बिहार की राजधानी पटना एक बार फिर बेख़ौफ़ अपराधियों की गोलीबारी से दहल उठी। रविवार की रात, स्कूल संचालक अजीत कुमार (50 वर्ष) की ताबड़तोड़ फायरिंग में मौत हो गई। यह घटना न सिर्फ राजधानी की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह बताती है कि बिहार में अपराधियों के हौसले किस कदर बुलंद हैं।
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अभी प्रख्यात व्यवसायी गोपाल खेमका की हत्या की गुत्थी सुलझी भी नहीं थी कि पटना में एक और हत्याकांड ने प्रशासन को हिला कर रख दिया। दो हफ्तों में हुई इन दो बड़ी घटनाओं ने राजधानी में सुरक्षा और पुलिस व्यवस्था की पोल खोल दी है।
कौन थे अजीत कुमार?
अजीत कुमार, मुस्तफापुर (खगौल थाना क्षेत्र) के निवासी थे और लेखानगर में एक निजी स्कूल संचालित करते थे। उन्हें स्थानीय स्तर पर एक ईमानदार और समर्पित शिक्षक के रूप में जाना जाता था। अजीत कुमार न केवल शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत थे, बल्कि सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय रहते थे।
घटना कैसे घटी?
पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह वारदात रविवार की रात करीब 9 बजे की है। अजीत कुमार स्कूटी पर सवार होकर लेखानगर से अपने घर मुस्तफापुर लौट रहे थे। जैसे ही वह डीएवी पब्लिक स्कूल के पास पहुँचे, पहले से घात लगाए दो अज्ञात बदमाशों ने उन पर फायरिंग शुरू कर दी।
स्थानीय लोगों के अनुसार, बदमाश बाइक पर सवार थे और उन्होंने करीब 4-5 राउंड फायर किए। गोली लगते ही अजीत कुमार स्कूटी से गिर पड़े। आसपास के लोगों ने उन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी — डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
पुलिस का बयान और जांच की स्थिति
पटना सिटी एसपी भानु प्रताप सिंह ने मीडिया को बताया कि,
“अजीत कुमार की हत्या की जांच शुरू कर दी गई है। घटनास्थल के पास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। फोरेंसिक टीम भी मौके पर पहुंची है और तकनीकी साक्ष्य इकट्ठा किए जा रहे हैं।”
पुलिस ने अब तक FIR दर्ज कर ली है, लेकिन हत्या के पीछे की वजह और आरोपियों की पहचान फिलहाल स्पष्ट नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, पुलिस व्यक्तिगत रंजिश, व्यवसायिक विवाद, और रैकेट से जुड़े एंगल्स पर जांच कर रही है।
बिहार में बढ़ते अपराध पर चिंता
यह घटना कोई पहली बार नहीं हुई है। बीते कुछ महीनों में बिहार में संगीन आपराधिक घटनाओं में तेजी आई है। खासकर राजधानी पटना में,
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गोपाल खेमका जैसे प्रख्यात व्यवसायी की हत्या
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दिनदहाड़े छिनतई और गोलीबारी
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गिरोहबाज़ी और रंगदारी के मामलों में इज़ाफा
इन सबने सरकार और पुलिस प्रशासन की न्यायिक क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
जनता में भय और असंतोष
स्कूल संचालक जैसे सामाजिक रूप से प्रतिष्ठित व्यक्ति की हत्या ने स्थानीय जनता को झकझोर कर रख दिया है। शिक्षकों, छात्रों और अभिभावकों में भय का माहौल है। लोग पूछ रहे हैं कि जब एक शिक्षक तक सुरक्षित नहीं है, तो आम नागरिक की सुरक्षा की गारंटी कौन देगा?
कुछ स्थानीय प्रतिक्रियाएं:
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“अगर एक स्कूल संचालक की गोली मारकर हत्या की जा सकती है, तो आम आदमी कितना सुरक्षित है?” — लेखानगर निवासी
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“अपराधियों को कानून का कोई डर नहीं है, क्योंकि कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित है।” — मुस्तफापुर के स्थानीय व्यापारी
राजनीतिक प्रतिक्रिया और सरकार की भूमिका
घटना के बाद विपक्ष ने सरकार पर हमला बोल दिया है। विपक्षी दलों ने कहा कि “बिहार में जंगलराज लौट आया है”। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री से इस्तीफा तक मांग लिया है।
सोशल मीडिया पर #JusticeForAjitKumar, #BiharCrime, और #SavePatna जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। लोग तेज और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
हालांकि, प्रशासन ने कहा है कि अपराधियों को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा और उन्हें कड़ी सजा दी जाएगी।
क्या बिहार में सुरक्षा व्यवस्था चरमरा गई है?
विशेषज्ञ मानते हैं कि बढ़ते अपराध की मुख्य वजहें हैं:
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पुलिस बल की कमी और ढीली गश्त
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राजनीतिक हस्तक्षेप
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तकनीकी संसाधनों की कमी
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अपराधियों का नेटवर्क और प्रशासनिक मिलीभगत
अब यह जरूरी हो गया है कि राज्य सरकार सिर्फ बयानबाजी नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर सख्त कदम उठाए।
अजीत कुमार को श्रद्धांजलि
अजीत कुमार केवल एक स्कूल संचालक नहीं थे, वे एक शिक्षाविद, समाजसेवी और मार्गदर्शक भी थे। उनका यूं असामयिक जाना, खासकर इस तरह की हिंसा में, न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे शिक्षा जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है।
स्थानीय लोग लेखानगर और मुस्तफापुर में शांति मार्च और कैंडल मार्च आयोजित करने की योजना बना रहे हैं।
पटना में हुई अजीत कुमार की हत्या हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या बिहार में आम नागरिक की जान की कोई कीमत नहीं रह गई है?
सरकार और पुलिस प्रशासन को यह समझना होगा कि सिर्फ जांच का भरोसा दिलाना काफी नहीं, अब वक्त है नतीजे दिखाने का। अपराधियों को पकड़कर जल्द से जल्द सजा दिलाना और अपराध को रोकने के लिए पुख्ता रणनीति बनाना बेहद जरूरी हो गया है।
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