होमBiharज्योति सिंह ने 'वोट कटवा' के आरोप पर मनोज तिवारी को दिया...

ज्योति सिंह ने ‘वोट कटवा’ के आरोप पर मनोज तिवारी को दिया करारा जवाब

Published on

जैसे-जैसे बिहार विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, रोहतास जिले का करकट विधानसभा क्षेत्र एक प्रमुख राजनीतिक युद्ध भूमि बन चुका है। यहां पर एक त्रिकोणीय मुकाबला बनता हुआ दिखाई दे रहा है। इस चुनावी जंग में ज्योति सिंह, जो भोजपुरी अभिनेता और गायक पवन सिंह की पत्नी हैं, स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतर चुकी हैं। उनका मुकाबला जेडीयू के वर्तमान सांसद महाबली सिंह और ग्रैंड अलायंस के सीपीआई(एमएल) के उम्मीदवार अरुण सिंह से है।

ज्योति सिंह का उम्मीदवार के रूप में उभरना

ज्योति सिंह का इस चुनाव में प्रवेश ना केवल स्टार पावर लेकर आया है, बल्कि राजनीतिक हलकों में भी हलचल मचाई है। उनका नाम तब चर्चा में आया जब भा.ज.पा. सांसद मनोज तिवारी ने उन्हें ‘वोट कटवा’ करार दिया। इस पर ज्योति सिंह ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा, “मनोज तिवारी मेरे लिए बड़े भाई जैसे हैं, लेकिन मुझे ‘वोट कटवा’ कहना अन्यायपूर्ण था।” उन्होंने आगे कहा, “अगर मैं विपक्ष से आई होती, तो पार्टी टिकट पर चुनाव लड़ रही होती, न कि स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में। 14 नवंबर को करकट की जनता इसका जवाब देगी।”

बढ़ते जन समर्थन से NDA में घबराहट

ज्योति सिंह का कहना है कि उनकी स्वतंत्र चुनावी मुहिम को स्थानीय मतदाताओं से बेहद समर्थन मिल रहा है, और इससे NDA नेताओं में घबराहट बढ़ गई है। उनका अभियान अब अपनी गति पकड़ चुका है और वोटरों के बीच उनकी पैठ लगातार बढ़ रही है। उन्होंने दावा किया कि उनकी बढ़ती लोकप्रियता से NDA के नेताओं को चिंता होने लगी है, जो पहले यह मान रहे थे कि वह एक मामूली उम्मीदवार होंगी।

ज्योति सिंह की व्यक्तिगत और राजनीतिक यात्रा

ज्योति सिंह की राजनीतिक यात्रा उनके व्यक्तिगत जीवन से भी जुड़ी हुई है। पवन सिंह, जो एक प्रमुख भा.ज.पा. नेता और भोजपुरी फिल्मों के सुपरस्टार हैं, से उनके विवाह में कथित रूप से रगड़े की खबरें सामने आई हैं। इस विवाह में आ रही समस्याओं के कारण उनके राजनीतिक कदम की व्याख्या की जा रही है। हालांकि, कुछ लोग मानते हैं कि यह उनके लिए एक नया अवसर है, और वह अपने दम पर चुनावी राजनीति में कदम रख रही हैं।

लोकप्रियता में तेजी से बढ़ोतरी के कारण उनकी कहानी ने राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने अपने विवाहित जीवन और राजनीतिक महत्त्वाकांक्षाओं के बीच सामंजस्य बनाने की कोशिश की है और अब वह खुद को एक स्वतंत्र नेता के रूप में स्थापित करने की दिशा में काम कर रही हैं।

करकट विधानसभा क्षेत्र का राजनीतिक इतिहास

करकट विधानसभा क्षेत्र का राजनीतिक इतिहास हमेशा से उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में जेडीयू के महाबली सिंह ने NDA के उम्मीदवार के रूप में जीत दर्ज की थी। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में सीपीआई(एमएल) के राजा राम कुशवाहा ने ग्रैंड अलायंस के उम्मीदवार के तौर पर जीत हासिल की। इस प्रकार, करकट सीट पर सत्ता की दिशा हमेशा बदलती रही है।

अब जब सीपीआई(एमएल) के अरुण सिंह भी इस बार चुनाव मैदान में हैं और ज्योति सिंह ने स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनौती दी है, तो करकट सीट का भविष्य पहले से कहीं ज्यादा अनिश्चित हो गया है। यह विधानसभा क्षेत्र अब और भी जटिल हो चुका है, और यहां की राजनीति एक नई दिशा की ओर बढ़ रही है।

करकट में त्रिकोणीय मुकाबला

जैसे-जैसे चुनाव की तारीख नजदीक आ रही है, करकट विधानसभा क्षेत्र में अब महाबली सिंह (जेडीयू), अरुण सिंह (सीपीआई(एमएल)) और ज्योति सिंह (स्वतंत्र उम्मीदवार) के बीच त्रिकोणीय मुकाबला हो रहा है। तीनों ही उम्मीदवार अपनी-अपनी जीत को लेकर आश्वस्त हैं, और स्थानीय मतदाता अब इस प्रतिस्पर्धा का नतीजा तय करेंगे।

ज्योति सिंह के समर्थन में बढ़ती लहर ने उन्हें एक मजबूत प्रत्याशी के रूप में स्थापित किया है। उनके अभियान में महिलाओं और स्थानीय मुद्दों पर जोर दिया जा रहा है, जिससे उनकी पहुंच मतदाताओं तक और भी अधिक हो गई है। इस कड़ी प्रतिस्पर्धा में 14 नवंबर को होने वाले चुनाव परिणाम से ही तय होगा कि करकट की जनता किसे अपना प्रतिनिधि चुनेगी।

ज्योति सिंह का चुनावी मंच पर आना इस बात का संकेत है कि बिहार की राजनीति में अब एक नया मोड़ आ चुका है। उनका चुनावी अभियान ना केवल NDA के लिए चुनौती है, बल्कि यह ग्रैंड अलायंस के लिए भी एक कड़ी परीक्षा साबित हो सकता है। करकट के वोटरों के लिए यह चुनाव बेहद महत्वपूर्ण होगा, और सभी की निगाहें इस पर टिकी रहेंगी।

Read this article in

KKN लाइव WhatsApp पर भी उपलब्ध है, खबरों की खबर के लिए यहां क्लिक करके आप हमारे चैनल को सब्सक्राइब कर सकते हैं।

KKN Public Correspondent Initiative


Discover more from

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Latest articles

ट्रंप के दौर में क्या अमेरिका की वैश्विक साख घटी? आंकड़े क्या कहते हैं

KKN ब्यूरो। एक समय था जब दुनिया के किसी संकट पर एक सवाल लगभग...

एक सच, दो नज़रिया: दिमाग की गलती, समाज का असर या सोच का खेल?

क्यों एक ही तथ्य किसी को अवसर लगता है, तो किसी को खतरा? क्या...

विश्वकर्मा पूजा: मशीन पर फूल चढ़ाने की परंपरा या इंसान के हुनर को सलाम?

ऋग्वेद के ‘विश्वकर्मन्’ से आधुनिक कारखाने तक पहुंची परंपरा में आखिर छिपा संदेश क्या...

हिंदी सिर्फ एक भाषा नहीं, भारत की चलती-फिरती कहानी है

हिंदी दिवस पर विशेष: क्या आप जानते हैं कि हिंदी को ‘राष्ट्रभाषा’ नहीं, ‘राजभाषा’...

More like this

ट्रंप के दौर में क्या अमेरिका की वैश्विक साख घटी? आंकड़े क्या कहते हैं

KKN ब्यूरो। एक समय था जब दुनिया के किसी संकट पर एक सवाल लगभग...

एक सच, दो नज़रिया: दिमाग की गलती, समाज का असर या सोच का खेल?

क्यों एक ही तथ्य किसी को अवसर लगता है, तो किसी को खतरा? क्या...

मीनापुर की जुड़वा बहनों ने CSIR-NET में लहराया परचम, शनाया को ऑल इंडिया 92वीं रैंक

मुजफ्फरपुर के मीनापुर प्रखंड की जुड़वा बहनों शनाया निशांत और शोनाया निशांत ने CSIR-NET...

बिहार की सड़कें बन गईं मौत की सड़क? 5 साल में 34% बढ़े हादसे, 9,347 लोगों की गई जान

आंकड़ों का एक्स-रे: दुर्घटनाएं बढ़ीं, मौतें उससे भी तेज बढ़ीं KKN ब्यूरो। एक सड़क। एक...

लग गया ट्रांसफार्मर; किसानों की लड़ाई रंग लाई

जिस समस्या के समाधान की उम्मीद किसानों ने लगभग छोड़ दी थी, आखिरकार उसी...

बिहार की बाढ़: पानी उतर जाएगा, लेकिन कब तक पटरी पर लौटेंगी लोगों की जिंदगी?

क्या बाढ़ आने के बाद नाव भेज देना, राहत शिविर खोल देना और कुछ...

ध्वनि प्रदूषण: जुलूस आगे बढ़ता रहा… लेकिन, कानों में पड़ने वाला शोर वहीं रह गया

डीजे की धुन पर नाचते बच्चों को देखकर भीड़ तालियां बजाती है। किसी को...

क्या नकारात्मक सोच इंसान को उसी अंधेरे में धकेल देती है, जिसे वह दुनिया में खोज रहा होता है?

हर घटना में षड्यंत्र, हर परंपरा में खामी, हर व्यक्ति में स्वार्थ और हर...

डैम, मानव सभ्यता की प्यास बुझाने वाला वरदान या आने वाली पीढ़ियों के लिए खड़ा किया जा रहा जल-खतरा?

नदियों को बांधकर इंसान ने पानी, बिजली और खेती पर नियंत्रण हासिल किया। लेकिन...

बिहार की जेन-जी के सामने सबसे बड़ा सवाल: नौकरी मिलेगी या भविष्य बदलेगा?

सम्राट चौधरी सरकार ने युवाओं के लिए रोजगार, कौशल, शिक्षा, इंटर्नशिप और परीक्षा सुधार...

चीन का खतरा: सीमा पर सैनिकों से ज्यादा खतरनाक है सड़क, गांव और ब्रह्मपुत्र पर बनता नया सामरिक जाल

अरुणाचल में 60 किलोमीटर घुसपैठ का दावा निकला भ्रामक, लेकिन खतरा पूरी तरह काल्पनिक...

मीनापुर में बनेगा शहीद स्मृति पार्क, रामपुरहरि में प्रस्तावित है भव्य तोरण द्वार

अमर शहीद जुब्बा सहनी, वांगुर सहनी और पंडित सहदेव झा समेत स्वतंत्रता सेनानियों की...

मीनापुर में भूमि सर्वेक्षण: जमीन आपकी, लेकिन रिकॉर्ड में किसका नाम?

पुराने खतियान, बदली हुई चौहद्दी और अधूरे उत्तराधिकार के बीच रैयतों के सामने नई...

मीनापुर में गूंजा जश्न-ए-आजादी: शहीद स्मृति पार्क और भव्य तोरण द्वार बनाने का ऐलान

क्रांति महोत्सव-2026 में विधायक अजय कुमार ने की घोषणा, विधान पार्षद वंशीधर ब्रजवासी बोले—राजकीय...

नेपाल की सुलगती सरहद: सांप्रदायिक हिंसा, राजनीतिक बेचैनी और भारत के लिए बढ़ती चुनौती

जब पड़ोसी देश में आग लगती है, तो धुआं सीमाएं नहीं पहचानता... KKN ब्यूरो। भारत...