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भारत‑ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता: साझी समृद्धि की नई शुरुआत

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भारत और ब्रिटेन के बीच तीन वर्षों से चली आ रही बातचीत के बाद अंततः 24 जुलाई 2025 को ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement) पर औपचारिक हस्ताक्षर हो गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस ब्रिटेन यात्रा के दौरान यह समझौता संपन्न हुआ, जो बतौर प्रधानमंत्री उनकी चौथी यूके यात्रा है।

इस समझौते को ‘कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट’ (CETA) का नाम दिया गया है। इसके माध्यम से दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों में नई मजबूती आने की उम्मीद है।

सिर्फ आर्थिक नहीं, रणनीतिक साझेदारी

प्रधानमंत्री मोदी ने इस समझौते को केवल आर्थिक साझेदारी नहीं, बल्कि साझा समृद्धि की योजना बताया। उन्होंने कहा कि यह समझौता भारतीय टेक्सटाइल, फुटवियर, जेम्स एंड ज्वेलरी, सीफूड और इंजीनियरिंग उत्पादों के लिए ब्रिटेन के बाज़ार में आसान पहुंच सुनिश्चित करेगा। साथ ही, भारत के कृषि और प्रोसेस्ड फूड सेक्टर को भी लाभ मिलेगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह समझौता किसानों, मछुआरों और MSME सेक्टर के लिए विशेष रूप से फायदेमंद होगा। इसके साथ ही भारतीय उपभोक्ताओं को ब्रिटेन के मेडिकल उपकरण, एयरोस्पेस पार्ट्स और अन्य औद्योगिक उत्पाद किफायती दाम पर उपलब्ध हो सकेंगे।

टैरिफ में बड़ी कटौती, आम लोगों को राहत

ब्रिटेन से भारत में आयात होने वाले उत्पादों पर औसत टैरिफ को 15 प्रतिशत से घटाकर 3 प्रतिशत किया जाएगा। विशेष रूप से ब्रिटिश व्हिस्की पर टैरिफ 150 प्रतिशत से घटाकर 75 प्रतिशत कर दिया गया है, और 2035 तक इसे 40 प्रतिशत तक लाया जाएगा।

इसका सीधा असर भारतीय बाज़ार पर होगा, जहां ब्रिटिश कारें, व्हिस्की, चॉकलेट, बिस्किट, मांस और मेडिकल इक्विपमेंट अधिक सस्ते हो जाएंगे। वहीं, ब्रिटेन में भारतीय वस्त्र और आभूषण प्रतिस्पर्धी कीमत पर उपलब्ध होंगे।

भारतीय प्रोफेशनल्स को मिलेगी रियायत

समझौते में यह भी तय हुआ कि भारत और ब्रिटेन में अस्थायी तौर पर कार्यरत कर्मचारियों को केवल अपने मूल देश में सामाजिक सुरक्षा योगदान देना होगा। इससे दोनों देशों के प्रोफेशनल्स पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। ब्रिटिश सरकार ने स्पष्ट किया है कि ऐसी ‘डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन’ पहले से ही यूरोप, अमेरिका और दक्षिण कोरिया के साथ लागू हैं।

हालांकि कुछ ब्रिटिश विपक्षी नेताओं ने यह चिंता जताई कि इससे भारतीय कामगारों को लाभ होगा, लेकिन ब्रिटिश व्यापार मंत्री जोनाथन रेनॉल्ड्स ने इन आशंकाओं को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय कर्मचारियों पर वीज़ा और स्वास्थ्य सरचार्ज का खर्च अतिरिक्त रूप से लगता है, जिससे वे सस्ते नहीं पड़ते।

वित्तीय और कानूनी सेवाओं पर अभी बातचीत जारी

इस समझौते में अभी ब्रिटेन को भारत की वित्तीय और कानूनी सेवाओं में उतनी पहुंच नहीं मिली है, जितनी अपेक्षित थी। इसके अलावा एक अलग द्विपक्षीय निवेश समझौते पर भी बातचीत चल रही है, जिससे दोनों देशों में निवेश की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

ब्रिटेन की प्रस्तावित कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट टैक्स नीति पर भी भारत ने चिंता जताई है। यह टैक्स 2026 से लागू हो सकता है, और इससे भारत के निर्यात पर असर पड़ने की संभावना है।

रक्षा और सुरक्षा में भी साझेदारी को बढ़ावा

दोनों देशों ने रक्षा, शिक्षा, जलवायु परिवर्तन, तकनीक और इनोवेशन के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने पर सहमति जताई है। खासतौर पर खुफिया जानकारी साझा करना, संगठित अपराध पर लगाम लगाना, और न्यायिक प्रक्रियाओं में सहयोग जैसे विषयों पर विशेष ध्यान दिया गया है।

इसका मकसद अवैध आप्रवासन, धोखाधड़ी और अपराध को रोकने के लिए मिलकर काम करना है। भारत और ब्रिटेन आपराधिक रिकॉर्ड साझा करने के एक नए समझौते को अंतिम रूप देने के करीब हैं।

समझौते की प्रमुख बातें

  • टैरिफ कटौती से दोनों देशों में व्यापार और उपभोक्ताओं को लाभ

  • भारतीय MSME, कृषि, और निर्यातकों को मिलेगा नया बाज़ार

  • सामाजिक सुरक्षा योगदान पर छूट से प्रोफेशनल्स को राहत

  • खुफिया और सुरक्षा सहयोग को मिला नया आयाम

  • कानूनी और निवेश सेवाओं पर बातचीत अभी जारी

संसद की मंजूरी अभी शेष, लागू होने में लग सकता है समय

हालांकि यह समझौता भारत की केंद्रीय कैबिनेट से पास हो चुका है, लेकिन इसे संसद से भी मंजूरी लेनी होगी। इसके बाद ही इसे औपचारिक रूप से लागू किया जा सकेगा। अनुमान है कि इस प्रक्रिया में लगभग एक वर्ष का समय लग सकता है।

इस बीच दोनों देशों को टैरिफ शेड्यूल, कस्टम प्रक्रिया और कानूनी ढांचे को भी नये समझौते के अनुसार ढालना होगा।

भारत और ब्रिटेन के बीच यह मुक्त व्यापार समझौता सिर्फ व्यापार का नहीं, बल्कि विश्वास, सहयोग और साझी समृद्धि का प्रतीक है। यह न केवल आर्थिक मोर्चे पर नए अवसर खोलेगा, बल्कि रणनीतिक साझेदारी को भी एक नई दिशा देगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे “शेयरड प्रॉस्पेरिटी प्लान” कहा, वहीं पीएम Keir Starmer ने इसे ब्रिटेन की आर्थिक वृद्धि और रोजगार का इंजन बताया।

अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि यह समझौता ज़मीनी स्तर पर आम नागरिकों, कारोबारी वर्ग और पेशेवरों के लिए कितनी राहत और अवसर लेकर आता है।

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