मंगलवार, मार्च 3, 2026 9:56 अपराह्न IST
होमBiharनीतीश कुमार की राजनीति: सुशासन बाबू से पलटू राम तक | बिहार...

नीतीश कुमार की राजनीति: सुशासन बाबू से पलटू राम तक | बिहार चुनाव 2025

Published on

बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार एक ऐसा नाम हैं जिसे न अनदेखा किया जा सकता है और न ही आसानी से परिभाषित किया जा सकता है। बख्तियारपुर में 1 मार्च 1951 को जन्मे नीतीश, एक साधारण परिवार से निकलकर राज्य के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले मुख्यमंत्री बने और बिहार के राजनीतिक विमर्श का पर्याय बन गए। बचपन में ‘मुन्ना’ कहे जाने वाले नीतीश ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई NIT पटना (तत्कालीन बिहार कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग) से की, बिहार राज्य विद्युत बोर्ड की नौकरी ठुकराई और 70 के दशक के जेपी आंदोलन में कूदकर अपना राजनीतिक सफर शुरू किया।

जेपी आंदोलन: वैचारिक जमीन और साथियों से मुलाकात

  • 1974 के आंदोलन में सक्रिय भागीदारी, 19 महीने जेल और समाजवादी विचारधारा की दीक्षा ने उनके नेतृत्व का ढांचा तैयार किया।

  • इसी दौर में उनकी मुलाकात लालू प्रसाद यादव और सुशील कुमार मोदी से हुई, जो आगे चलकर बिहार की राजनीति की धुरी बने।

पहली जीत से दिल्ली तक

  • 1977 में हरनौत से पहली चुनावी कोशिश नाकाम रही, 1985 में वहीं से जीत मिली और विधानसभा की राजनीति में प्रवेश हुआ।

  • 1987 में युवा लोकदल के अध्यक्ष बने, 1989 में बाढ़ से लोकसभा पहुँचे और केंद्र में कृषि राज्य मंत्री बने।

  • 1994 में जॉर्ज फर्नांडीस के साथ समता पार्टी बनाई, जिससे राष्ट्रीय राजनीति में उनकी पहचान और मजबूत हुई।

मुख्यमंत्री पद: रिकॉर्ड, ठहराव और वापसी

  • पहली बार 3 मार्च 2000 को मुख्यमंत्री बने, पर बहुमत न होने से 7 दिन में इस्तीफा; यह कार्यकाल सबसे छोटे कार्यकालों में गिना जाता है।

  • नवंबर 2005 में NDA के साथ पूर्ण बहुमत से सत्ता में लौटे और ‘सुशासन बाबू’ की छवि बनी।

  • कानून-व्यवस्था में सख्ती, 36 हजार किमी ग्रामीण सड़कों का निर्माण, लड़कियों की साइकिल योजना जैसे फैसलों से शासन मॉडल चर्चा में आया; गाँवों तक बिजली आपूर्ति ने सामाजिक-आर्थिक संकेतकों पर असर डाला।

गठबंधन की राजनीति से ‘पलटू राम’ तक का सफ़र

  • 2013 में BJP से अलगाव, 2015 में RJD-कांग्रेस के साथ महागठबंधन, 2017 में फिर NDA में वापसी।

  • 2022 में दोबारा महागठबंधन, 2024 में फिर NDA के साथ—लगातार पुनर्संयोजनों ने विश्वसनीयता पर सवाल उठाए और उन्हें ‘पलटू राम’ कहने वाली धारा को बल दिया।

  • समर्थक इसे व्यावहारिक राजनीति और स्थिर शासन की प्राथमिकता बताते हैं, विरोधी इसे अवसरवाद मानते हैं।

2025 का चुनाव: ‘लास्ट टेस्ट’ या टर्निंग पॉइंट

  • इस बार BJP और JDU के बीच सीटों का 101-101 का बराबरी बंटवारा असामान्य संकेत देता है, क्योंकि पारंपरिकतः JDU ज्यादा सीटों पर लड़ती रही है।

  • स्वास्थ्य, एंटी-इनकम्बेंसी, तेजस्वी यादव की सक्रियता और प्रशांत किशोर के जन सुराज जैसे कारक चुनौती पेश कर रहे हैं।

  • दूसरी ओर, NDA के केंद्र में सत्ता, JDU की उपयोगिता, महिला मतदाताओं में उनकी पकड़ और गठबंधन प्रबंधन की सिद्ध महारत उनके पक्ष में खड़ी दिखती है।

नेरेटिव बनाम विकल्प

  • बिहार की राजनीति को करीब से देखने वाले विश्लेषक मानते हैं कि फिलहाल राज्य में नीतीश का वैकल्पिक, सर्वमान्य चेहरा स्पष्ट नहीं है।

  • यही कारण है कि NDA रणनीतिक रूप से 2025 का चुनाव उनके नेतृत्व में लड़ना सुरक्षित मान रही है, जबकि आलोचक इसे उनकी संभावित ‘अंतिम पारी’ भी कह रहे हैं।

अधूरी कहानी, पूरा प्रभाव

इंजीनियरिंग दिमाग और सोशल इंजीनियरिंग के संतुलन से नीतीश कुमार ने दो दशकों तक बिहार की राजनीति की दिशा तय की। उन्हें आप ‘सुशासन बाबू’ कहें या ‘पलटू राम’, यह तथ्य बना रहता है कि बिहार की राजनीति का कोई भी बड़ा अध्याय उनके बिना अधूरा लगता है। 2025 का जनादेश तय करेगा कि यह कहानी आगे कितनी दूर तक जाती है—पर इतिहास में उनकी राजनीतिक भूमिका दर्ज रहनी तय है।

Latest articles

आख़िरी मुगल बादशाह की वह चीख जो आज भी गूंजती है

क्या बहादुर शाह ज़फ़र सिर्फ एक बूढ़े शायर थे… या 1857 की क्रांति का...

मिडिल ईस्ट: महायुद्ध की दहलीज़ पर विभाजन और तड़पता हुआ क्षेत्र

KKN ब्यूरो। संयुक्त रूप से अमेरिका और इज़रायल ने अपने सबसे बड़े सैन्य अभियान...

लाउडस्पीकर पर सियासत या सेहत की लड़ाई? बिहार विधान परिषद में क्यों मचा शोर?

बिहार विधान परिषद में ध्वनि प्रदूषण का मुद्दा जिस गंभीरता से उठाया गया, उसने...

मिट्टी की खुशबू से मोबाइल की रिंगटोन तक: पांच दशक में बदलता ग्रामीण समाज

जब शाम ढलती थी और पूरा गांव एक आंगन में सिमट आता था KKN ब्यूरो।...

More like this

00:05:23

आख़िरी मुगल बादशाह की वह चीख जो आज भी गूंजती है

क्या बहादुर शाह ज़फ़र सिर्फ एक बूढ़े शायर थे… या 1857 की क्रांति का...
00:09:40

लाउडस्पीकर पर सियासत या सेहत की लड़ाई? बिहार विधान परिषद में क्यों मचा शोर?

बिहार विधान परिषद में ध्वनि प्रदूषण का मुद्दा जिस गंभीरता से उठाया गया, उसने...

मिट्टी की खुशबू से मोबाइल की रिंगटोन तक: पांच दशक में बदलता ग्रामीण समाज

जब शाम ढलती थी और पूरा गांव एक आंगन में सिमट आता था KKN ब्यूरो।...
00:08:43

चुम्बी वैली: नक्शे की वह कील, जो कर रही है… खतरे की ओर इशारा

भारत-चीन-भूटान सीमा पर स्थित चुम्बी वैली आखिर इतनी संवेदनशील क्यों है? 2017 के डोकलाम...

INDIA गठबंधन में ‘साइलेंट क्राइसिस? 2026 से पहले बदलते सियासी समीकरण क्या है

KKN ब्यूरो। भारत की राजनीति एक बार फिर संक्रमण काल में है। लोकसभा चुनाव 2024...
00:09:43

जातीय जनगणना: क्या आंकड़ों से बनेगी नीति या फूटेगी राजनीति?

क्या भारत अपनी असली सामाजिक तस्वीर देखने के लिए तैयार है? अगर हर जाति...
00:04:26

Nalanda University: किसने जलाया ज्ञान का सबसे बड़ा खजाना?

जब न इंटरनेट था, न गूगल… तब दुनिया ज्ञान के लिए जाती थी— Nalanda...
00:05:13

Siliguri Corridor क्या कर रहा है चीन-बांग्लादेश साजिश का कैसे हुआ खुलाशा

क्या आप जानते हैं कि भारत का एक 20 किलोमीटर चौड़ा इलाका देश के...
00:05:18

India-US Trade Deal से खतरे में MSP? | किसानों की नई चिंता का पूरा सच

देश में खामोशी है… लेकिन खेतों में बेचैनी। भारत-अमेरिका के नए ट्रेड फ्रेमवर्क के...
00:11:59

क्या पाकिस्तान टूटने जा रहा है? बलुचिस्तान में खुली बगावत, कहा गिरे सेना के ठिकाने

क्या पाकिस्तान की नींव में ऐसी दरार पड़ चुकी है, जिसे अब जोड़ा नहीं...

महिला रोजगार योजना बिहार : होली के बाद दूसरी किस्त के रूप में 20 हजार रुपये जारी होंगे

Mahila Rojgar Yojana Bihar के तहत राज्य सरकार ने दूसरी किस्त जारी करने की...

BRABU मुजफ्फरपुर में छात्राओं की फीस माफ, SC/ST छात्रों को भी राहत

बाबासाहेब भीवराव अंबेडकर बिहार यूनिवर्सिटी मुजफ्फरपुर (BRABU) ने छात्राओं के लिए बड़ी राहत की...

बिहार मौसम अपडेट : शुष्क रहेगा मौसम, सुबह-रात हल्की ठंड बरकरार

फरवरी का महीना आगे बढ़ने के साथ ही बिहार में मौसम का मिजाज धीरे-धीरे...
00:10:10

क्या चीन-बांग्लादेश की साज़िश से घिर गया भारत? सिलिगुड़ी कॉरीडोर पर क्यों मंडराया खतरा

भारत का सबसे संवेदनशील इलाका — सिलिगुड़ी कॉरीडोर, जिसे दुनिया चिकेन नेक के नाम...

बिहार के इंजीनियरिंग कॉलेजों को नहीं मिली NBA मान्यता, छात्रों के भविष्य पर असर

बिहार का एक भी इंजीनियरिंग कॉलेज अभी तक NBA यानी National Board of Accreditation...