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भारत को कमजोर करने की विदेशी साजिश? हकीकत है या फसाना

क्या भारत को कमजोर करने के लिए विदेशी ताकतें देश की आंतरिक दरारों का फायदा उठा रही हैं? क्या सोशल मीडिया पर फैलने वाली भ्रामक सूचनाएं किसी बड़े सूचना युद्ध का हिस्सा हैं? या फिर विदेशी साजिश के नाम पर वास्तविक समस्याओं से ध्यान भटकाया जा रहा है?

इस विशेष रिपोर्ट में कौशलेन्द्र झा के साथ देखिए ‘खबरों की खबर’ की एक महत्वपूर्ण पड़ताल। इसमें हम वर्तमान की डिजिटल चुनौतियों से लेकर भारत के औपनिवेशिक इतिहास तक, उन घटनाओं और प्रमाणों को समझने की कोशिश करेंगे, जो राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े बड़े सवाल खड़े करते हैं।

इस रिपोर्ट में चर्चा होगी:

  • सोशल मीडिया पर भ्रामक सूचनाओं और संदिग्ध खातों की भूमिका की।
  • साइबर सुरक्षा से जुड़े आंकड़ों और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संबंध की।
  • विदेशी हस्तक्षेप, सूचना युद्ध और डिजिटल प्रचार के संभावित खतरों की।
  • ईयू डिस-इन्फो-लैब की ‘इंडियन क्रॉनिकल्स’ जांच के निष्कर्षों की।
  • 1757 के प्लासी युद्ध और 1765 में ईस्ट इंडिया कंपनी को मिली दीवानी के ऐतिहासिक संदर्भ की।
  • भारत की सामाजिक दरारों, संस्थाओं पर भरोसे और लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती की।

लेकिन इस पड़ताल का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि हर संदेह को साजिश नहीं माना जा सकता। किसी संदिग्ध सोशल मीडिया खाते की मौजूदगी अपने आप किसी विदेशी सरकार की भूमिका साबित नहीं करती। इसी तरह साइबर सुरक्षा की हर घटना विदेशी हमला नहीं होती।

इसलिए हम तथ्यों, ऐतिहासिक दस्तावेजों, शोध और उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर समझेंगे कि वास्तविक खतरा कहां है और किन सवालों के जवाब अभी तलाशे जाने बाकी हैं।

क्या भारत की सुरक्षा केवल सीमाओं की रक्षा से सुनिश्चित हो सकती है? या देश को भीतर से मजबूत बनाना भी उतना ही जरूरी है?

देखिए ‘खबरों की खबर’, कौशलेन्द्र झा के साथ, केवल केकेएन लाइव पर।

#KKNLive #खबरोंकीखबर #NationalSecurity #CyberSecurity #InformationWarfare


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कौशलेन्द्र झा, KKN Live की संपादकीय टीम का नेतृत्व करते हैं और हिन्दुस्तान (हिन्दी दैनिक) में नियमित रूप से लेखन करते हैं। बिहार विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त करने के बाद उन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन दशकों से अधिक का अनुभव अर्जित किया है। वे प्रातःकमल और ईटीवी बिहार-झारखंड सहित कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों से जुड़े रहे हैं। सामाजिक सरोकारों में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही है—वे अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संघ (भारत) के बिहार प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं और “मानवाधिकार मीडिया रत्न” सम्मान से सम्मानित किए गए हैं। पत्रकारिता में उनकी गहरी समझ और सामाजिक अनुभव उनकी विश्लेषणात्मक लेखन शैली को विशिष्ट बनाते हैं

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