हर वर्ष 12 जनवरी के आसपास मनाया जाने वाला मकर संक्रांति पर्व सूर्य देव के राशि परिवर्तन से जुड़ा होता है। जब सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तो इस खगोलीय घटना को मकर संक्रांति कहा जाता है। यह पर्व धार्मिक, ज्योतिषीय और सांस्कृतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
Article Contents
हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में सूर्य देव 14 जनवरी को दोपहर 3 बजकर 13 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसी समय को लेकर मकर संक्रांति की तिथि को लेकर लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बनी हुई है। कुछ लोग 14 जनवरी को तो कुछ 15 जनवरी को यह पर्व मनाने की तैयारी कर रहे हैं।
क्यों खास है मकर संक्रांति का पर्व
मकर संक्रांति को उत्तर भारत में खिचड़ी के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व सूर्य के उत्तरायण होने का प्रतीक है। इस दिन से खरमास का समापन हो जाता है और मांगलिक कार्यों की शुरुआत मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रांति पर स्नान, दान और पूजा का विशेष महत्व होता है।
वर्ष 2026 में मकर संक्रांति का पर्व माघ कृष्ण पक्ष की एकादशी के साथ पड़ रहा है। यह संयोग दुर्लभ माना जाता है और इसी कारण इस बार पर्व का महत्व और भी बढ़ गया है।
14 या 15 जनवरी, कब मनाई जाएगी मकर संक्रांति
मकर संक्रांति की तिथि को लेकर बना भ्रम सूर्य के गोचर समय के कारण है। हिंदू पंचांग के अनुसार यदि सूर्य का राशि परिवर्तन दिन के समय होता है, तो उसी दिन संक्रांति मनाई जाती है। चूंकि सूर्य 14 जनवरी को दोपहर में मकर राशि में प्रवेश कर रहे हैं, इसलिए मकर संक्रांति 14 जनवरी को ही मनाई जाएगी।
इस दिन स्नान और दान जैसे धार्मिक कार्य किए जाएंगे। हालांकि एकादशी तिथि होने के कारण खिचड़ी बनाने और खाने की परंपरा 15 जनवरी को निभाई जाएगी। 14 जनवरी को षटतिला एकादशी भी पड़ रही है, जिसका भी विशेष धार्मिक महत्व है।
स्नान और दान का शुभ समय
मकर संक्रांति पर स्नान और दान के लिए शुभ मुहूर्त का विशेष ध्यान रखा जाता है। 14 जनवरी को महापुण्य काल दोपहर 3:13 बजे से शाम 4:58 बजे तक रहेगा। वहीं पुण्य काल दोपहर 3:13 बजे से शाम 5:46 बजे तक माना गया है।
मान्यता है कि इस समय स्नान, दान और सूर्य उपासना करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। सूर्य के उत्तरायण होते ही नकारात्मकता दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ता है।
मकर संक्रांति पर किए जाने वाले धार्मिक उपाय
मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव की कृपा प्राप्त करने के लिए विशेष पूजा की जाती है। इस दिन आदित्य हृदय स्तोत्र और सूर्य चालीसा का पाठ करना शुभ माना जाता है। इससे मान-सम्मान, स्वास्थ्य और आत्मबल में वृद्धि होती है।
शनि देव से जुड़ी परेशानियों से राहत पाने के लिए मकर संक्रांति के दिन शनि चालीसा का पाठ भी किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इससे शनि दोष शांत होता है।
दान का विशेष महत्व
मकर संक्रांति पर दान का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन जरूरतमंदों को कंबल, अनाज, फल, काला तिल और घी का दान करना शुभ माना जाता है। दान से न केवल पुण्य की प्राप्ति होती है, बल्कि सामाजिक समरसता भी बढ़ती है।
धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि मकर संक्रांति पर किया गया दान कई गुना फल देता है। यही कारण है कि इस दिन दान-पुण्य की परंपरा सदियों से चली आ रही है।
उत्तरायण का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व
उत्तरायण का समय हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ माना गया है। यह काल अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का प्रतीक है। सूर्य का उत्तर दिशा में गमन जीवन में सकारात्मक बदलाव और उन्नति का संकेत माना जाता है।
ज्योतिष के अनुसार मकर राशि में सूर्य का प्रवेश स्थिरता, अनुशासन और कर्म का संदेश देता है। इस समय किए गए संकल्प और प्रयास लंबे समय तक फलदायी माने जाते हैं।
देशभर में अलग-अलग रूपों में मनाया जाता है पर्व
मकर संक्रांति भारत के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग नामों से मनाई जाती है। उत्तर भारत में इसे खिचड़ी, गुजरात में उत्तरायण, दक्षिण भारत में पोंगल और पंजाब में लोहड़ी के रूप में मनाया जाता है।
नाम भले ही अलग हों, लेकिन पर्व का मूल भाव सूर्य उपासना, फसल उत्सव और सामाजिक मेल-जोल ही रहता है।
मकर संक्रांति का आध्यात्मिक संदेश
मकर संक्रांति जीवन में नई शुरुआत का प्रतीक है। यह पर्व आत्मशुद्धि, संयम और दान की भावना को मजबूत करता है। सूर्य के उत्तरायण होने के साथ ही व्यक्ति को भी अपने जीवन में सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।
यह पर्व सिखाता है कि अनुशासन, सेवा और श्रद्धा से जीवन को बेहतर बनाया जा सकता है।
भक्तों के लिए जरूरी सलाह
मकर संक्रांति के पर्व पर धार्मिक कार्य पंचांग के अनुसार करना उचित माना जाता है। 14 जनवरी को स्नान, दान और सूर्य पूजा करना श्रेष्ठ रहेगा। खिचड़ी से जुड़ी परंपराएं 15 जनवरी को निभाई जाएंगी।
क्षेत्रीय परंपराओं में कुछ अंतर हो सकता है, इसलिए स्थानीय आचार्यों की सलाह लेना भी लाभकारी रहेगा।
आस्था और परंपरा का संगम है मकर संक्रांति
मकर संक्रांति 2026 आस्था, ज्योतिष और परंपरा का सुंदर संगम लेकर आ रही है। एकादशी के साथ पड़ा यह पर्व श्रद्धालुओं के लिए विशेष फलदायी माना जा रहा है।
सूर्य देव का मकर राशि में प्रवेश जीवन में नई ऊर्जा और उम्मीद का संचार करता है। मकर संक्रांति का पर्व आज भी लोगों को दान, धर्म और सकारात्मक सोच की राह पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
Read this article in
KKN लाइव WhatsApp पर भी उपलब्ध है, खबरों की खबर के लिए यहां क्लिक करके आप हमारे चैनल को सब्सक्राइब कर सकते हैं।
Share this:
- Click to share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp
- Click to share on Facebook (Opens in new window) Facebook
- Click to share on X (Opens in new window) X
- Click to share on LinkedIn (Opens in new window) LinkedIn
- Click to share on Threads (Opens in new window) Threads
- Click to share on Telegram (Opens in new window) Telegram



