दिवाली और शादी के मौसम में जहां लोग सोने की खरीदारी को शुभ मानते हैं, वहीं इस बार सोने की कीमतों में ऐतिहासिक बढ़ोतरी ने आम ग्राहकों की जेब पर भारी असर डाला है। दिवाली के कुछ दिन पहले सोने के दामों में भारी उछाल देखने को मिला है। पिछले एक साल में सोने की कीमत लगभग ₹51,000 प्रति 10 ग्राम बढ़ गई है। पिछले साल दिवाली के समय जहां सोने की कीमत औसतन ₹79,820 प्रति 10 ग्राम थी, वहीं इस बार यह ₹130,350 प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गई है। यह आंकड़ा ibjarates.com के अनुसार है।
Article Contents
विश्लेषकों की राय
विश्लेषकों का कहना है कि सोने की कीमतों में लगातार वृद्धि के पीछे कई कारण हैं। इनमें अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती मांग, डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी, और मध्य-पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव जैसे कारक शामिल हैं। इन सभी कारणों से सोने की कीमतों में उछाल आ रहा है। इसके अलावा, विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए आने वाले महीनों में सोने के दामों में और बढ़ोतरी हो सकती है।
ग्राहकों के खरीदारी रुझान में बदलाव
सोने की बढ़ती कीमतों ने ज्वेलरी बाजारों में ग्राहकों के रुझान को भी प्रभावित किया है। पहले जहां लोग भारी-भरकम और महंगे गहनों की खरीदारी करते थे, अब कई ग्राहक हल्के वजन के डिजाइन और छोटे गहनों की ओर रुख कर रहे हैं। इसके साथ ही, निवेशक गोल्ड ईटीएफ और डिजिटल गोल्ड की ओर झुक रहे हैं। इस बदलाव के कारण ज्वेलरी उद्योग में बदलाव आ रहा है, और ग्राहकों के खरीदारी पैटर्न में भी नये ट्रेंड देखने को मिल रहे हैं।
धनतेरस पर सोने की कीमतें और गिरावट
दिल्ली में शनिवार को सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर से गिरकर ₹2,400 की कमी के साथ ₹1,32,400 प्रति 10 ग्राम तक आ गईं। हालांकि, धनतेरस के दिन आभूषण दुकानों पर खरीदारों की भारी भीड़ उमड़ी, और सोने की कीमतें फिर से बढ़ गईं। अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, शुक्रवार को सोने की कीमत ₹1,34,800 प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गई थी, जो अब तक की सबसे अधिक कीमत थी।
स्थानीय सर्राफा बाजार में 99.5 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत भी ₹2,400 की गिरावट के साथ ₹1,31,800 प्रति 10 ग्राम (सभी करों सहित) हो गई। पिछले सत्र में इसकी कीमत ₹1,34,200 प्रति 10 ग्राम के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थी। अगर पिछले साल की तुलना करें, तो 29 अक्टूबर 2024 को धनतेरस पर सोने की कीमत ₹81,400 प्रति 10 ग्राम थी, जो इस बार बढ़कर ₹1,32,400 प्रति 10 ग्राम हो गई। यानी, एक साल में सोने की कीमत में ₹51,000 की वृद्धि हुई है, जो 62.65 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी है।
चांदी की कीमतों में गिरावट
सोने की तरह चांदी की कीमतों में भी गिरावट देखी गई। शनिवार को चांदी की कीमत ₹7,000 गिरकर ₹1,70,000 प्रति किलोग्राम (सभी करों सहित) हो गई। शुक्रवार को चांदी की कीमत ₹1,77,000 प्रति किलोग्राम थी। पिछले कुछ दिनों में चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव लगातार जारी रहा है, और यह गिरावट दिवाली के पहले एक महत्वपूर्ण संकेत है।
ग्राहकों पर असर और महंगाई के प्रभाव
सोने की कीमतों में इस भारी वृद्धि ने आम ग्राहकों पर प्रतिकूल असर डाला है। विशेष रूप से, जिन लोगों ने दिवाली और शादी के सीजन में सोने की खरीदारी की योजना बनाई थी, उनके लिए यह समय कठिन साबित हो रहा है। सोने की कीमतों ने अधिकांश ग्राहकों के बजट को प्रभावित किया है, और वे अब छोटी और हल्की ज्वेलरी खरीदने की ओर रुख कर रहे हैं। वहीं, निवेशक गोल्ड ईटीएफ और डिजिटल गोल्ड जैसी वैकल्पिक विधियों की ओर आकर्षित हो रहे हैं, ताकि वे सोने में निवेश कर सकें, बिना शारीरिक रूप से गहने खरीदे।
सोने की कीमतों के कारण
सोने की कीमतों में यह वृद्धि विभिन्न वैश्विक और स्थानीय कारणों से हुई है। सबसे पहले, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की मांग में वृद्धि ने इसका मूल्य बढ़ाया है। इसके अलावा, डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी ने भी सोने की कीमतों को प्रभावित किया है, क्योंकि सोना अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर में मूल्यवर्धित होता है। मध्य-पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक स्थिति भी सोने की कीमतों को ऊंचा कर रही है, क्योंकि लोग इसे एक सुरक्षित निवेश मानते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन सभी कारणों के कारण सोने की कीमतों में और भी वृद्धि हो सकती है। यह भी कहा जा रहा है कि अगर वैश्विक राजनीतिक संकटों में कमी आती है और आर्थिक स्थिति स्थिर होती है, तो सोने की कीमतें थोड़ा कम हो सकती हैं। लेकिन फिलहाल, सोने की मांग और असुरक्षा के कारण कीमतें बढ़ रही हैं।
सोने की कीमतों का भविष्य क्या होगा?
अब यह सवाल उठता है कि क्या सोने की कीमतों में और वृद्धि होगी? फिलहाल, सोने की कीमतों में उछाल के संकेत मिल रहे हैं, और इसके पीछे कई वैश्विक और स्थानीय कारण हैं। हालांकि, यदि वैश्विक स्तर पर कोई बड़ा संकट नहीं आता या रुपये की स्थिति में सुधार होता है, तो सोने की कीमतों में थोड़ी गिरावट हो सकती है। इसके बावजूद, सोने को सुरक्षित निवेश माना जाता है, और वर्तमान आर्थिक स्थिति को देखते हुए कीमतों में स्थिरता की संभावना कम है।
निवेशकों के लिए नए विकल्प
गोल्ड ईटीएफ और डिजिटल गोल्ड जैसे निवेश विकल्प अब अधिक लोकप्रिय हो रहे हैं, क्योंकि ये सोने में निवेश का एक सुविधाजनक और सस्ता तरीका प्रदान करते हैं। इस विकल्प के जरिए लोग गोल्ड के मूल्य में भागीदारी कर सकते हैं, बिना शारीरिक रूप से सोने की ज्वेलरी खरीदे। यह निवेशक वर्ग के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव है, क्योंकि इसमें उन्हें उच्च कीमतों से बचने का मौका मिलता है और साथ ही सोने के मूल्य में लाभ उठाने का अवसर मिलता है।
दिवाली 2025 के मौके पर सोने की कीमतों में आए भारी उछाल ने भारतीय ज्वेलरी बाजार को प्रभावित किया है। सोने के बढ़ते दामों ने उपभोक्ताओं के खरीदारी रुझानों को बदल दिया है, और लोग अब हल्की ज्वेलरी और डिजिटल गोल्ड की ओर रुख कर रहे हैं। वहीं, सोने में निवेश करने वालों के लिए नए विकल्प जैसे गोल्ड ईटीएफ और डिजिटल गोल्ड भी आकर्षक बन गए हैं।
इसके बावजूद, सोने की कीमतों में अस्थिरता और महंगाई के कारण उपभोक्ताओं को खरीदारी में सावधानी बरतनी पड़ रही है। आने वाले समय में यह देखना होगा कि सोने की कीमतें क्या दिशा तय करती हैं और क्या बाजार स्थिर हो पाएगा या फिर कीमतों में और वृद्धि होगी।



