यह कहानी है योगेंद्रनाथ मंडल की—जो पाकिस्तान के पहले कानून मंत्री बने और फिर पलायन करने पर विवश हुए। दलित-मुस्लिम गठजोड़ की यह गाथा सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि धोखे, संघर्ष और टूटी उम्मीदों की दस्तक है। आज़ादी के बाद की दलित राजनीति का यह कड़वा सच है, जिसे समझना ज़रूरी है, ताकि इतिहास खुद को दोहराए नहीं।

