लोकसभा में नेता विपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक नया वीडियो जारी किया। इस वीडियो में उन्होंने ‘वोट चोरी’ के अपने आरोपों को और भी मजबूत बनाने की कोशिश की है। राहुल गांधी ने फिर से आरोप लगाया कि चुनाव आयोग (EC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच वोट चोरी के लिए मिलीभगत है। इसके अलावा, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने चुनाव आयोग पर देशद्रोह का भी आरोप लगाया और इस संबंध में उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों के उदाहरण दिए।
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चुनाव आयोग और भाजपा पर गंभीर आरोप
राहुल गांधी ने अपने वीडियो में दावा किया कि चुनाव आयोग और भाजपा के बीच एक गहरी साजिश चल रही है, जिसका उद्देश्य चुनाव परिणामों को अपने पक्ष में मोड़ना है। उन्होंने इन आरोपों को और भी स्पष्ट करते हुए कहा कि चुनाव आयोग का यह कृत्य लोकतंत्र और संविधान के साथ गहरा धोखा है। गांधी ने महाराष्ट्र, हरियाणा और कर्नाटका का उदाहरण देते हुए कहा कि इन राज्यों में नए वोटर्स का निर्माण एक जादुई तरीके से किया गया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “वोट चोरी सिर्फ एक चुनावी घोटाला नहीं है, यह संविधान और लोकतंत्र के साथ एक बड़ा धोखा है। देश के गुनहगार सुन लें – वक्त बदलेगा, सजा जरूर मिलेगी।”
100 से ज्यादा सीटों पर ‘वोट चोरी’ के आरोप
राहुल गांधी ने कहा कि वह एक राजनीतिक परिवार से हैं और पिछले 20 वर्षों से चुनावों में हिस्सा ले रहे हैं। इसलिए, उन्हें चुनावों के हर पहलू को समझने का अनुभव है, जिसमें बूथ मैनेजमेंट और वोट चोरी के तरीके भी शामिल हैं। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान 100 से अधिक सीटों पर वोट चोरी की गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि चुनाव निष्पक्ष होते, तो आज नरेंद्र मोदी की सरकार सत्ता में नहीं होती।
‘वोट चोरी’ के पांच तरीके
राहुल गांधी ने अपने वीडियो में ‘वोट चोरी’ के पांच प्रमुख तरीकों का खुलासा किया। इनमें डुप्लिकेट वोटर, गलत पते पर वोटर्स, एक ही घर में ढेर सारे मतदाता, जिनका होना असंभव है, गलत या छोटे फोटो वाली वोटर लिस्ट और फॉर्म 6 का दुरुपयोग शामिल हैं। गांधी ने दावा किया कि फॉर्म 6 पहली बार वोटर बनने वाले नवयुवकों के लिए है, लेकिन 90 साल तक के बुजुर्गों ने भी इसका इस्तेमाल कर अपने नाम मतदाता सूची में जोड़वाए हैं। राहुल गांधी के अनुसार, ये सभी मुद्दे एक सुनियोजित तरीके से वोट चोरी के संकेत हैं, जो चुनाव परिणामों को प्रभावित कर सकते हैं।
बिहार चुनाव पर राहुल का बयान
राहुल गांधी ने वीडियो में बिहार में अक्टूबर और नवंबर में होने वाले विधानसभा चुनावों के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया। उन्होंने बिहार में चल रहे मतदाताओं के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर भी तीखा हमला किया। उनका कहना था कि यह एक संस्थागत चोरी का उदाहरण है, जिसमें चुनाव आयोग स्पष्ट रूप से भाजपा की मदद करने के लिए मतदाता सूचियों में फेरबदल कर रहा है। उन्होंने कहा, “यह संस्थागत चोरी है। चुनाव आयोग मतदाता सूचियों में फेरबदल करके भाजपा की मदद करना चाहता है।” राहुल ने इस संबंध में एक दिन पहले की अपनी लाइव प्रस्तुति का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने अपने सभी आरोपों का विस्तृत ब्यौरा दिया था।
चुनाव आयोग का जवाब और राहुल गांधी का पलटवार
राहुल गांधी के आरोपों के बाद, चुनाव आयोग ने उनसे शपथ पत्र के माध्यम से उन सभी तथ्यों और सबूतों को साझा करने की मांग की, जो उन्होंने सार्वजनिक तौर पर आरोपों के समर्थन में पेश किए थे। राहुल गांधी ने गुरुवार को इस पर पलटवार करते हुए कहा, “मेरे शब्द ही शपथ हैं।” उन्होंने चुनाव आयोग से अपनी बातों की जांच करने की अपील करते हुए कहा, “मैंने सब कुछ सार्वजनिक रूप से कहा है और मैं चुनाव आयोग के आंकड़ों का ही हवाला दे रहा हूं।”
राहुल गांधी के इस रुख से यह स्पष्ट होता है कि वह अपनी बातों पर पूरी तरह से अडिग हैं और किसी भी दबाव में अपने आरोपों से पीछे नहीं हटेंगे। उनका यह बयान चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठ रहे सवालों को और हवा दे रहा है।
राजनीतिक हलकों में बढ़ी बहस
राहुल गांधी के आरोपों ने राजनीतिक हलकों में एक नई बहस छेड़ दी है। उनकी इन टिप्पणियों ने न केवल चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए हैं, बल्कि लोकतंत्र और चुनावी प्रक्रिया के प्रति जनता के विश्वास को भी चुनौती दी है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने राहुल गांधी के आरोपों का समर्थन किया है, और चुनाव आयोग से निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं, भाजपा और उसके समर्थकों ने इन आरोपों को खारिज किया है और इसे राजनीतिक हितों का हिस्सा बताया है।
राहुल गांधी का वीडियो और उनके आरोप भारतीय चुनाव प्रक्रिया में विश्वास की रक्षा का एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन चुका है। यदि इन आरोपों की सत्यता साबित होती है, तो यह भारतीय लोकतंत्र के लिए एक गंभीर समस्या हो सकती है। लोकतंत्र की ताकत तब ही मजबूत रहती है जब चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी होते हैं। राहुल गांधी के द्वारा उठाए गए इस मुद्दे ने लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब यह चुनाव आयोग पर निर्भर करता है कि वह इन आरोपों की जांच करके सच सामने लाता है या नहीं। भारतीय राजनीति में यह मामला आने वाले चुनावों और राजनीतिक फैसलों पर महत्वपूर्ण असर डाल सकता है।



