पटना से सटे पालीगंज के करहरा गांव में एक दर्दनाक घटना घटी, जिसमें गोलगप्पे खाने के बाद एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई। मृतकों में पिता और उनके दो मासूम बेटे शामिल हैं। यह घटना पूरे इलाके में शोक और हड़कंप का कारण बनी है। परिवार के सदस्यों का कहना है कि तीनों की मौत फूड प्वाइजनिंग के कारण हुई है, लेकिन इस घटना की जांच की जा रही है।
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चंदौस मेला और गोलगप्पे का सेवन
घटना पालीगंज के पास स्थित चंदौस मेला की है। परिवार के लोग मेला घूमने गए थे, जहां उन्होंने गोलगप्पे खाए थे। मेला खत्म होने के बाद वे घर लौटे और रात का खाना खाया। इसके बाद कुछ ही देर में उनके स्वास्थ्य में गिरावट आई। तेज पेट दर्द और उल्टी की शिकायत के बाद, परिवार के लोग उन्हें अस्पताल ले जाने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन दुर्भाग्यवश, एक के बाद एक तीनों की हालत बिगड़ती चली गई और उनकी मौत हो गई।
अस्पताल पहुंचने से पहले मौत
परिवार के दो और सदस्य जिन्हें अस्पताल ले जाया गया था, उन्हें पहले पालीगंज अनुमंडल अस्पताल पहुंचाया गया। जहां डॉक्टरों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए पटना के पीएमसीएच (PMCH) रेफर किया। लेकिन जैसे ही परिवार वाले दोनों को पटना के पीएमसीएच लेकर जा रहे थे, रास्ते में ही दोनों की मौत हो गई। मृतकों की पहचान नीरज साव (पिता) और उनके दो बेटों, निर्मल कुमार (8 वर्ष) और निर्भय कुमार (4 वर्ष) के रूप में की गई है।
जांच और फूड प्वाइजनिंग की आशंका
तीन परिवार के सदस्यों की मौत के बाद पूरे गांव में मातम पसर गया। पुलिस और एफएसएल (Forensic Science Lab) की टीम घटनास्थल पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में पुलिस ने फूड प्वाइजनिंग की आशंका जताई है, हालांकि असली कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। पुलिस ने मृतकों के द्वारा खाए गए भोजन का सैंपल भी लिया है ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि भोजन में कोई संदिग्ध सामग्री तो नहीं थी।
गांव में शोक और परिवार की प्रतिक्रिया
घटना के बाद, पूरे गांव में शोक की लहर फैल गई है। पड़ोसियों और रिश्तेदारों ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया। एक ही परिवार के तीन सदस्य की असामयिक मृत्यु ने सभी को हिलाकर रख दिया है। परिवार के लोग अब इस हादसे का कारण जानने के लिए अधिकारियों से न्याय की उम्मीद कर रहे हैं।
सार्वजनिक स्वास्थ्य और फूड सुरक्षा की आवश्यकता
यह घटना एक बार फिर फूड सुरक्षा पर सवाल उठाती है, खासकर मेले जैसे सार्वजनिक आयोजनों में। गोलगप्पे जैसे लोकप्रिय स्ट्रीट फूड का सेवन करते वक्त हाइजीन और सामग्री की गुणवत्ता को लेकर चिंता बनी रहती है। जब तक फूड वेंडर और आयोजक उचित मानकों का पालन नहीं करेंगे, ऐसे हादसे हो सकते हैं। यह समय है जब स्थानीय अधिकारियों को कड़ी फूड सुरक्षा जांच की आवश्यकता पर ध्यान देना चाहिए ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
आगे की कार्रवाई और जांच
पुलिस और स्वास्थ्य विभाग ने इस घटना की गंभीरता को देखते हुए पूरी तफ्तीश शुरू कर दी है। मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों का पता चलेगा। वहीं, पुलिस का कहना है कि आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और जांच को प्राथमिकता दी जाएगी।
इस घटना ने ना सिर्फ पूरे गांव को शोक में डुबो दिया, बल्कि यह बिहार के अन्य हिस्सों में भी फूड प्वाइजनिंग और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा के सवाल खड़े कर दिए हैं। यह हादसा इस बात का सबूत है कि सार्वजनिक आयोजनों में भोजन की गुणवत्ता और हाइजीन की जांच को सख्ती से लागू करने की जरूरत है। सरकार और स्थानीय प्रशासन को इस तरह की घटनाओं से निपटने के लिए सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है।
इस दुखद घटना ने एक बार फिर यह सिद्ध किया कि उचित खाद्य सुरक्षा और निगरानी के बिना इस तरह की समस्याएं बढ़ सकती हैं। अब देखना यह होगा कि स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग इस मामले पर क्या कदम उठाते हैं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।



