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बक्सर-भरौली के बीच गंगा नदी पर बनेगा नया पुल, 2025 से शुरू होगा निर्माण कार्य

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KKN गुरुग्राम डेस्क | बिहार के बक्सर और उत्तर प्रदेश के भरौली को जोड़ने के लिए गंगा नदी पर एक नया तीन लेन का पुल बनाया जाएगा। यह पुल न केवल दोनों राज्यों के बीच की दूरी को कम करेगा, बल्कि पूर्वांचल और ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के साथ कनेक्टिविटी को भी मजबूत करेगा।

एनएचएआई द्वारा प्रस्तावित यह परियोजना अब अपने प्रारंभिक चरण में है और मिट्टी परीक्षण की प्रक्रिया भरौली (यूपी) की ओर शुरू कर दी गई है। इसके बाद पुल निर्माण कार्य को धरातल पर उतारा जाएगा।

मिट्टी परीक्षण से शुरू हुई निर्माण प्रक्रिया

पुल निर्माण से पहले, मिट्टी की गुणवत्ता और संरचना का परीक्षण बेहद आवश्यक होता है। इस कार्य को ASC इंफ्राटेक कंपनी कर रही है, जो करीब 170 फीट गहरी बोरिंग करके मिट्टी के नमूने नई दिल्ली स्थित लैब में भेज रही है। यह परीक्षण करीब एक से डेढ़ महीने तक चलेगा।

इसके बाद 15 जून 2025 के आसपास निर्माण कार्य को हरी झंडी मिलने की उम्मीद है। यह कदम इस परियोजना के समयबद्ध निष्पादन के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।

पुल की डिजाइन और विशेषताएं (SEO Keywords)

इस नए पुल की कुल लंबाई 3.2 किलोमीटर होगी। इसमें कुल 40 खंभे बनाए जाएंगे, जिनमें से:

  • 08 खंभे गंगा नदी के भीतर स्थित होंगे

  • 32 खंभे नदी के दोनों किनारों पर स्थित होंगे

  • पहला खंभा बक्सर की ओर (P-1) और अंतिम खंभा भरौली की ओर (P-40) होगा

  • परियोजना की अनुमानित लागत ₹368 करोड़ है

  • UP की तरफ 2 किमी लंबा एलिवेटेड रोटरी भी बनाया जाएगा

वीर कुंवर सिंह सेतु के पश्चिम में बनेगा यह नया पुल

यह नया पुल, वीर कुंवर सिंह सेतु के ठीक पश्चिम में बनेगा। पुराने पुल पर लगातार बढ़ते यातायात के दबाव को देखते हुए, यह नया पुल एक वैकल्पिक मार्ग प्रदान करेगा और दोनों राज्यों के बीच आवागमन को बेहतर बनाएगा।

भरौली की ओर एलिवेटेड रोटरी का निर्माण भी किया जाएगा, जिससे इस पुल को वहां के सड़कों से जोड़ा जाएगा। इस तरह के एलिवेटेड स्ट्रक्चर ट्रैफिक को नियंत्रित करने में कारगर साबित होते हैं।

टेंडर और प्रशासनिक प्रक्रिया में आई रुकावटें

इस पुल की घोषणा केंद्र सरकार ने 2024 के आम बजट में की थी। बजट के दो महीने बाद एनएचएआई ने डीपीआर बनाकर अधिसूचना जारी की, लेकिन तकनीकी खामियों के कारण इसे रद्द कर दिया गया।

  • दूसरी बार भी पीएनसी इंफ्राटेक को जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन वह भी सफल नहीं हो सका

  • अंततः, 9 जनवरी 2025 को तीसरी बार ASC इंफ्राटेक को वर्क ऑर्डर जारी किया गया

  • इसके बाद ही मिट्टी जांच की प्रक्रिया शुरू की गई है

बक्सर गोलंबर पर एलिवेटेड रोटरी की मांग

जहां भरौली की ओर एलिवेटेड रोटरी का निर्माण किया जा रहा है, वहीं बक्सर गोलंबर पर इसकी कोई योजना नहीं बनाई गई है। स्थानीय नेताओं और नागरिकों ने बक्सर की ओर भी एलिवेटेड रोटरी की मांग की है।

श्रवण चौबे, अंबिका सिंह और प्रदीप जायसवाल जैसे सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि बक्सर में भी यह सुविधा दी जाए, तो शहर में ट्रैफिक जाम की समस्या काफी हद तक हल हो जाएगी।

इस परियोजना से क्या होंगे लाभ?

1. क्षेत्रीय व्यापार को मिलेगा बढ़ावा

यह पुल बिहार और उत्तर प्रदेश के व्यापारियों, किसानों और आम यात्रियों को तेज़, सुगम और सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराएगा, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।

2. राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क को मिलेगा मजबूती

यह पुल ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा, जिससे दिल्ली, पटना और वाराणसी जैसी महत्वपूर्ण जगहों के लिए यातायात सुगम होगा।

3. यात्रा समय में कमी

वीर कुंवर सिंह सेतु पर पहले से ही भारी दबाव है। नया पुल यातायात को विभाजित करेगा, जिससे यात्रा समय में 20 से 30 मिनट की कमी आ सकती है।

4. आपदा प्रबंधन में सहायता

गंगा नदी के दोनों ओर बाढ़ संभावित क्षेत्र हैं। ऐसे में एक अतिरिक्त पुल आपातकाल में राहत और बचाव कार्यों को बेहतर बनाएगा।

भविष्य की कनेक्टिविटी और योजना

इस पुल के जरिए यात्री और व्यापारी पटना-बक्सर हाईवे, गाजीपुर, और वाराणसी तक सरलता से पहुँच सकेंगे। इसके साथ ही यह पुल स्मार्ट सिटी योजना, उद्योगिक गलियारों और नगर विस्तार परियोजनाओं के लिए भी एक मजबूत आधार तैयार करेगा।

स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया

स्थानीय निवासियों ने इस परियोजना का स्वागत किया है। एक व्यापारी राकेश कुमार ने कहा, “यह पुल हमारे व्यापार, परिवार और भविष्य तीनों को जोड़ता है।”

मीना साहू, एक स्थानीय स्कूल प्रिंसिपल का कहना है, “यदि बक्सर की ओर भी एलिवेटेड रोड बने, तो पूरा शहर जाम से मुक्त हो सकता है।”

बक्सर-भरौली गंगा पुल एक साधारण कंक्रीट संरचना नहीं, बल्कि दो राज्यों को जोड़ने वाला विकास का प्रतीक है। इसके निर्माण से सामाजिक, आर्थिक और प्रशासनिक कनेक्टिविटी को नई ऊंचाई मिलेगी।

2025 में इसके निर्माण की शुरुआत के साथ ही यह परियोजना भविष्य में पूर्वांचल और बिहार की विकास यात्रा का एक अहम अध्याय बन जाएगी।

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