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बल्ला तो खूब गरजा किंतु राजनितिक के पिच पर खामोश है क्रिकेट के देवता

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-संसद सत्र मे कम उपस्थित हुए मास्टर बलास्टर

–सन्यास के बाद भी राज्यसभा मे नही बढी सक्रियत

संतोष कुमार गुप्ता

नई दिल्ली। मास्टर बलास्टर सचिन तेंदुलकर जब क्रिकेट के मैदान मे उतरते थे करोड़ो चाहने वाले इनका दीदार करते थे। लिटिल मास्टर ने भारत को क्रिकेट के क्षेत्र मे कई बड़ी उपलब्धिया दिलायी। भारतीय क्रिकेट टीम के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर के नाम कई बड़े रिकार्ड शामिल हैं। उनका प्रदर्शन खेल की पिच पर हमेशा ही बेहतरीन रहा है, लेकिन संसद सदस्य के रूप में वो इतना अच्छा नहीं कर पाए जितनी उनसे उम्मीद थी।राजनितिक के पिच पर उनकी जुबान खामोश रही। संसद सदस्य के नाते सदन में उनका रिकॉर्ड बेहद खराब रहा है। सचिन राज्यसभा के लिए 2012 में नामांकित किए गए थे और 2013 में उन्होंने क्रिकेट से संन्यास ले लिया था, लेकिन तब से लेकर आज तक राज्यसभा के 348 दिनों के सत्र में वह सिर्फ 23 बार ही संसद में मौजूद रहे।

सचिन ही नहीं अभिनेत्री रेखा भी इस मामले में काफी पीछे रही हैं। रेखा तो इस दौरान सिर्फ 18 बार संसद पहुंचीं। रेखा को भी राज्यसभा के लिए 2012 में नामांकित किया गया था। इस दौरान सचिन पर कुल 58.8 लाख रुपए खर्च हुए थे। यह राज्य सभा से प्राप्त आंकड़ा है। राज्यसभा सदस्य होने के नाते सचिन को प्रति माह 50 हजार रुपए वेतन मिलता है। इसके अलावा प्रति माह 45 हजार रुपए संसदीय क्षेत्र के लिए खर्च, 15 हजार प्रति माह दफ्तर खर्च, यात्रा और दैनिक भत्ते मिलते हैं।वावजूद देश व क्षेत्र के लिए आवाज बनना तो दूर वह नियमियत रूप से सदन मे भी नही पहुंच पाते हैं।

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