आजकल वजन घटाने, फिटनेस और हार्मोन बैलेंस को लेकर लोग अपनी डाइट में कई बदलाव कर रहे हैं। इसी प्रक्रिया में बहुत से लोग अनजाने में प्रोटीन का सेवन कम कर देते हैं। खासतौर पर महिलाएं, जो कम कैलोरी या सिर्फ कार्बोहाइड्रेट आधारित डाइट अपनाती हैं, उनमें प्रोटीन की कमी ज्यादा देखने को मिलती है। डॉ. मल्लिका सुरवे के अनुसार, प्रोटीन केवल मसल्स के लिए नहीं बल्कि हार्मोन, मेटाबॉलिज्म, ब्लड शुगर कंट्रोल और मेंटल हेल्थ के लिए भी जरूरी पोषक तत्व है।
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जब शरीर को रोजाना जरूरत के अनुसार प्रोटीन नहीं मिलता, तो इसके संकेत धीरे-धीरे सामने आने लगते हैं। शुरुआत में ये संकेत सामान्य लग सकते हैं, लेकिन समय के साथ ये गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकते हैं। थकान, बार-बार भूख लगना, मूड स्विंग्स और बालों का कमजोर होना ऐसे ही संकेत हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
शरीर के लिए प्रोटीन क्यों जरूरी है
प्रोटीन शरीर के लगभग हर सिस्टम को सपोर्ट करता है। हार्मोन निर्माण में इसकी अहम भूमिका होती है। पीरियड्स, थायरॉइड और फर्टिलिटी से जुड़े कई हार्मोन अमीनो एसिड से बनते हैं। प्रोटीन की कमी से महिलाओं में हार्मोन असंतुलन बढ़ सकता है और PCOS जैसी समस्याएं गंभीर हो सकती हैं।
ब्लड शुगर को संतुलित रखने में भी प्रोटीन मदद करता है। यह इंसुलिन स्पाइक्स को कम करता है, जिससे एनर्जी लेवल स्थिर रहता है। इंसुलिन रेजिस्टेंस से जूझ रहे लोगों के लिए यह खासतौर पर फायदेमंद माना जाता है।
मसल्स की मजबूती और मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाने में भी प्रोटीन की भूमिका अहम है। मसल मास बढ़ने से शरीर की बेसल मेटाबॉलिक रेट बेहतर होती है, जिससे फैट लॉस आसान हो जाता है। इसके अलावा प्रोटीन लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद करता है, जिससे बार-बार स्नैकिंग की आदत कम होती है।
गट हेल्थ के लिए भी प्रोटीन जरूरी है। डाइजेस्टिव एंजाइम्स के निर्माण और गट लाइनिंग की मरम्मत में यह सहायक होता है। प्रोटीन की कमी से पाचन संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
शरीर को कितनी मात्रा में प्रोटीन चाहिए
प्रोटीन की जरूरत हर व्यक्ति में अलग-अलग होती है। यह व्यक्ति की लाइफस्टाइल, शारीरिक गतिविधि और हेल्थ गोल्स पर निर्भर करती है। डॉ. मल्लिका सुरवे के अनुसार, सेडेंटरी लाइफस्टाइल वाले लोगों को अपेक्षाकृत कम प्रोटीन की जरूरत होती है, जबकि एक्टिव या जिम जाने वाले लोगों को ज्यादा प्रोटीन चाहिए।
फैट लॉस, PCOS या इंसुलिन रेजिस्टेंस से जूझ रही महिलाओं को प्रोटीन की मात्रा और बढ़ाने की जरूरत होती है। उदाहरण के तौर पर, 60 किलो वजन वाली महिला को रोजाना लगभग 75 से 95 ग्राम प्रोटीन की आवश्यकता हो सकती है। नियमित और संतुलित सेवन ज्यादा जरूरी है, न कि कभी-कभार ज्यादा मात्रा लेना।
बार-बार भूख और क्रेविंग्स
प्रोटीन की कमी का सबसे पहला संकेत बार-बार भूख लगना होता है। भोजन के बाद भी पेट भरा हुआ महसूस नहीं होता। ब्लड शुगर तेजी से गिरने लगता है, जिससे मीठा या नमकीन खाने की इच्छा बढ़ जाती है।
ऐसे में लोग बार-बार कुछ न कुछ खाते रहते हैं। इससे ओवरईटिंग होती है और वजन घटाना मुश्किल हो जाता है। कई बार लोग इसे कमजोर इच्छाशक्ति समझ लेते हैं, जबकि असल वजह पोषण की कमी होती है।
थकान और ब्रेन फॉग
कम प्रोटीन लेने से शरीर और दिमाग दोनों प्रभावित होते हैं। दिमाग को सही तरीके से काम करने के लिए लगातार एनर्जी की जरूरत होती है। प्रोटीन की कमी से फोकस कम हो जाता है और ब्रेन फॉग जैसी स्थिति बन सकती है।
लगातार थकान महसूस होना भी आम लक्षण है। पर्याप्त आराम के बाद भी एनर्जी वापस नहीं आती। रोजमर्रा के काम भारी लगने लगते हैं, जिसे अक्सर स्ट्रेस या नींद की कमी समझ लिया जाता है।
बाल और नाखून कमजोर होना
बाल और नाखून मुख्य रूप से केराटिन से बने होते हैं, जो एक प्रकार का प्रोटीन है। शरीर में प्रोटीन की कमी होने पर बाल टूटने लगते हैं और हेयर फॉल बढ़ जाता है।
नाखून भी कमजोर और भंगुर हो जाते हैं। उनकी ग्रोथ धीमी हो जाती है। ये संकेत बताते हैं कि शरीर को अंदर से पर्याप्त पोषण नहीं मिल रहा है।
मूड स्विंग्स और एंग्जायटी
प्रोटीन न्यूरोट्रांसमीटर के निर्माण में मदद करता है, जो मूड और भावनाओं को नियंत्रित करते हैं। अमीनो एसिड से सेरोटोनिन और डोपामिन जैसे केमिकल बनते हैं।
प्रोटीन की कमी से एंग्जायटी बढ़ सकती है और मूड बार-बार बदल सकता है। मानसिक संतुलन बनाए रखना मुश्किल हो जाता है। कई लोग मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देते हैं, लेकिन पोषण को नजरअंदाज कर देते हैं।
कमजोर इम्युनिटी और बार-बार बीमार पड़ना
इम्यून सिस्टम को मजबूत रखने के लिए भी प्रोटीन जरूरी है। इसकी कमी से शरीर की संक्रमण से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है।
ऐसे लोग जल्दी बीमार पड़ते हैं और ठीक होने में ज्यादा समय लगता है। यह संकेत कमजोर इम्युनिटी की ओर इशारा करता है।
घाव देर से भरना और मसल्स में कमजोरी
प्रोटीन शरीर की रिपेयर प्रोसेस में अहम भूमिका निभाता है। चोट या घाव देर से भरते हैं, अगर प्रोटीन की कमी हो।
वर्कआउट के बाद मसल रिकवरी भी धीमी हो जाती है। मसल पेन और कमजोरी बनी रहती है। धीरे-धीरे ताकत और स्टैमिना में कमी आने लगती है।
डाइजेस्टिव इश्यू और वाटर रिटेंशन
गट लाइनिंग कमजोर होने से ब्लोटिंग और पाचन संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। प्रोटीन की कमी से सूजन और वाटर रिटेंशन की समस्या भी हो सकती है।
ये लक्षण अक्सर सामान्य समझकर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं, जबकि इनके पीछे पोषण की कमी हो सकती है।
वजन घटाने में दिक्कत
प्रोटीन मेटाबॉलिज्म को तेज रखने में मदद करता है। जब प्रोटीन कम होता है, तो मेटाबॉलिज्म स्लो हो जाता है।
ऐसे में सख्त डाइट फॉलो करने के बावजूद वजन कम नहीं होता। इससे निराशा और डाइट फटीग बढ़ जाती है।
समय रहते संकेत पहचानना जरूरी
प्रोटीन की कमी धीरे-धीरे शरीर को प्रभावित करती है। शुरुआती लक्षण हल्के होते हैं, इसलिए लोग उन्हें नजरअंदाज कर देते हैं।
अगर समय रहते इन संकेतों को पहचान लिया जाए, तो लंबे समय तक होने वाले नुकसान से बचा जा सकता है। संतुलित डाइट और सही मात्रा में प्रोटीन लेना ओवरऑल हेल्थ के लिए बेहद जरूरी है।
प्रोटीन शरीर की बुनियादी जरूरतों में से एक है। यह हार्मोन बैलेंस, मेटाबॉलिज्म और मेंटल हेल्थ को सपोर्ट करता है। वजन घटाने या फिटनेस के चक्कर में प्रोटीन को नजरअंदाज करना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
थकान, भूख, मूड स्विंग्स और कमजोरी जैसे संकेतों को हल्के में न लें। सही मात्रा में प्रोटीन लेने से न केवल वजन कंट्रोल में रहता है, बल्कि शरीर लंबे समय तक स्वस्थ और मजबूत बना रहता है।
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