Home National मुर्शिदाबाद हिंसा पर गरमाई सियासत: वक्फ एक्ट को लेकर बीजेपी-टीएमसी आमने-सामने

मुर्शिदाबाद हिंसा पर गरमाई सियासत: वक्फ एक्ट को लेकर बीजेपी-टीएमसी आमने-सामने

KKN गुरुग्राम डेस्क | पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में वक्फ एक्ट को लेकर भड़की हिंसा ने पूरे राज्य की राजनीति को गर्मा दिया है। इस हिंसा ने न सिर्फ स्थानीय स्तर पर तनाव बढ़ाया, बल्कि राज्य सरकार और केंद्र की मुख्य विपक्षी पार्टी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला भी तेज कर दिया है।

सूत्रों के मुताबिक, वक्फ संपत्तियों को लेकर स्थानीय लोगों में असंतोष था, जो देखते ही देखते उग्र प्रदर्शन में बदल गया। कई जगहों पर आगजनी, पथराव और दुकानों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं सामने आई हैं। पुलिस को हालात काबू में लाने के लिए अतिरिक्त बल तैनात करना पड़ा।

बीजेपी का हमला: ममता बनर्जी इस्तीफा दें

घटना के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर सीधा हमला बोलते हुए उनके इस्तीफे की मांग कर दी है। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि वक्फ एक्ट की आड़ में तृणमूल सरकार ‘तुष्टिकरण की राजनीति’ कर रही है, जिससे राज्य में सांप्रदायिक तनाव बढ़ रहा है।

“ममता सरकार राज्य को अराजकता की ओर ले जा रही है। हिंदू समुदाय की जमीनें जबरन वक्फ संपत्ति घोषित की जा रही हैं,” भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कहा।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस इस कानून का इस्तेमाल अल्पसंख्यक वोट बैंक को खुश करने के लिए कर रही है।

टीएमसी का पलटवार: बीजेपी कर रही है भड़काऊ राजनीति

भाजपा के आरोपों पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने भी तीखा पलटवार किया है। टीएमसी ने कहा कि भाजपा जानबूझकर इस संवेदनशील मुद्दे को राजनीतिक रंग दे रही है और लोगों को गुमराह कर रही है।

टीएमसी प्रवक्ता ने कहा,
“वक्फ एक्ट एक वैधानिक कानून है, जो पूरे देश में लागू है। भाजपा इसे सांप्रदायिक रंग देकर समाज में नफरत फैला रही है।”

टीएमसी का दावा है कि सरकार ने हालात को नियंत्रण में कर लिया है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है।

सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों ने बढ़ाई गर्मी

इस विवाद के बीच एक और मोड़ तब आया जब टीएमसी सांसद और पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। भाजपा समर्थकों ने इसे हिंसा से जोड़ते हुए टीएमसी पर और हमले किए।

हालांकि, जांच में सामने आया कि यह तस्वीर पुरानी है और वर्तमान घटना से कोई लेना-देना नहीं है। बावजूद इसके, इस वायरल सामग्री ने लोगों के बीच भ्रम और आक्रोश को और बढ़ाया।

सरकार ने अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं और सोशल मीडिया पर निगरानी तेज कर दी गई है।

झारखंड और केरल में भी उठी आवाजें

वक्फ एक्ट को लेकर बहस अब केवल बंगाल तक सीमित नहीं रही। झारखंड सरकार के मंत्री इर्फान अंसारी ने स्पष्ट कहा है कि राज्य में वक्फ एक्ट को उस रूप में लागू नहीं किया जाएगा, जैसा बंगाल में किया गया।

उधर, केरल में वक्फ विरोधी रैली के दौरान हमास की तस्वीरें लहराने को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। विपक्षी दलों ने इस पर सवाल उठाए हैं कि भारत के स्थानीय मुद्दों में विदेशी संगठन का नाम क्यों जोड़ा जा रहा है।

क्या है वक्फ एक्ट और क्यों हो रहा है विवाद?

वक्फ एक्ट 1995 में पारित हुआ था, जिसका उद्देश्य मुस्लिम समुदाय की धार्मिक या परोपकारी संपत्तियों की सुरक्षा और प्रबंधन सुनिश्चित करना था। इसके अंतर्गत वक्फ बोर्डों को अधिकार दिया गया कि वे वक्फ संपत्तियों का नियंत्रण संभालें।

हालांकि, कई राज्यों में आरोप लगे हैं कि इस कानून का दुरुपयोग हो रहा है और गैर-मुस्लिमों की जमीनों को भी वक्फ संपत्ति घोषित कर दिया जा रहा है, जिससे सामाजिक तनाव बढ़ रहा है।

राजनीतिक असर और चुनावी समीकरण

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुर्शिदाबाद की हिंसा आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों पर असर डाल सकती है। भाजपा इसे ‘कानून व्यवस्था’ और ‘संविधानिक अधिकारों’ का मुद्दा बनाकर जनता को लामबंद करने की कोशिश कर रही है, वहीं टीएमसी इसे भाजपा की ‘ध्रुवीकरण की साजिश’ बता रही है।

इन घटनाओं का असर बंगाल ही नहीं, बल्कि झारखंड, बिहार और असम जैसे पड़ोसी राज्यों की राजनीति पर भी पड़ सकता है।

मुर्शिदाबाद की घटना केवल कानून व्यवस्था का मामला नहीं है, बल्कि यह सामाजिक संतुलन, राजनीतिक जिम्मेदारी और संवैधानिक अधिकारों की भी परीक्षा है।
जहां एक ओर राजनीति अपनी जगह है, वहीं प्रशासन और समाज को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी कानून का उपयोग लोगों को बांटने या डरााने के लिए न हो।

फिलहाल प्रशासन ने हालात को काबू में बताया है, लेकिन स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या यह मामला राजनीतिक हथियार बनकर रह जाएगा या इसे सुलझाने के लिए कोई ठोस कदम उठाया जाएगा।

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