और बेटे की चिकित्सा स्थिति

घायल मां श्री देवी और उनका बेटा जितिन फिलहाल मेडिकल कॉलेज में भर्ती हैं, जहां उनका इलाज चल रहा है। श्री देवी की हालत गंभीर बताई जा रही है, जबकि जितिन के घावों का इलाज किया जा रहा है। दोनों की स्थिति में सुधार होने की संभावना है, लेकिन उनकी चिकित्सा टीम उन्हें लगातार मॉनिटर कर रही है।

मां-बेटे के ऊपर हुए इस हमले ने ग्रामीणों को एक बार फिर यह याद दिलाया कि जंगली जानवरों के खतरे के बीच भी हमें सतर्क रहना चाहिए। यह घटना वन्यजीवों के मानव बस्तियों में घुसने के खतरे को और अधिक स्पष्ट करती है।

यह घटना बहराइच के ग्रामीणों और वन विभाग के लिए एक चेतावनी है। तेंदुए के हमले से हुई यह दुर्घटना एक बार फिर से यह दिखाती है कि मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष लगातार बढ़ रहा है। हालांकि, वन्यजीवों का संरक्षण जरूरी है, लेकिन साथ ही साथ यह भी आवश्यक है कि स्थानीय समुदायों की सुरक्षा के लिए उचित कदम उठाए जाएं।

वन विभाग और स्थानीय प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसी घटनाओं से बचने के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय किए जाएं। ग्रामीणों को भी इस तरह के खतरे से निपटने के लिए पूरी तरह से जागरूक किया जाना चाहिए। ऐसे प्रयासों से ही हम मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम कर सकते हैं और दोनों के जीवन को सुरक्षित बना सकते हैं।

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