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बिहार में एक और फर्जीवाड़ा

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रेलवे में 51 फर्जी लोगों की हुई नियुक्ति

बिहार। बिहार में सृजन घोटाला और टॉपर्स घोटाले की आग अभी ठंढ़ा भी नही हुआ था कि एक बार फिर से रेलवे नौकरी घोटाला सामने आ गया है। एक रेलकर्मी ने पूरे डिपार्टमेंट को अंधेरे में रखकर 42 लोगों की फर्जा भर्ती कर दी। अब विभाग की ओर से मामले की लीपापोती की जा रही है।
मामला साल 1993 का है। जब सोनपुर रेल मंडल में जीएम और डीआरएम के अनुमोदन पर सत्तर लोगों की लिस्ट तैयार कर जोन को भेजी गयी। नियम कानून को ताख पर रखकर पांच लोगों को परिचालन विभाग में बहाल कर दिया गया।
सफाईकर्मी के पद पर 70 लोगों की आवश्यकता थी जीएमआर-डीआरएम के अनुशंसा पर 70 लोगों की लिस्ट तैयार कर मंडल को भेजी गई। पांच लोगों के अवैध तरीके से नियुक्ति करने के बाद 996 में 20 और लोगों की नियुक्ति कर दी गई। सिलसिला यहीं नहीं थमा और 1999 में 49 लोगों के नियुक्ति की गई जिसमें की 31 लोग फर्जी तरीके से बहाल हो गये।

दूसरी ओर कई लोगो की पैनल में नाम होने के बावजूद नियुक्ति नहीं हुई। मदन प्रसाद ने दिसंबर 2001 को कैट में मामला दर्ज कराया। 9 सितंबर 2005 को कैट ने आवेदक के पक्ष में फैसला देते हुए अपने डॉक्युमेंट्स ऑफिस में जमा कराने को कहा। 25 अक्टूबर 2005, 17 नवंबर 2005 और 26 फरवरी 2006 को सीनियर डीपीओ और दोनों डीआरएम के यहां डॉक्युमेंट्स जमा कराया गया। तीनों आवेदनों पर आवेदक के पक्ष में ही आदेश हुए। लेकिन विधि विभाग ने कैट में सूचना दी कि मदन ने कागजात नहीं जमा कराए। न्याय नहीं मिलने पर मदन ने हाईकोर्ट में मामला दर्ज करवा दिया है।

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