बिहार की राजधानी पटना के सदाकत आश्रम में आज कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक शुरू हो गई है। यह बैठक कई मायनों में ऐतिहासिक है क्योंकि आज़ादी के बाद पहली बार बिहार में Congress Working Committee Meeting हो रही है। इस अहम मौके पर राहुल गांधी अध्यक्षता कर रहे हैं।
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बैठक का आयोजन ऐसे समय में हो रहा है जब चुनावी वर्ष की तैयारियां तेज़ हैं। यही कारण है कि यह मीटिंग कांग्रेस के लिए रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
बैठक में मौजूद दिग्गज नेता
इस CWC Meeting Patna में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद हैं। हालांकि पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी बैठक में शामिल नहीं हुई हैं।
बैठक में उन राज्यों के मुख्यमंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष और कई पूर्व केंद्रीय मंत्री भी उपस्थित हैं जहां कांग्रेस की सरकार है। इतनी बड़ी संख्या में दिग्गज नेताओं की मौजूदगी बैठक के महत्व को और बढ़ा रही है।
चुनावी वर्ष में अहम फैसलों की उम्मीद
कांग्रेस वर्किंग कमेटी की यह बैठक चुनावी दृष्टि से बेहद अहम मानी जा रही है। माना जा रहा है कि बैठक में बिहार से जुड़े मुद्दों पर बड़े फैसले लिए जा सकते हैं।
इनमें शिक्षा, बेरोजगारी, पलायन और महिलाओं के लिए नई योजनाओं पर चर्चा प्रमुख रहेगी। बैठक के बाद कांग्रेस की ओर से एक विशेष घोषणा पत्र जारी किया जाएगा। इस दौरान महागठबंधन के अन्य दलों के नेता जैसे तेजस्वी यादव और मुकेश साहनी भी मौजूद रहेंगे।
कांग्रेस नेताओं के बयान
बैठक से पहले कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने कहा कि मुख्यमंत्री पद के चेहरे पर फैसला चुनाव जीतने के बाद ही किया जाएगा। वहीं कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने इस बैठक को लोकतंत्र बचाने की दिशा में अहम कदम बताया।
खेड़ा ने कहा कि इस बैठक में लंबी चर्चा होगी और अंत में प्रस्ताव पारित किए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस अपने जनाधार को वापस लाने की कोशिश कर रही है।
राजनीतिक परिस्थितियों पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि राजनीति में ऊपर वाला नीचे आता है और नीचे वाला ऊपर जाता है। जब तेजस्वी यादव को सीएम फेस घोषित करने पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने जवाब दिया कि सूरज को बताने की ज़रूरत नहीं होती कि वह किस दिशा से निकलेगा।
कांग्रेस का संदेश
कांग्रेस इस बैठक के ज़रिए यह संदेश देना चाहती है कि आगामी Bihar Politics में वह केंद्र में खुद को स्थापित करने के लिए गंभीर है।
पार्टी का मकसद कार्यकर्ताओं में उत्साह और जोश भरना है। कांग्रेस चाहती है कि बिहार चुनाव से पहले संगठन में नई ऊर्जा का संचार हो।
तेलंगाना के मुख्यमंत्री पर भी नज़र
इस बैठक में तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी पर भी विशेष ध्यान है। दरअसल, दिसंबर 2023 में उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री केसीआर पर हमला करते हुए कहा था कि उनका डीएनए तेलंगाना का है जबकि केसीआर का डीएनए बिहार से जुड़ा है। उन्होंने यह भी दावा किया था कि केसीआर की जाति कुरमी है जिसकी जड़ें बिहार में हैं।
यह बयान बिहारियों के लिए अपमानजनक माना गया था और उस समय बड़ा विवाद भी खड़ा हुआ था। ऐसे में अब रेवंत रेड्डी की मौजूदगी इस बैठक को और दिलचस्प बना रही है।
बिहार में CWC बैठक का महत्व
पटना में Congress Working Committee Meeting आयोजित करने का निर्णय प्रतीकात्मक ही नहीं बल्कि रणनीतिक भी है। बिहार ने हमेशा देश की राजनीति को दिशा दी है, लेकिन पिछले वर्षों में कांग्रेस का जनाधार यहां कमजोर हुआ है।
इस बैठक के ज़रिए पार्टी यह संकेत देना चाहती है कि वह बिहार में अपनी जमीन फिर से मजबूत करने के लिए गंभीर है। यह कदम महागठबंधन के सहयोगियों को भी संदेश देता है कि कांग्रेस बिहार चुनाव में सक्रिय और केंद्र में रहने की तैयारी कर रही है।
कांग्रेस के सामने चुनौतियाँ
हालांकि बैठक आत्मविश्वास का संदेश देती है लेकिन कांग्रेस के सामने बिहार में कई चुनौतियाँ हैं। संगठनात्मक मजबूती घट गई है और राजनीतिक मैदान में आरजेडी, जदयू और भाजपा जैसी पार्टियों ने जगह बना ली है।
बेरोजगारी, शिक्षा और पलायन जैसी समस्याएँ अब भी बिहार की सबसे बड़ी चुनौतियाँ हैं। ऐसे में कांग्रेस को ठोस समाधान प्रस्तुत करने होंगे ताकि जनता का विश्वास जीता जा सके।
महागठबंधन की भूमिका
बैठक में तेजस्वी यादव और मुकेश साहनी जैसे नेताओं की मौजूदगी महागठबंधन की अहमियत को दर्शाती है। कांग्रेस इस गठबंधन की सहयोगी है लेकिन उसे अपनी भूमिका भी स्पष्ट करनी होगी।
चुनाव से पहले सीट बंटवारे और नेतृत्व को लेकर भी चर्चा हो सकती है। महागठबंधन की रणनीति इस बैठक से और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
राष्ट्रीय राजनीति से जुड़ा संदेश
यह बैठक केवल बिहार तक सीमित नहीं है बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी इसका महत्व है। कांग्रेस चाहती है कि वह देशभर में खुद को विकल्प के रूप में प्रस्तुत करे। बिहार जैसे राज्यों में संगठन को मज़बूत करना इस योजना का हिस्सा है।
यह बैठक कांग्रेस की राष्ट्रीय रणनीति को नया आयाम दे सकती है और आने वाले लोकसभा चुनावों के लिए दिशा तय कर सकती है।
राहुल गांधी की भूमिका
राहुल गांधी की अध्यक्षता में हो रही यह बैठक कांग्रेस के अंदर उनकी भूमिका को और मज़बूत बनाती है। उनकी मौजूदगी और भाषण पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा का काम करेंगे।
कांग्रेस इस बैठक को युवा नेतृत्व और परंपरागत राजनीतिक ताकत के मेल के रूप में देख रही है। राहुल गांधी का नेतृत्व पार्टी के पुनर्निर्माण की कोशिशों का हिस्सा है।
पटना में आयोजित Congress Working Committee Meeting कांग्रेस के लिए ऐतिहासिक और रणनीतिक दोनों ही दृष्टियों से अहम है। आज़ादी के बाद पहली बार बिहार में हो रही यह बैठक चुनावी वर्ष में नई दिशा तय करने का काम करेगी।
बैठक से निकलने वाले प्रस्ताव और घोषणा पत्र बताएँगे कि कांग्रेस आने वाले महीनों में किन मुद्दों पर जनता का विश्वास जीतने का प्रयास करेगी।
यह बैठक न केवल बिहार बल्कि पूरे देश में यह संदेश देने के लिए है कि कांग्रेस अपने जनाधार को वापस लाने और Congress Election Strategy के तहत खुद को मज़बूत करने के लिए पूरी तरह तैयार है।



