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दिल्ली CM रेखा गुप्ता पर हमलावर राजेश का अयोध्या कनेक्शन आया सामने

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दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर हमला करने वाले राजेश भाई खेमजी का अयोध्या कनेक्शन सामने आया है। गुजरात के राजकोट निवासी राजेश 12 मई को अयोध्या पहुंचे थे। उन्होंने अपने गले में तख्ती टांगकर बेजुबानों की सुरक्षा के लिए भूख हड़ताल और अनशन करने की कोशिश की थी।

राम मंदिर परिसर के दर्शन मार्ग पर जब उन्होंने अनशन शुरू करने की कोशिश की तो निजी सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें रोक दिया। इस दौरान उनकी सुरक्षा कर्मियों से बहस भी हुई और बाद में उन्हें परिसर से बाहर कर दिया गया।

राम मंदिर परिसर के बाहर की थी तैयारी

परिसर से बाहर निकाले जाने के बाद राजेश ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी किया। इसमें उन्होंने सुरक्षा कर्मियों पर अभद्रता का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी कहा कि अगले दिन यानी 13 मई को राम मंदिर मुख्य द्वार के पास बिरला धर्मशाला के सामने भूख हड़ताल करेंगे।

हालांकि वीडियो वायरल होने के बाद सक्रिय हुई पुलिस ने राजेश को समझाकर वापस भेज दिया। उस समय उनके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई थी।

राजेश की मुख्य मांगें

राजेश की मांग थी कि राम मंदिर परिसर में बेजुबानों के लिए स्थायी व्यवस्था की जाए।

  • मंदिर परिसर में जानवरों के लिए अस्पताल का निर्माण

  • बंदरों और कुत्तों के भोजन के लिए Ann Kshetra की स्थापना

  • बेजुबान जानवरों के संरक्षण के लिए विशेष योजना लागू करना

इन मांगों को लेकर वह श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट के पदाधिकारियों से सीधे बातचीत की जिद पर अड़े रहे।

रेखा गुप्ता पर हमला और फिर चर्चा में आया नाम

बीते बुधवार को दिल्ली की CM रेखा गुप्ता पर जनसुनवाई के दौरान हमला हुआ। यह हमला राजेश ने किया, जिसने अचानक आकर उन्हें निशाना बनाया। मौके पर मौजूद सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत राजेश को पकड़ लिया और सीएम को सुरक्षित बाहर निकाला।

हमले के बाद राजेश का पुराना अयोध्या कनेक्शन फिर से चर्चा में आ गया।

एक्टिविज़्म से हिंसा तक का सफर

राजेश लंबे समय से Animal Welfare के मुद्दे उठाते रहे हैं। उनकी पहचान एक एक्टिविस्ट के तौर पर रही, लेकिन उनके तरीके हमेशा विवादित रहे।

अयोध्या में उनकी जिद और विरोध ने ही यह संकेत दिया था कि वह ध्यान आकर्षित करने के लिए चरम कदम उठाते हैं। अब दिल्ली में उनका यह कदम एक खतरनाक मोड़ साबित हुआ।

राजनीतिक और सार्वजनिक प्रतिक्रिया

हमले के बाद राजनीतिक हलकों में कड़ी प्रतिक्रिया देखने को मिली। सभी दलों ने रेखा गुप्ता पर हमले की निंदा की और राजेश के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

वहीं कुछ लोगों ने यह भी कहा कि अयोध्या की घटना के समय अगर उसके व्यवहार पर ध्यान दिया गया होता तो शायद यह हमला टल सकता था।

रेखा गुप्ता का बयान

हमले के बाद रेखा गुप्ता ने शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध करने का अधिकार सबको है लेकिन हिंसा किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।

उनका संयमित रुख लोगों को प्रभावित कर गया और उनकी तारीफ भी हुई।

राजेश का अयोध्या कनेक्शन उसके मानसिक रुझान और एक्टिविज़्म को समझने में अहम है। उसकी मांगें भले ही बेजुबानों के हित में थीं, लेकिन उन्हें जताने का तरीका गलत रहा।

दिल्ली की मुख्यमंत्री पर हमला उसकी सोच में आए खतरनाक बदलाव की ओर इशारा करता है। यह घटना साफ संदेश देती है कि लोकतांत्रिक समाज में protest तभी सार्थक है जब वह शांति और नियमों के दायरे में हो।

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