होमNational“जब सिंदूर बारूद बन जाता है तो दुनिया देखती है क्या होता...

“जब सिंदूर बारूद बन जाता है तो दुनिया देखती है क्या होता है” — बीकानेर में बोले पीएम मोदी

Published on

KKN गुरुग्राम डेस्क | बीकानेर (राजस्थान): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजस्थान के बीकानेर में एक बड़ी जनसभा को संबोधित करते हुए देश की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति और पाकिस्तान पर कड़े रुख को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में भारत ने केवल 22 मिनट में पाकिस्तान और पीओके में मौजूद 9 बड़े आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने सेनाओं को पूरी छूट दी है और हमारे जवानों ने मिलकर ऐसा रणनीतिक चक्रव्यूह रचा कि पाकिस्तान को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया।

 “जब सिंदूर बारूद बन जाता है…”

प्रधानमंत्री मोदी का सबसे चर्चित बयान रहा:

“दुनिया ने देख लिया कि जब सिंदूर बारूद बन जाता है, तो क्या होता है।”

यह बयान जनता के बीच जोश भरने वाला था और सोशल मीडिया पर भी यह #SindoorToBarood ट्रेंड करने लगा। इस बयान में उन्होंने भारतीय परंपरा और ताकत को जोड़ते हुए एक सांस्कृतिक और सैन्य संदेश दिया।

22 मिनट में तबाह किए गए 9 आतंकी अड्डे

पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने आतंकी हमले का जवाब देने में देरी नहीं की और 22 मिनट की कार्रवाई में 9 बड़े आतंकी ठिकानों को खत्म कर दिया गया। यह हमला पूरी तरह सटीकआधुनिक हथियारों और इंटेलिजेंस आधारित ऑपरेशन पर आधारित था।

“हमने 22 अप्रैल को हमला झेला और 22 मिनट में दुश्मन को सबक सिखा दिया,” – पीएम मोदी

यह जवाब ऑपरेशन सिंदूर के नाम से चर्चित हो रहा है और इसे भारत की नई सैन्य नीति का उदाहरण माना जा रहा है।

सेना को मिली पूरी छूट

प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने सेना को नीतिगत और संचालनात्मक छूट दी है। अब सेना को निर्णय लेने के लिए राजनीतिक हरी झंडी का इंतजार नहीं करना पड़ता। यही कारण है कि आज भारतीय सेना त्वरित निर्णय लेकर सफल ऑपरेशन कर रही है।

“हमारी तीनों सेनाओं ने मिलकर पाकिस्तान के आतंकवाद को ऐसा जवाब दिया है कि उन्हें संभलने का मौका तक नहीं मिला।”

 बीकानेर से संदेश क्यों?

बीकानेर राजस्थान का सीमा क्षेत्र है और पाकिस्तान सीमा से सटा हुआ जिला है। यहां से इस तरह का राष्ट्रीय सुरक्षा पर आधारित भाषण देना रणनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है। यह न केवल सीमा पर रहने वाले नागरिकों को भरोसा देने का काम करता है, बल्कि राजनीतिक संदेश भी देता है कि सरकार आतंकी खतरे को हल्के में नहीं ले रही।

 22 अप्रैल का हमला: पृष्ठभूमि

22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 26 हिंदू नागरिकों की हत्या कर दी गई थी। हमले को धार्मिक आधार पर लक्षित हत्या माना गया और भारतीय खुफिया एजेंसियों ने इसके पीछे पाकिस्तान समर्थित आतंकियों का हाथ बताया।

इसके बाद भारत सरकार और विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने साफ कर दिया कि अब आतंकी ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई होगी, चाहे वो पाकिस्तान में कहीं भी हों।

सामरिक प्रभाव

भारत की इस त्वरित कार्रवाई से कई अहम सामरिक संदेश गए:

  • पाकिस्तान के आतंकी ढांचे को भारी नुकसान

  • भारत की इंटेलिजेंस और सैन्य समन्वय क्षमता का प्रदर्शन

  • रणनीतिक संयम के साथ आक्रामक नीति

  • सीमावर्ती क्षेत्रों में सेना का मनोबल उच्च

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की यह रणनीति अब “सख्त जवाब, सीमित समय में” की नीति पर केंद्रित है।

भारत-पाक संबंधों पर असर

इस कार्रवाई के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध और बिगड़ गए हैं। पाकिस्तान की तरफ से अभी तक आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सीमावर्ती क्षेत्रों में सैन्य सतर्कता बढ़ा दी गई है। विश्लेषकों का मानना है कि भारत ने अब नियमों को बदल दिया है, और अब आतंकवाद का जवाब सीधा और सटीक होगा।

 जन प्रतिक्रिया और सोशल मीडिया पर हलचल

प्रधानमंत्री के “सिंदूर बारूद बन गया” वाले बयान ने सोशल मीडिया पर नई चर्चा शुरू कर दी। Twitter/X, Instagram और Facebook पर लोग इस बयान को देशभक्ति का प्रतीक मानते हुए शेयर कर रहे हैं।

प्रमुख ट्रेंडिंग हैशटैग्स:

  • #SindoorToBarood

  • #ModiInBikaner

  • #IndiaStrikesBack

  • #OperationSindoor

एक यूज़र ने लिखा:

“अब देश चुप नहीं बैठता। आतंकवाद का जवाब आतंकवाद से नहीं, ताकत से मिलता है।”

 राजनीतिक दृष्टिकोण और 2025 का चुनावी प्रभाव

पीएम मोदी का यह भाषण आगामी लोकसभा चुनाव 2025 से पहले राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे को प्रमुखता देने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इससे पहले भी, 2016 के सर्जिकल स्ट्राइक और 2019 के बालाकोट एयरस्ट्राइक को चुनावी मुद्दा बनाया गया था।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह भाषण खासतौर से युवा, सैनिक परिवारों और मध्य वर्ग को प्रभावित करेगा।

Read this article in

KKN लाइव WhatsApp पर भी उपलब्ध है, खबरों की खबर के लिए यहां क्लिक करके आप हमारे चैनल को सब्सक्राइब कर सकते हैं।

KKN Public Correspondent Initiative


Discover more from

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Latest articles

बांकीपुर: कैसे टूटा भाजपा का अभेद्य किला, क्यों बना प्रशांत किशोर बिहार की राजनीति का नया केंद्र?

KKN ब्यूरो। बिहार की राजनीति में कई चुनाव हुए, कई सरकारें बनीं और बदलीं।...

बांकीपुर का उपचुनाव: एक सीट की लड़ाई या बिहार की राजनीति का टर्निंग पॉइंट?

एक सीट... लेकिन पूरे बिहार की निगाहें क्यों? KKN ब्यूरो। भारतीय लोकतंत्र में कुछ चुनाव...

बिहार में भूमि सर्वेक्षण और भूमाफिया का कॉकटेल?

क्या रिकॉर्ड सुधार की मुहिम में सेंध लगा रहे हैं फर्जी दावेदार KKN ब्यूरो। जमीन...

बिहार की सड़कें समय से पहले क्यों टूट जाती हैं?

जब सड़क टूटती है, तो केवल डगर नहीं बिखरता... KKN ब्यूरो। बारिश की पहली फुहार...

More like this

पेपर लीक का काला कारोबार: किसने चुराए करोड़ों युवाओं के सपने, कौन है इस संगठित अपराध का असली सरगना? (भाग–2)

क्या पेपर लीक केवल आज की समस्या है? KKN ब्यूरो। यदि कोई यह मानता...

पेपर लीक का काला कारोबार: किसने चुराए करोड़ों युवाओं के सपने, कौन है इस संगठित अपराध का असली सरगना?

जब प्रश्नपत्र नहीं, भविष्य लीक होने लगे... KKN ब्यूरो। किसी राष्ट्र का भविष्य उसकी सीमाओं...

मामुली बारिश… और अंधेरे में डूब जाता है बिहार का गांव

ट्री कटिंग पर हर साल करोड़ों के टेंडर, फिर भी पेड़ की टहनी से...

भारतीय शिक्षा व्यवस्था के बारे में चौकाने वाला खुलाशा, क्या हर गांव में था स्कूल?

आज भी उपलब्ध है थॉमस मुनरो और विलियम एडम की रिपोर्ट KKN ब्यूरो। ब्रिटिश शासन...

कोल्ड ड्रिंक: ताजगी या धीमा ज़हर? क्या कहती है वैज्ञानिक रिसर्च?

KKN ब्यूरो। गर्मी हो, पार्टी हो या सफर, कोल्ड ड्रिंक आज हमारी जीवनशैली का...

ग्रामीण सड़कों के ‘जानलेवा’ स्पीड ब्रेकर: सुरक्षा के नाम पर जनता की जेब और सेहत पर हमला?

KKN ब्यूरो। ग्रामीण भारत में पक्की सड़कों का जाल तेजी से बिछा है। प्रधानमंत्री...

बिहार में शराबबंदी: सामाजिक सुधार या भ्रष्टाचार की नई अर्थव्यवस्था?

क्या शराबबंदी सफल हुई या उसने भ्रष्टाचार को नया ईंधन दिया? KKN ब्यूरो। एक  अप्रैल...

दल-बदल की राजनीति पर लगाम कब?

लोकतंत्र का सबसे बड़ा सवाल: विचारधारा बड़ी या सत्ता? कौशलेन्द्र झा KKN ब्यूरो। भारतीय राजनीति में...

श्रेष्ठता का भ्रम: जब गाली, दोषारोपण और अपमान बन जाते हैं सामाजिक फैशन

क्या दूसरों को नीचा दिखाकर कोई वास्तव में बड़ा बन सकता है? KKN ब्यूरो। आज...

भारत का भविष्य: कौन-कौन से खतरे दरवाजे पर खड़े हैं? और क्या भारत तैयार है?

KKN ब्यूरो। भारत 21वीं सदी की सबसे तेज़ी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।...

हिन्दी पत्रकारिता: मिशन से बाज़ार तक का सफर

क्या हिन्दी पत्रकारिता आज भी जनता की आवाज़ है? हिन्दी पत्रकारिता दिवस विशेष KKN ब्यूरो। क्या...

“हाँ इश्क है” के लोकार्पण समारोह में जुटे कवि और साहित्य प्रेमी, पटना में दिखा साहित्य का रंग

पटना में रविवार को साहित्य, कविता और रचनात्मक अभिव्यक्ति का एक यादगार आयोजन देखने...
00:07:59

कर्ज में डूबे राज्य, फिर भी मुफ्त योजनाएं क्यों?

क्या आपने कभी सोचा है कि चुनाव आते ही अचानक मुफ्त योजनाओं की बाढ़...

मिडिल ईस्ट: महायुद्ध की दहलीज़ पर विभाजन और तड़पता हुआ क्षेत्र

KKN ब्यूरो। संयुक्त रूप से अमेरिका और इज़रायल ने अपने सबसे बड़े सैन्य अभियान...

मिट्टी की खुशबू से मोबाइल की रिंगटोन तक: पांच दशक में बदलता ग्रामीण समाज

जब शाम ढलती थी और पूरा गांव एक आंगन में सिमट आता था KKN ब्यूरो।...