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अरुणाचल में चीन की नई चाल? भारत की सैन्य तैयारी और शौर्य कमांडो का बड़ा खुलासा

क्या अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर चीन का दबाव बढ़ रहा है? क्या भारत ने चीन की चुनौती का मुकाबला करने के लिए अपनी सुरक्षा रणनीति बदल दी है? और आखिर शौर्य कमांडो, ड्रोन और ड्रोन-रोधी प्रणालियां भारत की सीमा सुरक्षा को कितना मजबूत बना सकती हैं? भारत-चीन सीमा विवाद एक बार फिर चर्चा में है। वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीनी सैनिकों की गतिविधियां, गश्त के दौरान आमना-सामना और अरुणाचल प्रदेश को लेकर चीन के दावे भारत की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बने हुए हैं। केकेएन लाइव की इस विशेष खोजपरक रिपोर्ट में कौशलेन्द्र झा के साथ समझिए भारत-चीन सीमा विवाद की पूरी पृष्ठभूमि और भारत की बदलती सैन्य तैयारियों की कहानी। इस रिपोर्ट में जानिए: 1. अरुणाचल प्रदेश में भारत-चीन सीमा पर तनाव की वास्तविक स्थिति क्या है? 2. आईटीबीपी के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने चीन की चुनौती को लेकर क्या कहा? 3. शौर्य कमांडो कौन हैं और सीमा सुरक्षा में उनकी क्या भूमिका है? 4. भारत की सीमा पर ड्रोन और ड्रोन-रोधी प्रणालियों का इस्तेमाल क्यों महत्वपूर्ण है? 5. आईटीबीपी के आधुनिकीकरण के लिए 4,000 करोड़ रुपये की योजना में क्या प्रस्ताव है? 6. चीन के कब्जे वाले भारतीय भूभाग का कितना क्षेत्र है? 7. अक्साई चिन और शक्सगाम घाटी का विवाद क्या है? 8. 1962 के भारत-चीन युद्ध से लेकर 2020 के गलवान संघर्ष तक सीमा विवाद कैसे बदलता रहा है? 9. क्या भारत की नई सैन्य तैयारियां चीन की चुनौती का मुकाबला करने के लिए पर्याप्त हैं?

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कौशलेन्द्र झा, KKN Live की संपादकीय टीम का नेतृत्व करते हैं और हिन्दुस्तान (हिन्दी दैनिक) में नियमित रूप से लेखन करते हैं। बिहार विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त करने के बाद उन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन दशकों से अधिक का अनुभव अर्जित किया है। वे प्रातःकमल और ईटीवी बिहार-झारखंड सहित कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों से जुड़े रहे हैं। सामाजिक सरोकारों में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही है—वे अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संघ (भारत) के बिहार प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं और “मानवाधिकार मीडिया रत्न” सम्मान से सम्मानित किए गए हैं। पत्रकारिता में उनकी गहरी समझ और सामाजिक अनुभव उनकी विश्लेषणात्मक लेखन शैली को विशिष्ट बनाते हैं

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