बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव 2025 से पहले सियासी घमासान तेज हो गया है। मतदाता सूची (Voter List) में संशोधन को लेकर गहराता विवाद अब सड़क पर प्रदर्शन में बदल गया है। विपक्षी महागठबंधन (महागठबंधन) ने बिहार बंद का आह्वान किया है, जिसका असर पटना सहित पूरे राज्य में देखने को मिला।
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इस विरोध की कमान तेजस्वी यादव और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने खुद संभाली। पटना की सड़कों पर हजारों कार्यकर्ता विपक्षी झंडे लिए उतर आए। कई जगहों पर रेल रोकने, सड़क जाम करने और टायर जलाने जैसी घटनाएं सामने आईं।
बिहार बंद क्यों हुआ?
बिहार में निर्वाचन आयोग द्वारा की जा रही वोटर लिस्ट की विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया (SIR – Special Intensive Revision) को लेकर महागठबंधन ने गहरी आपत्ति जताई है। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया के माध्यम से:
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वोटर लिस्ट से लाखों वैध नाम हटाए जा रहे हैं
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दलित, पिछड़ा और अल्पसंख्यक समुदायों को निशाना बनाया जा रहा है
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यह सारा खेल भाजपा के वोट बैंक को बढ़ाने और विपक्षी वोटों को खत्म करने के लिए किया जा रहा है
तेजस्वी यादव ने इसे “लोकतंत्र की हत्या” बताया, जबकि राहुल गांधी ने इसे महाराष्ट्र के बाद अब बिहार में “वोट चोरी का नया मॉडल” करार दिया।
पटना में महा मार्च: राहुल गांधी और तेजस्वी की अगुआई
पटना में इनकम टैक्स गोलंबर से शुरू हुआ यह ऐतिहासिक मार्च, शहीद स्मारक तक पहुंचा। इसमें विपक्षी गठबंधन के प्रमुख नेता शामिल हुए, जैसे:
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राहुल गांधी (कांग्रेस सांसद)
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तेजस्वी यादव (आरजेडी नेता)
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डी. राजा (सीपीआई महासचिव)
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दीपांकर भट्टाचार्य (सीपीआई-एमएल लिबरेशन)
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राजेश राम (बिहार कांग्रेस अध्यक्ष)
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मुकेश सहनी (वीआईपी प्रमुख)
मार्च को निर्वाचन आयोग कार्यालय तक ले जाने की कोशिश की गई, लेकिन पुलिस ने बैरिकेडिंग कर रोक दिया। इस दौरान कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच झड़प भी देखने को मिली।
राज्यभर में प्रदर्शन: ट्रेनें रोकी, सड़कें जाम
बिहार बंद के दौरान:
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मुजफ्फरपुर, दरभंगा, आरा, सीवान, समस्तीपुर, गया जैसे जिलों में ट्रेनें रोकी गईं
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सड़क जाम और टायर जलाकर विरोध किया गया
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कई जगहों पर बस सेवाएं ठप रहीं और बाजार बंद रहे
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स्कूलों और कॉलेजों में उपस्थिति बेहद कम रही
पटना के डाकबंगला चौराहा, गांधी मैदान, कंकड़बाग और अन्य जगहों पर जाम की स्थिति रही।
राहुल गांधी का बड़ा बयान: “बिहार में वोट चोरी की कोशिश”
पटना में संवाददाताओं से बात करते हुए राहुल गांधी ने कहा:
“जैसे महाराष्ट्र में वोट चुराने का मॉडल अपनाया गया, अब बिहार में नया मॉडल लाया जा रहा है। लाखों लोगों के नाम बिना सूचना के मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। यह लोकतंत्र की हत्या है। इसे हम किसी कीमत पर सफल नहीं होने देंगे।”
उन्होंने कहा कि महागठबंधन की यह एकता सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए है।
प्रशासन की तैयारी और पुलिस की तैनाती
बिहार सरकार ने पटना और अन्य संवेदनशील जिलों में:
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भारी पुलिस बल तैनात किया
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ड्रोन निगरानी, ट्रैफिक डायवर्जन और CCTV की मदद से निगरानी की गई
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प्रदर्शन स्थलों पर बैरिकेडिंग की गई
पटना में गांधी मैदान और डाकबंगला क्षेत्र में पुलिस ने हल्का बल प्रयोग (लाठीचार्ज) भी किया, जिससे कुछ कार्यकर्ताओं को मामूली चोटें आईं।
विपक्ष की मांगें
महागठबंधन के नेताओं ने साफ-साफ चार प्रमुख मांगें रखीं:
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SIR प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रोका जाए
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पहले हटाए गए नामों की पारदर्शी समीक्षा हो
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वोटर लिस्ट में किसी भी संशोधन से पहले नोटिस जारी हो
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राजनीतिक दलों की निगरानी में यह प्रक्रिया हो
विपक्ष ने आरोप लगाया कि बिहार में 30 लाख से ज्यादा वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं, जिनमें बड़ी संख्या में अल्पसंख्यक, दलित और गरीब वर्ग के लोग शामिल हैं।
क्या है SIR विवाद?
Special Intensive Revision (SIR) चुनाव आयोग द्वारा चुनाव से पहले की जाने वाली एक नियमित प्रक्रिया है, जिसमें मतदाता सूची का संशोधन किया जाता है। लेकिन इस बार बिहार में विपक्ष का आरोप है कि:
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यह प्रक्रिया गुपचुप तरीके से की जा रही है
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कोई सार्वजनिक सूचना या स्थानीय प्रचार नहीं हुआ
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चुनिंदा समुदायों को निशाना बना कर नाम हटाए गए
चुनाव आयोग ने हालांकि किसी भी गलत कार्रवाई से इनकार किया है, लेकिन विपक्ष इसे चुनावी धांधली का प्रयास बता रहा है।
राजनीतिक नजरिए से क्यों अहम है यह बंद?
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 सिर्फ राज्य की राजनीति ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय विपक्षी एकता की भी परीक्षा है। आज का बिहार बंद:
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राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की पहली संयुक्त सड़कीय कार्रवाई है
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INDIA गठबंधन की जमीनी ताकत का ट्रायल रन माना जा रहा है
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भाजपा को सीधी चुनौती देने की रणनीति का हिस्सा है
राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि यह विरोध सफल रहा तो देशभर में इसी तर्ज पर चुनावी आंदोलन किए जा सकते हैं।
जनता की प्रतिक्रिया: समर्थन और परेशानी दोनों
पटना समेत कई जिलों में बंद को मिला-जुला समर्थन मिला। जहां एक ओर कई आम नागरिक लोकतंत्र की रक्षा के लिए विपक्ष के साथ नजर आए, वहीं कुछ लोगों ने सार्वजनिक असुविधा को लेकर नाराजगी जताई।
एक दुकानदार ने कहा,
“हम भी पारदर्शी चुनाव चाहते हैं, लेकिन बार-बार सड़कों का जाम और दुकान बंद करना कारोबार को नुकसान पहुंचाता है।”
बिहार बंद 2025 – एक नजर में प्रमुख बिंदु
| विषय | विवरण |
|---|---|
| बंद का कारण | मतदाता सूची में गड़बड़ी और वोटर डिलीशन |
| मुख्य नेता | तेजस्वी यादव, राहुल गांधी, D राजा, दीपांकर भट्टाचार्य, मुकेश सहनी |
| प्रमुख स्थान | पटना, मुजफ्फरपुर, आरा, गया, समस्तीपुर, दरभंगा |
| प्रदर्शन के तरीके | रेल रोको, सड़क जाम, मार्च, नारेबाजी |
| सरकारी प्रतिक्रिया | भारी पुलिस तैनाती, बैरिकेडिंग, ड्रोन निगरानी |
| जनता पर असर | ट्रैफिक जाम, स्कूल/दुकानें बंद, ट्रेनों में देरी |
बिहार बंद 2025 सिर्फ एक राजनीतिक प्रदर्शन नहीं, बल्कि वोटर अधिकारों की रक्षा का एक बड़ा जन आंदोलन बनता दिख रहा है। विपक्ष के लिए यह एकजुटता जहां चुनावी ऊर्जा दे सकती है, वहीं चुनाव आयोग और सरकार के लिए सवालों का जवाब देना जरूरी हो गया है।
अगर आयोग या सरकार कोई ठोस स्पष्टीकरण नहीं देती, तो महागठबंधन ने भविष्य में और बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है।
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