मानव शरीर को सुचारु रूप से काम करने के लिए हर दिन जरूरी पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। इनमें विटामिन बी 12 सबसे अहम माना जाता है। यह नर्वस सिस्टम को सही रखने, खून के सेल्स बनाने और मेटाबॉलिज्म को सपोर्ट करने में मदद करता है। लेकिन शरीर खुद से Vitamin B12 का निर्माण नहीं कर सकता। इसके लिए पूरी तरह से बाहरी आहार पर निर्भर रहना पड़ता है।
सबसे बड़ी समस्या यह है कि बहुत कम खाद्य पदार्थों में ही विटामिन बी 12 मौजूद होता है। खासकर शाकाहारी लोगों में इसकी कमी अधिक पाई जाती है। अक्सर लोग इस कमी को पहचान नहीं पाते और लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन धीरे-धीरे इसके संकेत गंभीर रूप लेने लगते हैं और यह स्थिति कई बीमारियों का कारण बन सकती है।
लगातार थकान और कमजोरी
यदि पर्याप्त नींद लेने और आराम करने के बाद भी शरीर थका हुआ महसूस करे तो यह Vitamin B12 deficiency का संकेत हो सकता है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ 2024 के अनुसार, अगर किसी व्यक्ति को 50 वर्ष से कम आयु में बिना किसी कारण लगातार थकान बनी रहे तो यह विटामिन बी 12 की कमी का नतीजा हो सकता है।
विटामिन बी 12 रेड ब्लड सेल्स बनाने में अहम भूमिका निभाता है। ये सेल्स पूरे शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाते हैं। जब विटामिन बी 12 की कमी होती है तो शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित होती है और परिणामस्वरूप थकान हमेशा बनी रहती है।
हाथ-पैर सुन्न होना और झुनझुनी
हाथों और पैरों में झुनझुनी होना या सुन्नपन महसूस होना Vitamin B12 deficiency का सबसे आम लक्षण है। यह इसलिए होता है क्योंकि विटामिन बी 12 नर्व्स को बचाने वाली माइलिन शीथ को बनाए रखने में मदद करता है।
जब शरीर में इस विटामिन की कमी हो जाती है तो नर्व्स सही तरीके से काम नहीं कर पाते और पिन चुभने जैसी संवेदनाएं महसूस होती हैं। लंबे समय तक स्थिति बिगड़ने पर बैलेंस बनाने में भी समस्या हो सकती है।
शाकाहारी भोजन से विटामिन बी 12 की पर्याप्त मात्रा नहीं मिल पाती। ऐसे में फोर्टिफाइड प्लांट बेस्ड मिल्क, सालमन और ट्राउट जैसी मछलियों के सेवन से कमी को दूर किया जा सकता है।
त्वचा पर पीलापन और फीका रंग
त्वचा का रंग कई बार शरीर की स्थिति को दर्शाता है। विटामिन बी 12 की कमी के कारण स्किन पीली या फीकी दिखने लगती है। यह तब होता है जब रेड ब्लड सेल्स सही तरीके से काम नहीं करते और शरीर में बिलीरुबिन बनने लगता है।
अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी की रिपोर्ट के अनुसार, जिन लोगों को लिवर डिजीज के बिना ही पीलिया की समस्या हो रही थी उनमें विटामिन बी 12 का स्तर कम पाया गया। यह लक्षण एनीमिया के खतरे की ओर भी इशारा करता है।
मूड स्विंग, डिप्रेशन और याददाश्त की कमी
Vitamin B12 deficiency शरीर के साथ-साथ दिमाग को भी प्रभावित करती है। हार्वर्ड मेडिकल स्कूल की 2024 की स्टडी ने बताया कि विटामिन बी 12 की कमी मूड डिसऑर्डर, डिप्रेशन और चिड़चिड़ेपन से जुड़ी हुई है।
दरअसल, विटामिन बी 12 न्यूरोट्रांसमीटर जैसे सेरोटोनिन और डोपामिन बनाने के लिए जरूरी होता है। ये रसायन मूड और कॉग्निटिव फंक्शन को नियंत्रित करते हैं। जब विटामिन बी 12 की कमी हो जाती है तो ये प्रक्रियाएं प्रभावित होती हैं और मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ने लगता है।
2025 में प्रकाशित एक क्लीनिकल रिव्यू में बताया गया कि लगभग 25 प्रतिशत बुजुर्ग मरीजों में डिप्रेशन के साथ-साथ Vitamin B12 deficiency भी पाई गई। इसके साथ ही याददाश्त कमजोर होना और ध्यान केंद्रित करने में परेशानी आना भी इसके संकेत हैं।
जीभ में सूजन और मुंह के छाले
विटामिन बी 12 की कमी जीभ में सूजन और जलन का कारण बन सकती है। इस स्थिति को ग्लोसाइटिस कहा जाता है। इसके अलावा बार-बार मुंह में छाले होना भी इस कमी का संकेत है।
ग्लोसाइटिस में जीभ लाल और चिकनी दिखती है और भोजन करते समय जलन या दर्द महसूस होता है। इससे व्यक्ति को सामान्य बातचीत करने में भी कठिनाई हो सकती है।
आंखों की रोशनी पर असर
विटामिन बी 12 की कमी आंखों की सेहत पर भी असर डाल सकती है। इससे धुंधला दिखाई देना या नजर में धब्बे आना शुरू हो सकता है।
अमेरिकन एकेडमी ऑफ ऑप्थैल्मोलॉजी ने 2024 की क्लीनिकल रिपोर्ट में बताया कि विटामिन बी 12 की कमी ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचा सकती है। इस स्थिति को ऑप्टिक न्यूरोपैथी कहा जाता है और यह लंबे समय तक अनदेखी करने पर स्थायी नुकसान भी पहुंचा सकती है।
अन्य गंभीर स्वास्थ्य खतरे
Vitamin B12 deficiency केवल छोटे लक्षणों तक सीमित नहीं रहती। लंबे समय तक इसकी कमी रहने पर यह गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है।
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एनीमिया
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नर्वस सिस्टम की समस्या
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हृदय रोग का खतरा
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गर्भावस्था में जटिलताएं
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हड्डियों का कमजोर होना और ऑस्टियोपोरोसिस
गर्भवती महिलाओं में इसकी कमी बच्चे के विकास पर भी बुरा असर डाल सकती है।
विटामिन बी 12 के स्रोत और बचाव
विटामिन बी 12 का उत्पादन पौधों में नहीं होता। यह ज्यादातर जानवरों से मिलने वाले आहार में पाया जाता है। मछली, अंडा, डेयरी प्रोडक्ट, चिकन और रेड मीट इसके अच्छे स्रोत माने जाते हैं।
शाकाहारी लोगों के लिए फोर्टिफाइड सीरियल्स, सोया प्रोडक्ट और प्लांट बेस्ड मिल्क बेहतर विकल्प हैं। कई बार डॉक्टर इसकी कमी पूरी करने के लिए सप्लीमेंट या इंजेक्शन भी देते हैं।
लेकिन किसी भी दवा या सप्लीमेंट का इस्तेमाल करने से पहले टेस्ट कराना जरूरी है। सही समय पर जांच और उपचार से इस समस्या को आसानी से काबू किया जा सकता है।
विटामिन बी 12 की कमी आज एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है। यह शरीर के हर हिस्से पर असर डाल सकती है। लगातार थकान, त्वचा का पीलापन, मूड स्विंग, आंखों की समस्या और नर्व्स से जुड़ी परेशानियां इसके संकेत हैं।
अगर शरीर में ऐसे लक्षण दिखें तो तुरंत ब्लड टेस्ट कराना चाहिए। समय रहते उपचार से जटिलताओं को रोका जा सकता है। संतुलित आहार और जागरूकता ही Vitamin B12 deficiency से बचाव का सबसे अच्छा तरीका है।
