सर्दियों में फटे होंठ एक आम समस्या मानी जाती है। अधिकतर लोग इसे ठंडी हवा, कम पानी पीने या lip balm न लगाने से जोड़ते हैं। लेकिन न्यूट्रिशनिस्ट Shweta Shah और आयुर्वेद के अनुसार यह समस्या केवल बाहरी ड्रायनेस तक सीमित नहीं है। फटे होंठ शरीर के भीतर चल रहे असंतुलन का शुरुआती संकेत भी हो सकते हैं। खासतौर पर यह बढ़े हुए Vata dosha और कमजोर digestion की ओर इशारा करता है।
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सर्दियों में त्वचा का सूखना सामान्य माना जाता है। लेकिन आयुर्वेद मानता है कि होंठ सबसे पहले शरीर की स्थिति बताते हैं। जब शरीर में अंदरूनी नमी कम होने लगती है, तो उसका असर सबसे पहले होंठों पर दिखता है। बार-बार होंठ फटना इस बात का संकेत हो सकता है कि शरीर भीतर से संतुलन खो रहा है।
आयुर्वेद में होंठों को क्यों माना गया है अहम
आयुर्वेद के अनुसार होंठ शरीर का moisture alarm होते हैं। जब अंदरूनी lubrication कम होती है, तो होंठ सूखने लगते हैं। यह समस्या सर्दियों में ज्यादा देखी जाती है क्योंकि इस मौसम में Vata dosha स्वाभाविक रूप से बढ़ता है। ठंडा मौसम, अनियमित खानपान और मानसिक तनाव इस असंतुलन को और बढ़ा देते हैं।
बार-बार lip balm लगाना केवल अस्थायी राहत देता है। इससे समस्या की जड़ तक नहीं पहुंचा जा सकता। आयुर्वेद का फोकस शरीर के अंदर संतुलन बनाने पर होता है। सही digestion और पोषण से ही शरीर की प्राकृतिक नमी वापस आती है।
पाचन तंत्र और होंठों का गहरा संबंध
आयुर्वेद मानता है कि होंठों का सीधा संबंध कोलन से होता है। कोलन Vata zone का हिस्सा माना जाता है। अगर गैस, कब्ज या digestion से जुड़ी परेशानी है, तो उसका असर सबसे पहले होंठों पर दिखाई देता है। होंठों पर दरारें, पपड़ी या लगातार सूखापन इसी का संकेत हो सकता है।
कई लोग पर्याप्त पानी पीते हैं, फिर भी उनके होंठ फटे रहते हैं। श्वेता शाह के अनुसार, समस्या पानी की मात्रा नहीं बल्कि absorption की होती है। कमजोर digestion के कारण रसा धातु सही तरीके से नमी और पोषण को शरीर में पहुंचा नहीं पाती। इसका नतीजा होंठों की ड्रायनेस के रूप में सामने आता है।
सर्दियों में समस्या क्यों बढ़ जाती है
सर्दियों में कई आदतें अनजाने में नुकसान करती हैं। ठंड के कारण digestion कमजोर हो जाता है। देर से खाना खाने की आदत शरीर की प्राकृतिक लय बिगाड़ देती है। ज्यादा चाय और कॉफी पीना Vata को बढ़ाता है। मसालेदार और ज्यादा नमक वाला भोजन भी ड्रायनेस को बढ़ावा देता है।
जब Vata dosha बढ़ता है, तो शरीर के ऊतकों में सूखापन आने लगता है। होंठ इसका सबसे जल्दी दिखाई देने वाला संकेत होते हैं। अक्सर लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं और सिर्फ बाहरी उपायों पर निर्भर रहते हैं।
सिर्फ पानी पीना क्यों नहीं है काफी
हाइड्रेशन जरूरी है, लेकिन केवल पानी पीना ही समाधान नहीं है। जब digestion कमजोर होता है, तो शरीर पानी को ठीक से अवशोषित नहीं कर पाता। ऐसे में पर्याप्त पानी पीने के बावजूद नमी शरीर तक नहीं पहुंचती।
आयुर्वेद सर्दियों में गुनगुने पानी की सलाह देता है। इससे पाचन क्रिया सक्रिय होती है और absorption बेहतर होता है। ठंडा पानी digestion को और सुस्त कर सकता है, जिससे ड्रायनेस बढ़ जाती है।
अंदरूनी lubrication का महत्व
शरीर में अंदरूनी चिकनाई को आयुर्वेद में स्नेह कहा गया है। जब स्नेह कम होता है, तो सूखापन बढ़ने लगता है। होंठों में तेल ग्रंथियां नहीं होतीं, इसलिए वहां यह समस्या जल्दी नजर आती है।
बाहरी lip balm थोड़ी देर के लिए नमी देता है, लेकिन स्नेह को वापस नहीं ला सकता। इसके लिए diet में सही फैट्स का होना जरूरी है। थोड़ी मात्रा में देसी घी शरीर को भीतर से पोषण देता है और Vata को शांत करता है।
आयुर्वेदिक जीवनशैली से मिल सकता है राहत
आयुर्वेद कुछ आसान बदलावों की सलाह देता है। गुनगुना पानी पीने से digestion सुधरता है। भोजन में थोड़ा देसी घी शामिल करने से अंदरूनी lubrication बढ़ती है। जल्दी डिनर करने से शरीर को रात में संतुलन बनाने का समय मिलता है।
चाय, कॉफी, ज्यादा मसाले और नमक का सेवन कम करना फायदेमंद होता है। हल्का, गर्म और सादा भोजन सर्दियों में digestion को सपोर्ट करता है। ये छोटे बदलाव होंठों की समस्या को जड़ से सुधार सकते हैं।
अनुशासित दिनचर्या भी है जरूरी
नियमित समय पर खाना digestion को मजबूत करता है। बार-बार खाना छोड़ना या देर करना Vata को और बिगाड़ता है। ताजा और गर्म भोजन शरीर को बेहतर पोषण देता है। ठंडा और भारी भोजन पाचन को धीमा करता है।
पर्याप्त नींद भी digestion और hydration से जुड़ी होती है। देर रात तक जागना Vata असंतुलन बढ़ाता है। तनाव भी सूखापन बढ़ाने में भूमिका निभाता है। शांत दिनचर्या से शरीर खुद को संतुलित कर पाता है।
lip balm की भूमिका सीमित है
lip balm होंठों को बाहरी सुरक्षा देता है। यह नमी को कुछ समय तक बनाए रखता है। लेकिन यह अंदरूनी समस्या का इलाज नहीं है। केवल lip balm पर निर्भर रहने से असली सुधार नहीं होता।
जब digestion सुधरता है और शरीर में संतुलन बनता है, तो होंठ अपने आप मुलायम होने लगते हैं। तब बार-बार lip balm लगाने की जरूरत नहीं पड़ती।
शरीर के संकेतों को समझना जरूरी
फटे होंठ एक शुरुआती warning हो सकते हैं। यह संकेत गंभीर समस्याओं से पहले दिखाई देता है। आयुर्वेद में समय रहते सुधार पर जोर दिया जाता है। digestion सुधारने से आगे की दिक्कतों को रोका जा सकता है।
लगातार सूखापन लंबे समय से बढ़े Vata का संकेत हो सकता है। इसके साथ गैस, कब्ज, थकान या बेचैनी भी महसूस हो सकती है। इन सबकी जड़ एक ही हो सकती है।
एक्सपर्ट की सलाह क्यों है जरूरी
न्यूट्रिशनिस्ट श्वेता शाह के अनुसार, फटे होंठों का इलाज बाहर से नहीं बल्कि अंदर से करना चाहिए। सही digestion और Vata संतुलन से ही असली healing होती है। lip balm केवल सहारा देता है, समाधान नहीं।
अगर समस्या लंबे समय तक बनी रहे, तो एक्सपर्ट से सलाह लेना जरूरी है। हर व्यक्ति की शारीरिक प्रकृति अलग होती है। उसी के अनुसार सलाह सबसे प्रभावी होती है।
सर्दियों में सेहत की शुरुआत अंदर से
सर्दियों में फटे होंठों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह केवल मौसम का असर नहीं, बल्कि शरीर के भीतर चल रहे बदलावों का संकेत हो सकता है। आयुर्वेद इस समस्या को गहराई से समझने का नजरिया देता है।
सही भोजन, संतुलित दिनचर्या और digestion पर ध्यान देकर इस परेशानी से राहत पाई जा सकती है। जब अंदर से संतुलन बनता है, तो होंठ भी अपनी प्राकृतिक नमी वापस पा लेते हैं।
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