Home Society वाराणसी के कीनाराम स्थल से जुड़ी है कई आध्यात्मिक रहस्य

वाराणसी के कीनाराम स्थल से जुड़ी है कई आध्यात्मिक रहस्य

संजय कुमार सिंह

वाराणसी। भारत देश का नाम विश्व में संत ऋषि मुनियों का देश के नाम से प्रख्यात है। जिसमें उत्तर प्रदेश का वाराणसी जिला काशी के नाम से विख्यात है। गंगा किनारे धार्मिक स्थल बाबा विश्वनाथ, वाराणसी हिन्दु विश्व विद्यालय एवं कई धार्मिक स्थल है जो देश व विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करता है।
कशीदा व जड़ी की काम किया हुआ वनारसी साड़ी जो हर विवाहिता की पहली पसंद है । जिसका निर्माण इसी शहर मे होती है। वर्तमान मे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी से ही लोकसभा सांसद निर्वाचित होकर गये है। एक समय प्रतापी राजा हरिशचंद्र ने अपनी सच्चाई व इमांदारी का परिचय यहाँ पर ही श्मशान घाट पर कालू राम के यहाँ नौकरी कर के दी थी। अघोर के रूप मे साक्षात शिव के शिष्य आदि गुरू दतात्रे के शिष्य कालू राम वाराणसी के प्रख्यात अधोर संत कहे जाते है।
कहतें हैं कि कालू राम के यहाँ एक संत कीनाराम पहुँचे और कालू राम के शिष्य बन गय । उसके बाद कीना राम हरिशचंद्र घाट पर ही रहने लगे उसके बाद यहाँ कई अघोर संत हुए जिनमें राजेश्वर राम , अवधुत राम के बाद वर्तमान मे सिद्धार्थ गौतम राम साक्षात शिव स्वरूप समझे जाते है। कीनाराम समेत कई संत इस घाट पर समाधि ले चूके है। जिनकी भव्य मंदिर रविन्द्र पुरी आश्रम मे मौजूद है जो देश से लेकर विदेशीयो के लिए आस्था का केन्द्र बनी हुई है।
समय समय पर बाबा सिद्धार्थ गौतम राम आश्रम मे पहुंच कर सभी भक्त जनो को आशीर्वाद देते है। गुरू पूर्णिमा पर लाखों की संख्या मे दर्शन को लोग पहुँचते है। बाबा श्री राम कहते है खुद मानव बनो और दूसरों को भी मानव समझो। बताया जाता है कि आश्रम स्थल मे एक कुंड है जिसमे स्नान करने से रोग मुक्त होते है। पहली बार आए लोग स्नान के पश्चात अपना पहना भिंगे कपड़े को छोड़ जाते है जो दिन दुखियों के बीच वितरित की जाती है। मंलवार व रविवार मिला कर पांच दिन स्नान करने से मनोकामना पूर्ण होती है।
यहाँ धुनी की आग सदीयों से जलती आ रही है । धुनी की लकड़ी हरिशचंद्र घाट श्मशान से लाया जाता है। भभूत की अपनी एक अलग महत्व है जो प्रसाद स्वरूप अपने साथ भक्त गण घर ले जाते है। यहां पर लाखो लोगों के लिए प्रसाद तयार होती है। पर कोई यहाँ से भुखा नही लौटते है। यहां पर सभी धर्मों के लोग दर्शन को आते है। अपनी मनोकामना पुरी होने पर यहाँ रविवार व मंगलवार को आश्रम मे अपने हाथों मछली व चावल का प्रसाद तयार करते है जिसका भोग बाबा कीना राम को लगाया जाता है।

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