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S. Jaishankar ने पाकिस्तान और कश्मीर के मुद्दे पर क्या कहा

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भारत के विदेश मंत्री, डॉ. एस. जयशंकर ने हाल ही में लंदन स्थित चथम हाउस में कश्मीर मुद्दे पर महत्वपूर्ण बयान दिए। उन्होंने भारत सरकार द्वारा कश्मीर में उठाए गए कदमों के बारे में बताया और पाकिस्तान द्वारा अवैध रूप से कब्जाए गए कश्मीर के हिस्से की भारत में वापसी की आवश्यकता को लेकर अपनी बातें साझा की। जयशंकर के ये बयान न केवल कश्मीर की स्थिति को लेकर भारत की नीति को स्पष्ट करते हैं, बल्कि पाकिस्तान-आधारित कश्मीर (POK) को लेकर भारत के संकल्प को भी मजबूत करते हैं।

कश्मीर में भारत सरकार के द्वारा उठाए गए कदम

भारत के विदेश मंत्री ने कश्मीर के मुद्दे पर भारत सरकार द्वारा किए गए कई महत्वपूर्ण कदमों पर प्रकाश डाला। सबसे पहले, उन्होंने अगस्त 2019 में जम्मू और कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 को समाप्त करने का जिक्र किया, जिसे कश्मीर में शांति और स्थिरता लाने के लिए महत्वपूर्ण कदम माना गया। जयशंकर के अनुसार, अनुच्छेद 370 को हटाने से कश्मीर में भारतीय राज्य की पूरी संप्रभुता सुनिश्चित हुई।

इसके बाद, कश्मीर में सामाजिक न्याय, आर्थिक गतिविधियों और विकास को बहाल करने की दिशा में सरकार ने कई महत्वपूर्ण पहल की। उन्होंने यह भी बताया कि कश्मीर में चुनावी प्रक्रिया को बहाल किया गया और इन चुनावों में लोगों ने भारी संख्या में मतदान किया। इससे यह साबित हुआ कि कश्मीर के लोग लोकतांत्रिक प्रक्रिया में पूरी तरह से भागीदार हैं।

POK (Pakistan Occupied Kashmir) की वापसी: जयशंकर की बातों का केंद्र

हालांकि, जयशंकर ने यह भी साफ किया कि जम्मू और कश्मीर के सभी मुद्दे तब तक हल नहीं हो सकते जब तक पाकिस्तान के कब्जे में कश्मीर का हिस्सा भारत को वापस नहीं मिल जाता। उन्होंने कहा, “हम कश्मीर के उस हिस्से का इंतजार कर रहे हैं, जो पाकिस्तान के अवैध कब्जे में है। जब यह हिस्सा हमें वापस मिलेगा, तब कश्मीर का मुद्दा पूरी तरह से सुलझ जाएगा।” जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत की दृष्टि में कश्मीर तब तक पूरा नहीं हो सकता जब तक POK (पाकिस्तान द्वारा कब्जाए गए कश्मीर) को भारत में शामिल नहीं किया जाता।

यह बयान भारत की उस पुख्ता नीति को व्यक्त करता है, जिसके तहत भारत कभी भी पाकिस्तान-आधारित कश्मीर को छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को हल करने के लिए भारत की स्थिति पूरी तरह से स्पष्ट है और एक बार जब POK वापस आ जाएगा, तो कश्मीर का मुद्दा सुलझ जाएगा।

POK पर भारत का संकल्प: संसद का प्रस्ताव

जयशंकर ने पहले भी कई बार पाकिस्तान-आधारित कश्मीर (POK) को लेकर भारत के दृढ़ संकल्प का उल्लेख किया है। 2024 में दिल्ली विश्वविद्यालय के गर्गी कॉलेज में एक बातचीत के दौरान, जयशंकर ने कहा था, “POK भारत का हिस्सा है और भारत का हर राजनीतिक दल इस बात के लिए प्रतिबद्ध है कि POK को भारत में वापस लाया जाएगा। यह हमारे राष्ट्रीय संकल्प का हिस्सा है।”

उन्होंने यह भी कहा कि अनुच्छेद 370 को हटाने के बाद POK का मुद्दा भारतीय नागरिकों की सोच में फिर से जाग्रत हुआ है। जयशंकर का मानना है कि कश्मीर के विशेष दर्जे को खत्म करने के बाद ही POK के मुद्दे पर लोगों की जागरूकता बढ़ी है, और यह अब भारतीय राजनीति का एक अहम हिस्सा बन चुका है।

भारत के लिए POK कभी बाहर नहीं था

इसके अलावा, जयशंकर ने 2024 में एक और बयान दिया था, जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया था कि पाकिस्तान-आधारित कश्मीर कभी भी भारत से बाहर नहीं गया था। “POK कभी भी हमारे देश से बाहर नहीं था। यह हमेशा भारत का हिस्सा है,” उन्होंने कहा। उनका यह बयान भारतीय संसद के उस प्रस्ताव का हवाला था, जिसमें POK को भारत का अविभाज्य हिस्सा घोषित किया गया था।

जयशंकर ने यह भी कहा कि भारत ने शुरूआत में पाकिस्तान से इस क्षेत्र को खाली करने का अनुरोध नहीं किया, जिसका परिणाम यह हुआ कि पाकिस्तान ने इस क्षेत्र पर अवैध कब्जा कर लिया। उन्होंने कहा, “जब आपके पास एक जिम्मेदार रखवाले नहीं होते, तो कोई बाहरी ताकत आपका सामान चुरा सकती है।”

POK को लेकर लोगों की यादें: जयशंकर का बयान

भारत के विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि लोगों को POK के मुद्दे को भुला दिया गया था, लेकिन अब भारत सरकार ने इस मुद्दे को फिर से जन-जागरूकता का हिस्सा बना दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने अनुच्छेद 370 को हटाकर POK के मुद्दे को फिर से लोगों के सोचने के केंद्र में ला दिया है। उनका मानना है कि इस मुद्दे को सही समय पर उठाना आवश्यक था ताकि भारतीय नागरिकों को इस मुद्दे के बारे में जागरूक किया जा सके।

भारत की विदेश नीति और POK का भविष्य

जयशंकर के बयान से यह स्पष्ट होता है कि भारत पाकिस्तान के साथ संबंधों में POK को एक प्रमुख मुद्दा मानता है। कश्मीर के मामले में पाकिस्तान के साथ भारत की बातचीत हमेशा से ही उथल-पुथल रही है, और जयशंकर के बयान ने यह साबित कर दिया कि भारत इस मुद्दे पर किसी भी प्रकार का समझौता करने के लिए तैयार नहीं है।

यह भारत की राष्ट्रीय संप्रभुता और सुरक्षा से जुड़ा हुआ एक संवेदनशील विषय है। भारतीय सरकार ने हमेशा यह कहा है कि जम्मू और कश्मीर का पूरा क्षेत्र भारत का है और इसे किसी भी परिस्थिति में पाकिस्तान के कब्जे में नहीं रहने दिया जाएगा।

भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव

भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर मुद्दे को लेकर तनाव हमेशा बना रहा है, और जयशंकर के बयान से यह साफ है कि भारत किसी भी तरह से कश्मीर के उस हिस्से को पाकिस्तान के कब्जे में नहीं देख सकता। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत कश्मीर का मुद्दा हल करने के लिए पूरी तरह से तैयार है, लेकिन इसके लिए पाकिस्तान को जम्मू और कश्मीर के हिस्से को खाली करना होगा।

POK का मुद्दा कभी नहीं रुक सकता

जयशंकर के बयान इस बात को एक बार फिर से स्पष्ट करते हैं कि पाकिस्तान-आधारित कश्मीर (POK) भारत के लिए एक कभी न खत्म होने वाला मुद्दा है। भारतीय सरकार की इस मामले में नीति स्पष्ट है कि POK को भारत में वापस लाना उसकी राष्ट्रीय संप्रभुता और एकता की आवश्यकता है।

भारत के लिए कश्मीर का मुद्दा तब तक हल नहीं हो सकता जब तक POK भारत में वापस नहीं आता। जयशंकर ने इस मुद्दे को जन-चेतना का हिस्सा बनाने की जरूरत जताई और यह सुनिश्चित किया कि भारत सरकार इस मुद्दे को लेकर किसी भी प्रकार की नरमी नहीं दिखाएगी।

भारत की सरकार का यह संकल्प कश्मीर की पूरी संप्रभुता सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करेगा, और पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर को वापस लाने की दिशा में कदम उठाएगी।

 

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