जब ट्रेन स्टेशन से खुलती है, तो सिर्फ डिब्बे नहीं भरते पूरा का पूरा बिहार भरकर निकल जाता है। 2025 के आखिरी दिनों में, हम लेकर आए हैं बिहार की सबसे बड़ी हकीकत की कहानी – पढ़े-लिखे नौजवान, मजबूर मज़दूर, सूखे नल, भरा हुआ प्लेटफॉर्म और “मेरिट हब” बनते बिहार की आधी-अधूरी सच्चाई।