फूड प्वाइजन यानी आधुनिक जीवनशैली के लिए मौत का पैगाम

फूड प्वाइजन जानलेवा हो सकता है

KKN न्यूज ब्यूरो। विषाक्त भोजन यानी फूड प्वाइजनिंग…। सुनने में यह बात बहुत ही मामूली लगता है। हममें से अधिकांश लोग इसको गंभीरता से नहीं लेते है। पर, यह बहुत ही गंभीर हो सकता है। यह कितना खतरनाक हो सकता है। इसके लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के द्वारा जारी ग्राफ… जब आप जानेंगे…. तो नि:संदेह आप चौक जायेंगे। एक छोटी सी भूल… आपको कैसे मौत के आगोश तक पहुंचा सकती है। यदि बच भी गये… तो शरीर का कितना नुकसान हो जाता है। भारत सहित दुनिया कई अन्य देशों में फूड प्वाइजनिंग कितना गंभीर खतरे का संकेत दे रहा है। ऐसे तमाम सवालों का जवाब जान कर आप चौक जायेंगे।

बैक्टिरिया, वायरस या पैरासाइट करता है बीमार

फूड प्वाइजनिंग… यानी विषाक्त भोजन। यह जानलेवा भी हो सकता है। यह तब होता है जब हम अनजाने में ही कुछ ऐसी चीजें खा लेतें है या पी लेतें हैं। यदि उसमें हानिकारक कीटाणु पहले से मौजूद हो, तो यह हमारे शरीर के लिए नुकसान देने वाला हो सकता है। यह कीटाणु कोई बैक्टीरिया, वायरस या पैरासाइट हो सकता है। दरअसल, बैक्टेरिया एक ऐसा परजिवी है, जो भोजन में टॉक्सिन उत्पन्न कर देता है। यही टॉक्सिन शरीर में प्रवेस करते ही समस्याएं उत्पन्न करने लगता है। इस संबंध में विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्लू.एच.ओ का आंकड़ा चौका देने वाला है।

 फूड प्वाइजनिंग के मामलों में आया उछाल

विश्व स्वास्थ संगठन यानी डब्लू.एच.ओ के डेटा का अध्यन करने से पता चला कि 21वीं सदी में फूड प्वाइजनिंग के मामलों में उछाल आ गया है। यानी वर्ष 2004 में फूड प्वाइजन से जहां करीब 45 हजार मौते हो रही थी। वहीं, वर्ष 2012 आते- आते फूड प्वाइजन से मरने वालों की संख्या बढ़ कर करीब एक लाख 93 हजार 460 पर पहुंच गई। यानी मात्र आठ वर्षो के भीतर फूड प्वाइजन से मरने वालों की संख्या में करीब एक लाख 48 हजार से भी अधिक का उछाल आना… चौका देता है। इससे आप हालात की गंभीरता को समझ सकते हैं।

प्रत्येक साल 600 मिलियन लोग चपेट में

विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक और रिपोर्ट के अध्ययन से पता चला है कि असुरक्षित भोजन और खाद्द जनित बीमारियों की चपेट में आने से दुनिया के करीब 600 मिलियन लोग प्रत्येक साल बीमार हो रहें हैं। यह कितना खतरनाक है। इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते है कि इसमें से करीब 4 लाख 20 हजार लोगों की प्रतिवर्ष मौत हो रही है। यानी महज फूड प्वाइजन की वजह से ये सभी मौतें हो रही है। लिहाजा इस खतरे को समय रहते समझ लेना बहुत ही जरूरी है। कहतें हैं कि असुरक्षित भोजन न केवल हमारे स्वास्थ्य के लिए… बल्कि, अर्थव्यवस्था के लिए भी गंभीर खतरे का संकेत है।  ऐसे में उच्च गुणवत्ता वाले खाद्य सुरक्षा की जिम्मेदारी… सरकार के साथ- साथ उत्पादक और उपभोक्ता को भी लेनी होगी। क्योकि, यह जीवन से जुड़ा मामला है।

फूड प्वाइजनिंग से करीब 200 प्रकार की होती है बीमारियां

विश्व स्वास्थ्य संगठन की माने तो पूरी दुनिया में फूड प्वाइजनिंग से करीब 200 प्रकार की बीमारियां हो रही हैं। इसमें डायरिया भी एक है। अभी तक हमलोग यही समझ रहे थे कि फूड प्वाइजन से सिर्फ डायरिया होता है। पर, यह पूरी तरह से सही नहीं है। नए अध्ययन से पता चला है कि फूड प्वाइजन की वजह से कैंसर होने का खतरा भी कई गुणा तक बढ़ जाता है। हालिया रिपोर्ट से पता चला है कि करीब 60 करोड़ लोग प्रत्येक वर्ष फूड प्वाइजनिंग की चपेट में आ रहे है। इसमें से लगभग साढ़े 12 लाख लोगों की मौत हो रही है। मरने वालों में अधिकांश बच्चे है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन यानी विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 10 में से एक व्यक्ति दूषित भोजन खाने से बीमार हो रहा है। हमारा देश भारत भी इससे अछूता नहीं है। एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में प्रत्येक वर्ष करीब 15 लाख 73 हजार लोग खराब भोजन की वजह से अपनी जाने गवां रहें हैं। इस मामले में भारत, दुनिया में दूसरे नंबर पर है। मतलब हालात बहुत ही खतरनाक है। भारत सरकार के केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ो पर गौर करें तो वर्ष 2008 से 2017 के बीच भारत में फूड प्वाइजनिंग एक प्रकार से महामारी की तरह फैलने लगा है। यह सभी कुछ तब हो रहा है… जब हम में से अधिकांश लोग इस खतरे को ठीक से जानते तक नहीं है।

दूषित पानी से भी होता है फूड प्वाइजन

फूड प्वाइजन सिर्फ दूषित भोजन से नहीं, बल्कि  दूषित पानी पीने की वजह से भी हो सकता है। बल्कि, भोजन से कही अधिक खतरा दूषित पानी से है। यह कितना खतरनाक है, इसको आंकड़ों में समझने की कोशिश करते है। आंकड़ा बताता है कि दुनिया में प्रत्येक साल दूषित पानी- पीने से करीब 2 करोड़ लोगों की मौत हो रही है। दूषित पानी की वजह से जो मौत हो रही है, इसमें भारत पांचवें स्थान पर है। यानी दूषित पानी की वजह से मरने वालों में दुनिया के प्रत्येक पांच में से एक व्यक्ति भारत का है। अब आप खतरे की गंभीरता का स्वयं अंदाजा लगा सकते है।

कैंसर जैसे घातक बीमारी होने का खतरा

झारखंड और छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में दूषित पानी की वजह से लोगों में बीमारियां फैलने की ख़बरें अक्सर आती रहती है। बिहार भी इसमें पीछे नहीं है। यहीं कोई पाच या छह साल पहले की बात है। मीनापुर के गोरीगामा और समीप के कई गांवों में दूषित पानी की वजह से कैंसर जैसा घातक बीमारी… महामारी का रूप धरण करने लगा था। अखबार में खबर प्रकाशित होने के बाद राज्य और केन्द्र की स्वास्थ्य महकमा हरकत में आ गयी थी। कई स्तर पर इसकी सघन जांच और इलाज की व्यवस्था की गई। इतना ही नहीं बल्कि, इसी घटना के बाद उत्तर बिहार के मुजफ्फरपुर के एसकेएमसीएच कैंपस में कैंसर अस्पताल बनाने का निर्णय हुआ और आज वह अस्पताल काम भी करने लगा है। यानी दूषित पानी को नजरअंदाज करना… स्वास्थ्य के लिए… या यू कहें कि जीवन के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।

फूड प्वाइजन की पहचान और लक्षण

फूड प्वाइजन की पहचान कैसे करें। यानी इसके लक्षण क्या है…। दरअसल, फूड प्वाइजन होने के कुछ घंटे बाद ही हल्का बुखार आने लगता है। इसके बाद थकान या बेचैनी महसूस होने लगता है। इसके बाद पेट में ऐठन वाला दर्द  शुरू हो जाता है। और इसके बाद उल्टी और लूजमोशन हो सकता है। आप इसको फूड प्वाइजन का लक्षण मान सकतें हैं। कुछ लोग सिरदर्द होने की शिकायत भी करते है। आरंभ में यह ठीक हो गया तो बेहतर… अन्यथा शरीर का निर्जलीकरण यानी डिहाड्रेशन शुरू हो जाता है। इसके बाद रोगी को ठंड लगने लगता है और यहा से खतरा बड़ा होने लगता है। कहतें हैं कि इस तरह का कोई भी लक्षण दीखे… तो तत्काल डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। लापरवाही… खतरनाक हो सकता है।

स्टूल में खून का आना खतरे का संकेत

फूड प्वाइजन का सबसे खतरनाक बात है… स्टूल में खून का आना।  कहतें हें कि लूजमोशन के दौरान यदि स्टूल के  साथ खून आने लगे तो इसको हल्के में बिल्कुल नहीं लेना चाहिए। यह खतरे का गंभीर संकेत माना गया है। यदि यह तत्काल ठीक नहीं हुआ तो जीवन खतरे में पड़ सकता है। इस अवस्था में आने से पहले ही चिकित्सक से परामर्श अवश्य लेना चाहिए। क्योंकि, मल के साथ खून आने लगे तो समझिए कि रोगी का जीवन संकट में पड़ चुका है। फूड प्वाइजन से दुनिया में होने वाली अधिकांश मौत का यह सबसे गंभीर लक्षण माना गया है।

एक दर्जन से अधिक जानलेवा वैक्टिरिया

शरीर में वायरस, बैक्टीरिया या पैरासाइट के प्रवेस करने से यह बीमारी होता है। इसमें बैक्टीरिया इस बीमारी का सबसे बड़ा और आम कारण है। इसमें जो सबसे खतरनाक बैक्टीरिया है… उसमें, साल्मोनेला, ई-कोलाई,  क्लोस्ट्रीडियम, बोटलिनम, शिंगेला, लिस्टेरिया, विब्रियो- वलनिकस… और भी करीब एक दर्जन से अधिक खतरनाक वैक्टीरिया है। जिसकी वजह से फूड प्वाइजन हो सकता है। कहतें कि फूड प्वाइजन की वजह से शरीर के अंदरूनी हिस्से को बहुत नुकसान हो जाता है। अव्वल तो, रेस्पोरेटरी सिस्टम खराब होने का खतरा रहता है। कई बार सांस रूकने से मौत हो जाती है। इसके अतिरिक्त हाईपोटेंशन से कार्डिएक अरेस्ट होने का खतरा भी बना रहता है।

शरीर के अंगो पर प्रतिकूल असर

शरीर के कई अंग को जहरीला पदार्थ नुकसान पहुंचाता है। इसमें हृदय, किडनी और लिवर पर इसका सबसे बुरा असर पड़ने का खतरा बना रहता है। फेफड़ा के म्यूकस मेंम्बरेन को इससे बहुत नुकसान होने का खतरा रहता है। आंख में जलन या सूजन के साथ कई बार आंखों की रोशनी जाने की स्थिति बन जाती है। जहर के कारण किडनी सही से काम नहीं कर पाता है। नतीजा, किडनी फेलियर होने का खतरा भी रहता है। कहने का मतलब ये हैं कि कभी भी फूड प्वाइजन को हल्के में नहीं लेना चाहिए। यह बहुत ही घातक हो सकता है।

ईट राइट इंडिया प्रोजेक्ट लॉच

केंद्र और राज्यों की सरकारें इन मुद्दों के प्रति काफी गंभीर है। भारत की सरकार ने भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण के तहत इसकी रोककाम के लिए पहले ही काम शुरू कर दिया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 के तहत भारत सरकार ने “ईट राइट इंडिया…” प्रोजेक्ट लॉच कर दिया है। इसमें आयुष्मान भारत, पोषण अभियान, एनीमिया मुक्त भारत और स्वच्छ भारत मिशन जैसे कई प्रमुख कार्यक्रमों पर फोकस किया गया है यानी ध्यान केंद्रित किया गया है। कहतें हैं कि खाद्य सुरक्षा एक ऐसा मुद्दा है जिसके प्रति प्रत्येक व्यक्ति को जागृत होने की जरूरत है। गली, मोहल्ला और चौराहों पर बिकने वाले खाद्य पदार्थ… कितने सुरक्षित है। इसकी समझ… स्वयं में विकसित करने की जरूरत है। तभी हम स्वस्थ रहकर आगे बढ़ सकते हैं और स्वस्थ भारत की परिकल्पना को साकार कर सकते हैं।

 

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