Home Videos Khabron Ki Khabar सारागढ़ी को आज भी है इतिहास से इंसाफ की उम्मीद

सारागढ़ी को आज भी है इतिहास से इंसाफ की उम्मीद

सारागढ़ी, भारतीय जांबाजों की बेमिशाल रणकौशल का प्रतीक। सारागढ़ी, हौसले की बेजोड़ मिशाल और सारागढ़ी, यानी तादाद पर भारी पड़ते इच्छाशक्ति की अद्भूत कारस्तानी। बावजूद इसके इस सारागढ़ी को इतिहास से इंसाफ क्यों नहीं मिला? हकीकत की बुनियाद पर आधारित यह कहानी है, 12 सितंबर 1897 की। यह दुनिया की सबसे खतरनाक युद्ध में आज भी शूमार है। ब्रिटेन में आज भी प्रत्येक वर्ष 12 सितंबर को सारागढ़ी दिवस के रुप में याद किया जाता है। किंतु, हम भारतीय, सारागढ़ी से अंजान है। दरअसल, क्या है सारागढ़ी की कहानी? देखिए, इस रिपोर्ट में…


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कौशलेन्द्र झा, KKN Live की संपादकीय टीम का नेतृत्व करते हैं और हिन्दुस्तान (हिन्दी दैनिक) में नियमित रूप से लेखन करते हैं। बिहार विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त करने के बाद उन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन दशकों से अधिक का अनुभव अर्जित किया है। वे प्रातःकमल और ईटीवी बिहार-झारखंड सहित कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों से जुड़े रहे हैं। सामाजिक सरोकारों में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही है—वे अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संघ (भारत) के बिहार प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं और “मानवाधिकार मीडिया रत्न” सम्मान से सम्मानित किए गए हैं। पत्रकारिता में उनकी गहरी समझ और सामाजिक अनुभव उनकी विश्लेषणात्मक लेखन शैली को विशिष्ट बनाते हैं

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