मुजफ्फरपुर स्थित Sri Krishna Medical College and Hospital (SKMCH) की इमरजेंसी से चौंकाने वाला मामला सामने आया है। बुधवार को एक गंभीर रूप से घायल महिला को इलाज देने से मना कर दिया गया। डॉक्टरों ने परिजनों से कहा कि पहले PHC या Sadar Hospital से Referral Slip लाकर दिखाएं, तभी इलाज होगा।
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मनिकपुर निवासी रेहाना खातून गांव में हुई मारपीट में गंभीर रूप से घायल हुई थीं। उनके सिर में गहरी चोट थी और वह दर्द से कराह रही थीं। परिजन उन्हें तुरंत Emergency Ward लेकर पहुंचे लेकिन तैनात चिकित्सकों ने उन्हें देखने की ज़रूरत नहीं समझी।
एक घंटे की देरी और बढ़ा आक्रोश
परिजनों के लगातार आग्रह के बाद करीब एक घंटे बाद एक इंटर्न महिला चिकित्सक पहुँचीं। उन्होंने रेहाना की हालत देखने के बाद भी यही कहा कि Sadar Hospital से Referral Slip लाकर आएं। बिना Slip के इलाज संभव नहीं है। यह सुनकर परिजन गुस्से में आ गए और अस्पताल परिसर में हंगामा करने लगे।
इस दौरान मरीज की हालत बिगड़ने लगी। अंततः परिवार उसे तुरंत दूसरे Private Hospital ले गया।
परिजनों का आरोप
रेहाना खातून के परिवार ने अस्पताल पुलिस को बताया कि गांव में आपसी विवाद में हुई मारपीट में वह घायल हुई थीं। सिर में गहरी चोट के कारण उन्हें तुरंत इलाज की ज़रूरत थी।
परिवार ने कहा कि Emergency Ward में डॉक्टर ने साफ़ शब्दों में Referral Slip मांगी और इलाज से इनकार कर दिया। उन्होंने बताया कि अस्पताल प्रबंधक को कई बार फोन किया गया, लेकिन फोन नहीं उठाया गया।
अस्पताल प्रशासन की प्रतिक्रिया
घटना पर SKMCH प्रशासन ने चुप्पी साध ली। वहीं, उपाधीक्षक डॉ. सतीश कुमार सिंह ने कहा कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि Emergency Ward में आने वाले किसी भी मरीज का पहले इलाज होना चाहिए। उसके बाद औपचारिकताएं पूरी की जानी चाहिए।
परिजनों ने स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे से इसकी शिकायत की है। परिवार का कहना है कि यह पहला मामला नहीं है। Emergency Patients को जानबूझकर प्राइवेट में भेजने के लिए ऐसी लापरवाही बरती जाती है।
दलालों और निजी अस्पतालों की भूमिका
स्थानीय लोगों का कहना है कि SKMCH की इमरजेंसी के बाहर दलालों का जमावड़ा रहता है। ये लोग एम्बुलेंस चालकों के साथ मिलकर मरीजों पर नजर रखते हैं।
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कई बार मरीजों को सरकारी व्यवस्था से डराकर प्राइवेट अस्पताल भेजा जाता है।
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SKMCH के आसपास सैकड़ों Private Hospitals मौजूद हैं।
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मरीजों को बरगलाने और डराने की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं।
इस वजह से गरीब और जरूरतमंद मरीज अक्सर निजी अस्पतालों में महंगे इलाज के लिए मजबूर हो जाते हैं।
गंभीर सवालों के घेरे में SKMCH
SKMCH बिहार का प्रतिष्ठित सरकारी अस्पताल है। ऐसे में Referral Slip के नाम पर गंभीर मरीज को इलाज से वंचित करना सवाल खड़े करता है। अस्पताल का यह रवैया न केवल चिकित्सा नैतिकता के खिलाफ है, बल्कि सार्वजनिक विश्वास को भी चोट पहुँचाता है।
मरीजों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि Emergency Ward में यह एक पैटर्न बन चुका है। पहले भी कई मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिला और उन्हें Private Hospitals का रुख करना पड़ा।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
Bihar Healthcare लंबे समय से सवालों के घेरे में है। सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और उपकरणों की कमी आम बात है। लेकिन Emergency Cases में देरी को किसी भी हालत में उचित नहीं ठहराया जा सकता।
विशेषज्ञ मानते हैं कि Referral System का मकसद मरीजों को टालना नहीं बल्कि व्यवस्था को सुचारू बनाना है। लेकिन जब इसका इस्तेमाल इलाज रोकने के लिए किया जाता है तो यह गंभीर समस्या बन जाती है।
रेहाना खातून का मामला Bihar Healthcare System की खामियों को उजागर करता है। SKMCH जैसा बड़ा सरकारी अस्पताल जब Referral Slip के बिना इलाज से मना करता है तो यह पूरे सिस्टम पर सवाल उठाता है।
लोगों की उम्मीद होती है कि Emergency Ward में सबसे पहले मरीज की जान बचाई जाएगी। लेकिन इस घटना ने अस्पताल प्रशासन और चिकित्सकों की जवाबदेही पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं।
सरकार और स्वास्थ्य विभाग को चाहिए कि इस मामले की निष्पक्ष जांच करे और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो। तभी लोगों का भरोसा सरकारी अस्पतालों पर दोबारा कायम हो सकेगा।



