Uttarakhand

उत्तराखंड नाम परिवर्तन: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का बड़ा फैसला, कई स्थानों के नाम बदले

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KKN Gurugram Desk

KKN गुरुग्राम डेस्क | उत्तराखंड सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए राज्य के कई स्थानों के नाम बदलने की घोषणा की है। इस फैसले की जानकारी स्वयं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया पर साझा की। यह निर्णय जनता की मांग और सांस्कृतिक विरासत को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

हरिद्वार, देहरादून, नैनीताल और उधम सिंह नगर जिलों में कई स्थानों के नाम बदले गए हैं। सबसे अधिक नाम परिवर्तन हरिद्वार जिले में हुए हैं, जहां 10 स्थानों के नाम बदले गए हैं। इसके अलावा, देहरादून में 4, नैनीताल में 2 और उधम सिंह नगर में 1 स्थान का नाम बदला गया है।

आइए जानते हैं, किन स्थानों के नाम बदले गए हैं और उनके नए नाम क्या हैं।

उत्तराखंड में बदले गए स्थानों की सूची

हरिद्वार जिला:

  • औरंगजेबपुर → शिवाजी नगर

  • गाजीवाली → आर्य नगर

  • चांदपुर → ज्योतिबा फुले नगर

  • मोहम्मदपुर जट → मोहनपुर जट

  • खानपुर कुर्सली → अंबेडकर नगर

  • इदरीशपुर → नंदपुर

  • खानपुर → श्रीकृष्णपुर

  • अकबरपुर फाजलपुर → विजयनगर

  • आसफ नगर → देवनारायण नगर

  • सलेमपुर राजपूताना → शूरसेन नगर

देहरादून जिला:

  • मियांवाला → रामजीवाला

  • पीरवाला → केसरीनगर

  • चांदपुर खुर्द → पृथ्वीराज नगर

  • अब्दुल्लापुर → दक्षनगर

नैनीताल जिला:

  • नवाबी रोड → अटल मार्ग

  • पंचक्की → आईआईटी मार्ग, अब गुरु गोलवलकर मार्ग

उधम सिंह नगर जिला:

  • सुल्तानपुर पट्टी (नगर पंचायत) → कौशल्या पुरी

नाम बदलने के पीछे सरकार का उद्देश्य

उत्तराखंड सरकार के इस फैसले को राज्य की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह नाम परिवर्तन जनता की भावनाओं और ऐतिहासिक महत्व को ध्यान में रखते हुए किया गया है।

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब देश के कई अन्य राज्यों में भी स्थानों के नाम सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक महापुरुषों के सम्मान में बदले जा रहे हैं। शिवाजी नगर, आर्य नगर और अंबेडकर नगर जैसे नए नाम, महान स्वतंत्रता सेनानियों और समाज सुधारकों के योगदान को दर्शाते हैं।

सरकार के फैसले पर जनता और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया

उत्तराखंड में इस नाम परिवर्तन के फैसले पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

➡ समर्थन में:

➡ विरोध में:

  • विपक्षी दलों और कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाए हैं।

  • कुछ लोगों का कहना है कि सरकार को पहले बेरोजगारी, शिक्षा और बुनियादी ढांचे जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए था।

  • कुछ स्थानीय लोगों को यह चिंता है कि आधिकारिक दस्तावेजों, पहचान पत्रों और सरकारी रिकॉर्ड्स में इन नाम परिवर्तनों को अपडेट करने में परेशानी हो सकती है

सोशल मीडिया पर ट्रेंड

सोशल मीडिया पर #UttarakhandNameChange, #ShivajiNagar और #CM_Dhami जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। लोग इस फैसले पर अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं। कुछ इसे सकारात्मक बदलाव मान रहे हैं, तो कुछ इसे राजनीतिक एजेंडा बता रहे हैं।

भारत में स्थानों के नाम बदलने का इतिहास

भारत में स्थानों के नाम बदलने की परंपरा कई वर्षों से चली आ रही है। देश के विभिन्न हिस्सों में ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को ध्यान में रखते हुए नाम परिवर्तन किए गए हैं

✅ कुछ प्रमुख उदाहरण:

  • इलाहाबाद → प्रयागराज

  • गुड़गांव → गुरुग्राम

  • फैजाबाद → अयोध्या

  • मुग़लसराय रेलवे स्टेशन → पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्टेशन

उत्तराखंड सरकार द्वारा किए गए ये नाम परिवर्तन भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा माने जा रहे हैं, जहां ऐतिहासिक महापुरुषों और स्वतंत्रता सेनानियों के नामों को प्राथमिकता दी जा रही है

नाम बदलने से क्या प्रभाव पड़ेगा?

✅ प्रशासनिक और सरकारी दस्तावेजों पर प्रभाव:

  • सरकारी कार्यालयों, राजस्व विभाग, आधार कार्ड, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस और मतदाता सूची में अपडेट की जरूरत होगी।

  • रेलवे स्टेशन, सड़कों और अन्य संकेतकों पर नए नाम लिखे जाएंगे

✅ सांस्कृतिक और सामाजिक प्रभाव:

  • स्थानीय लोगों की भावनाएं मजबूत होंगी और वे अपने क्षेत्र के नए नाम पर गर्व महसूस करेंगे।

  • यह कदम भारत की गौरवशाली इतिहास और संस्कृति को सम्मान देने का प्रयास माना जा रहा है।

✅ आर्थिक प्रभाव:

  • व्यवसायों और कंपनियों को अपने पते अपडेट करने होंगे

  • टूरिज्म सेक्टर पर असर पड़ सकता है क्योंकि पर्यटकों को नए नामों की जानकारी दी जानी होगी।

उत्तराखंड सरकार का यह फैसला राज्य की संस्कृति और इतिहास को नया आयाम देने का प्रयास है। हालांकि, इस पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं आ रही हैं, लेकिन यह निर्णय भारत के अन्य राज्यों में हो रहे नाम परिवर्तनों की कड़ी में एक नया कदम माना जा रहा है।

आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इन नए नामों को जनता कितनी जल्दी अपनाती है और यह बदलाव उत्तराखंड की प्रशासनिक व्यवस्था, पर्यटन और सांस्कृतिक पहचान को कैसे प्रभावित करता है

This post was published on अप्रैल 2, 2025 15:55

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