होमBiharपटना में सोने और चांदी की कीमतों में रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोतरी

पटना में सोने और चांदी की कीमतों में रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोतरी

Published on

पटना में सोने और चांदी की कीमतें अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हैं। यह बढ़ोतरी विशेष रूप से त्योहारों के मौसम में देखी जा रही है। अगर यही रफ्तार जारी रही, तो सोने और चांदी के दाम जल्दी ही ₹1.50 लाख प्रति 10 ग्राम/किलो के स्तर तक पहुंच सकते हैं। वर्तमान में नवरात्रि जैसे पर्वों के दौरान सोने और चांदी के दाम इतनी ऊंचाई पर पहुंच गए हैं कि लोग अपनी जेब का पूरी तरह से हिसाब लगाकर खरीदारी कर रहे हैं, जबकि निवेशकों के चेहरे पर खुशी की लहर है।

वैश्विक तनाव और आर्थिक उतार-चढ़ाव का असर सोने और चांदी की कीमतों पर

पटना के ज्वेलरी बाजार के विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर चल रहे जियोपॉलिटिकल तनाव और आर्थिक उतार-चढ़ाव ने सोने और चांदी की कीमतों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। इन वैश्विक घटनाओं ने सोने को एक सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में उभार दिया है, जिसके कारण इसकी मांग में वृद्धि हुई है। हालांकि, बाजार विशेषज्ञ यह भी चेतावनी देते हैं कि ऐसी तेजी के बाद कभी भी 10 से 12 प्रतिशत तक की गिरावट देखने को मिल सकती है। फिर भी, लंबी अवधि के लिए रुझान अभी भी तेजी का ही माना जा रहा है, और सोने और चांदी की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है।

पटना में सोने और चांदी की कीमतों का नया रिकॉर्ड

पटना के ज्वेलरी बाजार में शनिवार को 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,14,300 प्रति 10 ग्राम था, जबकि जीएसटी जोड़ने के बाद इसकी कीमत ₹1,17,729 प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गई। वहीं, 22 कैरेट सोने की कीमत ₹1,06,200 प्रति 10 ग्राम रही, जबकि 18 कैरेट सोना ₹87,700 प्रति 10 ग्राम में बिक रहा था। चांदी की कीमत भी ₹1,36,800 प्रति किलो रही, जो जीएसटी समेत ₹1,40,904 तक पहुंच गई। इन बढ़ती कीमतों ने सोने और चांदी को खासतौर पर त्योहारों के मौसम में और भी महंगा बना दिया है।

चांदी के आभूषणों की कीमत में भी बढ़ोतरी

चांदी के आभूषणों की बिक्री भी इस समय ₹136 प्रति ग्राम की दर से हो रही है। यदि हम पुराने गहनों की बात करें तो 22 कैरेट सोने का एक्सचेंज रेट ₹1,03,200 प्रति 10 ग्राम और 18 कैरेट सोने का रेट ₹84,700 प्रति 10 ग्राम तय किया गया है। चांदी के हॉलमार्क आभूषण ₹132 प्रति ग्राम और बिना हॉलमार्क वाले आभूषण ₹129 प्रति ग्राम के हिसाब से बदले जा रहे हैं।

त्योहारों का सीजन और सोने-चांदी की बढ़ी हुई मांग

भारत में त्योहारों का समय हमेशा सोने और चांदी की खरीदारी के लिए बहुत खास होता है। नवरात्रि जैसे पर्वों के दौरान इन दोनों धातुओं की मांग में काफी वृद्धि हो जाती है। लोग इन्हें पारंपरिक रूप से पूजा और आशीर्वाद के प्रतीक के रूप में खरीदते हैं। इसके अलावा, निवेशक भी इस समय सोने और चांदी को एक सुरक्षित निवेश विकल्प मानते हुए खरीदारी करते हैं। इस कारण से बाजार में भारी खरीदी होती है, जो कीमतों को और बढ़ा देती है।

चूंकि यह त्योहारों का समय है, सोने और चांदी की कीमतें उच्चतम स्तर पर हैं, और इनकी कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है। यह स्थिति सामान्य उपभोक्ताओं के लिए कठिनाई का कारण बन रही है, क्योंकि वे इन बढ़ी हुई कीमतों के साथ सोने-चांदी की खरीदारी करने के लिए मजबूर हैं। निवेशकों के लिए यह एक अवसर हो सकता है, लेकिन आम आदमी के लिए यह खर्चा थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

सोने और चांदी की कीमतों का भविष्य

सोने और चांदी की कीमतों का भविष्य फिलहाल अनिश्चित है, लेकिन लंबे समय में इनकी कीमतें और बढ़ सकती हैं। वैश्विक राजनीतिक तनाव और आर्थिक उतार-चढ़ाव इन दोनों धातुओं की कीमतों को प्रभावित कर रहे हैं, और यह अनुमान है कि आने वाले महीनों में भी सोने और चांदी की कीमतों में वृद्धि हो सकती है।

हालांकि, विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि यदि कीमतों में वृद्धि इस तेजी से जारी रहती है, तो एक समय ऐसा आ सकता है जब बाजार में थोड़ी गिरावट आए। यह गिरावट 10 से 12 प्रतिशत के आसपास हो सकती है, जिससे कुछ खरीदारी के लिए उपयुक्त समय मिल सकता है।

पटना में सोने और चांदी की कीमतों में जो वृद्धि देखी जा रही है, वह निश्चित रूप से उपभोक्ताओं के लिए चिंता का कारण बन सकती है, खासकर त्योहारों के मौसम में। हालांकि, निवेशक इस बढ़ोतरी का लाभ उठा सकते हैं, वहीं आम लोग इस महंगाई के दौर में अपनी खरीदारी पर पुनः विचार कर रहे हैं। वैश्विक घटनाओं, जियोपॉलिटिकल तनाव और आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण सोने और चांदी की कीमतों में और वृद्धि हो सकती है।

इस दौरान, यदि आप सोने या चांदी में निवेश करने का सोच रहे हैं, तो आपको मौजूदा बाजार की स्थिति का ध्यान रखते हुए सतर्क रहना होगा। अभी के लिए, यह कहना मुश्किल है कि कीमतों में कब गिरावट आएगी, लेकिन फिलहाल यह स्पष्ट है कि सोने और चांदी की कीमतें ऊंची बनी रहेंगी।

Read this article in

KKN लाइव WhatsApp पर भी उपलब्ध है, खबरों की खबर के लिए यहां क्लिक करके आप हमारे चैनल को सब्सक्राइब कर सकते हैं।

KKN Public Correspondent Initiative


Discover more from

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Latest articles

नेपाल की सुलगती सरहद: सांप्रदायिक हिंसा, राजनीतिक बेचैनी और भारत के लिए बढ़ती चुनौती

जब पड़ोसी देश में आग लगती है, तो धुआं सीमाएं नहीं पहचानता... KKN ब्यूरो। भारत...

पूर्व मेयर समीर कुमार हत्याकांड में बड़ा फैसला: साक्ष्यों के अभाव में छह आरोपी बरी, कोर्ट ने जांच और अभियोजन पर उठाए सवाल

आठ साल पुराने चर्चित हत्याकांड में अदालत का फैसला KKN ब्यूरो। बिहार के मुजफ्फरपुर शहर...

मीनापुर के प्रथम विधायक जनक सिंह की 112वीं जयंती पर ‘अग्रदूत’ पुस्तक का हुआ लोकार्पण

मीनापुर के प्रथम विधायक को श्रद्धांजलि, 'अग्रदूत' पुस्तक बनी उनकी विरासत का दस्तावेज़ KKN ब्यूरो।...

बांकीपुर: कैसे टूटा भाजपा का अभेद्य किला, क्यों बना प्रशांत किशोर बिहार की राजनीति का नया केंद्र?

KKN ब्यूरो। बिहार की राजनीति में कई चुनाव हुए, कई सरकारें बनीं और बदलीं।...

More like this

बांकीपुर: कैसे टूटा भाजपा का अभेद्य किला, क्यों बना प्रशांत किशोर बिहार की राजनीति का नया केंद्र?

KKN ब्यूरो। बिहार की राजनीति में कई चुनाव हुए, कई सरकारें बनीं और बदलीं।...

बांकीपुर का उपचुनाव: एक सीट की लड़ाई या बिहार की राजनीति का टर्निंग पॉइंट?

एक सीट... लेकिन पूरे बिहार की निगाहें क्यों? KKN ब्यूरो। भारतीय लोकतंत्र में कुछ चुनाव...

बिहार में भूमि सर्वेक्षण और भूमाफिया का कॉकटेल?

क्या रिकॉर्ड सुधार की मुहिम में सेंध लगा रहे हैं फर्जी दावेदार KKN ब्यूरो। जमीन...

बिहार की सड़कें समय से पहले क्यों टूट जाती हैं?

जब सड़क टूटती है, तो केवल डगर नहीं बिखरता... KKN ब्यूरो। बारिश की पहली फुहार...

तीन दशक की राजनीति जिसने बांकीपुर की पहचान बदल दी

कौशलेन्द्र झा KKN। आज बांकीपुर का नाम आते ही सबसे पहले भारतीय जनता पार्टी का...

एक सीट… कई संदेश: आखिर क्यों पूरे बिहार की नजर बांकीपुर पर है?

क्या बांकीपुर का फैसला सिर्फ एक विधायक चुनेगा या बिहार की राजनीति की नई...

बांकीपुर की जंग: भाजपा का अभेद्य किला या प्रशांत किशोर की पहली राजनीतिक परीक्षा?

**KKN Live Special | Election Report KKN ब्यूरो। बिहार की राजनीति में कई चुनाव ऐसे...

बंटी यादव हत्याकांड: आखिर सच क्या है? पुलिस की कहानी और परिवार के आरोपों के बीच उलझी जांच

KKN ब्यूरो। पटना के बंटी यादव हत्याकांड ने बिहार की कानून-व्यवस्था के साथ-साथ पुलिस...

मामुली बारिश… और अंधेरे में डूब जाता है बिहार का गांव

ट्री कटिंग पर हर साल करोड़ों के टेंडर, फिर भी पेड़ की टहनी से...

बांकीपुर उपचुनाव: क्या बीजेपी का अभेद्य किला दरकेगा या बदलेगी बिहार की राजनीति?

KKN ब्यूरो। पटना का बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र केवल एक सीट नहीं है। यह बिहार...

कोल्ड ड्रिंक: ताजगी या धीमा ज़हर? क्या कहती है वैज्ञानिक रिसर्च?

KKN ब्यूरो। गर्मी हो, पार्टी हो या सफर, कोल्ड ड्रिंक आज हमारी जीवनशैली का...

ग्रामीण सड़कों के ‘जानलेवा’ स्पीड ब्रेकर: सुरक्षा के नाम पर जनता की जेब और सेहत पर हमला?

KKN ब्यूरो। ग्रामीण भारत में पक्की सड़कों का जाल तेजी से बिछा है। प्रधानमंत्री...

बिहार के किसान और बेरोजगार: आखिर क्या है असली समाधान?

बिहार की सबसे बड़ी समस्या बेरोजगारी नहीं, आय की कमी है KKN ब्यूरो। बिहार की...

भरत तिवारी एनकाउंटर: कानून का सवाल, जाति की बहस और सच की तलाश

KKN ब्यूरो। भोजपुर के बिलौटी गांव का एक युवक...। फेसबुक लाइव...। पुलिस पर पिस्टल...

बिहार में शराबबंदी: सामाजिक सुधार या भ्रष्टाचार की नई अर्थव्यवस्था?

क्या शराबबंदी सफल हुई या उसने भ्रष्टाचार को नया ईंधन दिया? KKN ब्यूरो। एक  अप्रैल...