शुक्रवार, फ़रवरी 27, 2026 4:51 पूर्वाह्न IST
होमKKN Specialमीनापुर में तबाही का कारण बना बूढ़ी गंडक का खुला तटबंध

मीनापुर में तबाही का कारण बना बूढ़ी गंडक का खुला तटबंध

Published on

बांध का निर्माण होने से टल सकता है खतरा

मुजफ्फरपुर। बिहार के मुजफ्फरपुर जिला अन्तर्गत मीनापुर में बूढ़ी गंडक का खुला तटबंध बाढ़ की तबाही का सबसे बड़ा कारण बन चुका है। बावजूद इसपर न तो कोई जन प्रतिनिधि और न ही अधिकारी कोई ठोस पहल करना चाह रहे हैं। इसका नतीजा है कि साल दर साल यहां की बड़ी आबादी बूढ़ी गंडक के कहर को झेलने के लिए अभिशप्त है।

जानकारी के मुताबिक मीनापुर से हरशेर तक बूढ़ी गंडक का वायां तटबंध करीब 11 किलोमीटर की दूरी में खुला छोड़ दिया गया है। इस कारण से बूढ़ी गंडक नदी में उफान आते ही बाढ़ का पानी मीनापुर के गांवों में फैलने लगता है और इससे जबरदस्त तबाही मच जाती है।
बिहार सरकार के पूर्व मंत्री दिनेश प्रसाद का आरोप है कि शहर व दूसरे इलाके को बचाने के लिए जानबूझ कर यहां तटबंध का निर्माण नहीं कराया गया है। बहरहाल, बूढ़ी गंडक नदी का यह खुला तटबंध अब मीनापुर के लोगों को डराने लगा है। मीनापुर में बाढ़ का सबसे बड़ा कारण यह खुला बांध ही है। जुलाई माह आते ही मीनापुर के लोगों को बाढ़ का खतरा सताने लगता है। नदी के किनारे बसे लोग पलायन करने को मजबूर होते हैं। पिछले वर्ष आयी बाढ़ ने प्रखंड की एक पंचायत को छोड़ बाकी के सभी 27 पंचायतों में भारी तबाही मचाई थी। इस बार भी अगर जलस्तर खतरे के निशान को पार किया, तो इलाके में बाढ़ तबाही मचाएगी।
तटबंध निर्माण नहीं होने से लोगों में आक्रोश
मीनापुर में बूढ़ी गंडक का खुला तटबंध अब लोगों के आक्रोश का कारण बन सकता है। बाढ़ की तबाही झेल रहे रघई के मुखिया चन्देश्वर साह कहतें हैं कि यदि शीघ्र ही बूढ़ी गंडक के इस खुले तटबंध को बांधा नहीं गया तो यहां के बाढ़ पीड़ित जन आंदोलन शुरू कर देंगे। ग्रामीणों ने बताया कि बायां तटबंध खुला होने से बूढ़ी गंडक का पानी सीधे मीनापुर की 27 पंचायतों में प्रवेश कर तबाही मचाती है। बाढ़ से यहां करोड़ों की फसल क्षति ही नहीं बल्कि, बड़ी संख्या में जानमाल का भी नुकसान होता है। राहत के नाम पर प्रत्येक साल प्रशासनिक हलको में लूट मची रहती है। आखिरकार, आम लोगों को ही इसका खामियाजा उठना पड़ता है। पिछले वर्ष बाढ़ राहत को लेकर लंबे समय तक लोगों ने प्रखंड मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन किया था।
टूट सकता है किसानो का सब्र
मीनापुर में बूढ़ी गंडक के खुले तटबंध को शीघ्र बांधा नहीं गया तो किसानो का सब्र टूट जाएगा। प्रशासन की उदासीनता के कारण लोग बाढ़ की विभीषिका झेल रहे हैं। लोग पलायन करने को मजबूर हैं। नीरज कुमार, समन्वयक किसान क्लब, अलीनेउरा
बांध को तत्काल निर्माण
सरकार और प्रशासन को समय रहते उपाय करना चाहिए। ताकि, मीनापुर के लोगों को बाढ़ की तबाही से बचाया जा सके। 11 किमी में बांध के निर्माण हो जाने से लाखों की आबादी बाढ़ के संकट से उबर जाएगी। राजकुमार साह, सहवाजपुर

KKN लाइव WhatsApp पर भी उपलब्ध है, खबरों की खबर के लिए यहां क्लिक करके आप हमारे चैनल को सब्सक्राइब कर सकते हैं।

KKN Public Correspondent Initiative

Latest articles

चुम्बी वैली: नक्शे की वह कील, जो कर रही है… खतरे की ओर इशारा

भारत-चीन-भूटान सीमा पर स्थित चुम्बी वैली आखिर इतनी संवेदनशील क्यों है? 2017 के डोकलाम...

INDIA गठबंधन में ‘साइलेंट क्राइसिस? 2026 से पहले बदलते सियासी समीकरण क्या है

KKN ब्यूरो। भारत की राजनीति एक बार फिर संक्रमण काल में है। लोकसभा चुनाव 2024...

जातीय जनगणना: क्या आंकड़ों से बनेगी नीति या फूटेगी राजनीति?

क्या भारत अपनी असली सामाजिक तस्वीर देखने के लिए तैयार है? अगर हर जाति...

Nalanda University: किसने जलाया ज्ञान का सबसे बड़ा खजाना?

जब न इंटरनेट था, न गूगल… तब दुनिया ज्ञान के लिए जाती थी— Nalanda...

More like this

क्या कोई राजनीतिक व्यक्ति कभी सुप्रीम कोर्ट का जज बना?

बिना क़ानून की डिग्री, राजनीति और न्यायपालिका पर उठे सबसे बड़े सवाल KKN ब्यूरो। भारतीय...

गुमनाम हकीकत” – संपूर्ण पुस्तक समीक्षा

KKN ब्यूरो। "गुमनाम हकीकत: अ फॉरगॉट्न हिस्ट्री" कौशलेंद्र झा द्वारा लिखी गई एक अतुलनीय...

टू नेशन थ्योरी: विभाजन की वैचारिक नींव और उसका सच

धर्म के आधार पर एक राष्ट्र की परिकल्पना से लेकर भारत के बंटवारे तक KKN...

सहदेव झा…एक गुमनाम शख्सियत

अगस्त क्रांति का महानायक KKN न्यूज ब्यूरो। बिहार में मुजफ्फरपुर जिला का एक कस्बा है-मीनापुर...।...
00:10:01

जब मुजफ्फरपुर बना आज़ादी की जंग का गढ़: खुदीराम, शारदा और सहदेव की अनसुनी कहानी

जब भी हम स्वतंत्रता संग्राम की बात करते हैं, तो दिल्ली, बंगाल और पंजाब...

अगर रामायण की घटनाएं आज होतीं तो कैसी होती खबरें?

KKN न्यूज ब्यूरो। धार्मिक ग्रंथ रामायण का हर प्रसंग हमें जीवन के महत्वपूर्ण संदेश...

गुरु रविदास: समाज सुधार और आध्यात्मिकता के प्रतीक

KKN न्यूज ब्यूरो। हर साल माघ पूर्णिमा के दिन गुरु रविदास जयंती (Guru Ravidas...

कौन थे कनकलता बरुआ और गुरुजी – “भारत छोड़ो आंदोलन” की अनसुनी दास्तान

8 अगस्त 1942, मुंबई के गोवालिया टैंक मैदान में महात्मा गांधी के 'भारत छोड़ो'...

रेजांगला का युद्ध और चीन की हकीकत

KKN न्यूज ब्यूरो। वर्ष 1962 के युद्ध की कई बातें है, जिसको समझना जरूरी...

प्रार्थना पर प्रहार क्यों

तेज आवाज की चपेट में है गांव KKN न्यूज ब्यूरो। चार रोज से चल रहा...

महापर्व छठ का खगोलीय महत्व

KKN न्यूज ब्यूरो। लोक आस्था का महापर्व छठ कार्तिक शुक्ल पक्ष के षष्ठी को...

इलाहाबाद क्यों गये थे चन्द्रशेखर आजाद

KKN न्यूज ब्यूरो। बात वर्ष 1920 की है। अंग्रेजो के खिलाफ सड़क पर खुलेआम...

प्लासी में ऐसा क्या हुआ कि भारत को अंग्रेजो का गुलाम होना पड़ा

इन दिनो भारत में आजादी का अमृत महोत्सव चल रहा है। यह बात हम...

फेक न्यूज की पहचान का आसान तरिका

सूचनाएं भ्रामक हो तो गुमराह होना लाजमी हो जाता है। सोशल मीडिया के इस...

इन कारणो से है मुजफ्फरपुर के लीची की विशिष्ट पहचान  

अपनी खास सांस्कृतिक विरासत के लिए दुनिया में विशिष्ट पहचान रखने वाले भारत की...