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पूर्णिया में महिला ने दी एक साथ चार बच्चियों को जन्म

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बिहार के पूर्णिया जिले में एक महिला ने एक साथ चार बच्चियों को जन्म दिया। यह मामला रविवार को बायसी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) में सामने आया। महिला ने एक-एक कर चार बच्चियों को normal delivery के माध्यम से जन्म दिया।

यह खबर फैलते ही पूरे इलाके में कौतूहल का माहौल बन गया। अस्पताल में मां और बच्चियों को देखने के लिए ग्रामीणों की भीड़ उमड़ पड़ी। सभी इस बात से हैरान थे कि डॉक्टरों और परिजनों को पहले से गर्भ में केवल तीन बच्चों की जानकारी थी, लेकिन चौथी बच्ची के जन्म से सभी आश्चर्यचकित रह गए।

Ultrasound Report में थी तीन बच्चों की जानकारी

बायसी PHC के प्रभारी चिकित्सक डॉ. अहमर हसन ने बताया कि महिला का नाम हसेरन है और वह बनगामा पंचायत के छतीयन पोखरिया निवासी कैसर आलम की पत्नी हैं। आशा कार्यकर्ता की मदद से उन्हें अस्पताल लाया गया था।

डॉ. हसन ने कहा कि ultrasound report में केवल तीन बच्चों का पता चला था। पूरी medical team भी उसी अनुसार तैयार थी। लेकिन डिलीवरी के समय एक के बाद एक चार बच्चियां पैदा हुईं। चौथी बच्ची को देखकर डॉक्टर और परिवारजन दंग रह गए।

मां और चारों बच्चियां पूरी तरह स्वस्थ

डॉक्टरों ने बताया कि हसेरन और उनकी चारों बच्चियां स्वस्थ हैं। डिलीवरी पूरी तरह सुरक्षित रही और medical team ने राहत की सांस ली। यह भी उल्लेखनीय है कि इतनी बड़ी डिलीवरी बिना किसी ऑपरेशन के normal delivery से संपन्न हुई।

डिलीवरी के बाद तुरंत ही मां और बच्चियों की गहन जांच की गई। डॉक्टरों ने सलाह दी कि उन्हें बेहतर देखभाल के लिए बड़े अस्पताल में भेजा जाए। इसके बाद सभी को राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, पूर्णिया referral hospital के रूप में रेफर किया गया।

अस्पताल और गांव में उत्साह का माहौल

चार बच्चियों के जन्म की खबर जंगल की आग की तरह फैली। ग्रामीण और परिजन अस्पताल पहुंचने लगे। हर कोई चारों नवजातों को देखने के लिए उत्साहित था।

परिवारजनों ने कहा कि पहले तो उन्हें तीन बच्चों की उम्मीद थी, लेकिन चौथी बच्ची के जन्म ने उन्हें चौंका दिया। हालांकि, सभी इस बात से खुश थे कि मां और चारों बच्चियां सुरक्षित हैं।

पिता कैसर आलम ने कहा कि परिवार बेहद खुश है, लेकिन एक साथ चार बच्चियों का पालन-पोषण करना बड़ी जिम्मेदारी भी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि समाज और परिजन उनका सहयोग करेंगे।

Quadruplets का मामला कितना दुर्लभ

चिकित्सकों के अनुसार, एक साथ चार बच्चों का जन्म होना बेहद दुर्लभ है। भारत में ऐसे मामले सालभर में गिने-चुने ही सामने आते हैं। यह स्थिति जच्चा और बच्चा दोनों के लिए जोखिम भरी मानी जाती है।

अधिकतर मामलों में ऐसी डिलीवरी सर्जरी से होती है। लेकिन हसेरन का मामला इसलिए खास है क्योंकि यह normal delivery से संपन्न हुई। डॉक्टरों का कहना है कि यह एक मेडिकल चमत्कार जैसा है।

मेडिकल विशेषज्ञों ने बताया कि ऐसे मामलों में अक्सर समय से पहले प्रसव और कम वजन की समस्या होती है। लगातार निगरानी और पोषण बेहद जरूरी होता है। यही वजह है कि इन्हें referral hospital में भेजा गया।

ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा की बड़ी उपलब्धि

यह मामला ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा के लिए भी प्रेरणादायक है। बायसी PHC जैसे छोटे अस्पताल ने इस चुनौतीपूर्ण प्रसव को सफलतापूर्वक संभाला।

यहां मौजूद डॉक्टरों, नर्सों और एएनएम ने पूरी जिम्मेदारी से काम किया और मां-बच्चों को सुरक्षित रखा। इस घटना ने साबित किया कि ग्रामीण क्षेत्रों के स्वास्थ्य केंद्र भी गंभीर और जटिल मामलों को संभालने में सक्षम हैं।

साथ ही, आशा कार्यकर्ता की भूमिका भी अहम रही। उनकी मदद से ही महिला समय पर अस्पताल पहुंच पाई और सुरक्षित डिलीवरी संभव हो सकी।

सामाजिक और सांस्कृतिक पहलू

गांव में चार बच्चियों का जन्म एक बड़ी घटना बन गया। कई लोगों ने इसे शुभ संकेत बताया। वहीं, कुछ ने परिवार पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को लेकर चिंता भी जताई।

ग्रामीणों ने कहा कि परिवार को सरकार और समाज से सहयोग मिलना चाहिए। खासकर बेटियों की शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए सरकारी योजनाओं का लाभ उठाना जरूरी है।

परिजनों ने भी उम्मीद जताई कि प्रशासन इस मामले को देखते हुए मदद करेगा। स्थानीय स्तर पर लोग भी सहयोग के लिए आगे आए हैं।

डॉक्टरों की राहत और गर्व

डिलीवरी में शामिल डॉक्टरों और medical team ने इसे अपने करियर का यादगार अनुभव बताया। डॉ. अहमर हसन ने कहा कि यह उनके लिए गर्व का क्षण था। उन्होंने कहा कि Quadruplets का normal delivery बेहद असामान्य है।

टीम ने कहा कि इस मामले से उन्हें नई ऊर्जा मिली है और यह ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की क्षमता को भी उजागर करता है। उन्होंने यह भी अपील की कि गर्भवती महिलाएं नियमित जांच करवाएं और स्वास्थ्य सुविधाओं का समय पर लाभ उठाएं।

बच्चियों का भविष्य और परिवार की जिम्मेदारी

चार बच्चियों के जन्म से परिवार में खुशी का माहौल है, लेकिन भविष्य को लेकर जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। परिजनों ने कहा कि बच्चों की शिक्षा और परवरिश उनकी प्राथमिकता होगी।

सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि परिवार को सरकारी योजनाओं से मदद दी जानी चाहिए। बालिकाओं के लिए चल रही विभिन्न योजनाएं उनके भविष्य को सुरक्षित कर सकती हैं।

फिलहाल पूरा परिवार इस बात से खुश है कि मां और चारों बच्चियां सुरक्षित हैं। गांव और आसपास के लोग इस घटना को आशीर्वाद मान रहे हैं और परिवार को सहयोग देने का आश्वासन भी दे रहे हैं।

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