रविवार, फ़रवरी 22, 2026 1:19 अपराह्न IST
होमPoliticsतेलंगाना में उलझ सकता है सियासी समीकरण का गणित, जानिए कैसे

तेलंगाना में उलझ सकता है सियासी समीकरण का गणित, जानिए कैसे

Published on

नवगठित राज्य तेलंगाना 7 दिसंबर को विधानसभा के लिए मतदान करने जा रहा है। मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने समय से आठ महीने पहले ही इसे भंग कर दिया था। वह इस चुनाव को स्थानीय मुद्दों पर केंद्रित करके आसान जीत हासिल कर लेना चाहते थे।

महाकुटुंबी महागठबंधन

लेकिन अचानक ही मुकाबले में विपक्षी पार्टियों का महागठबंधन ‘महाकुटुंबी’ आ गया है। इस महागठबंधन का नेतृत्व कांग्रेस कर रही है। कभी कॉग्रेस के कट्टर विरोधी रही टीडीपी भी अब साथ आ गई है। वाम पार्टियां और कोडंदरम द्वारा बनाई गई तेलंगाना जन समिति के इस संयुक्त मोर्चा में शामिल हो जाने से केसीआर की मुश्किलें बढ़ती हुई दिखाई पड़ने लगी हैं।

केसीआर के दांव

कर्नाटक में भाजपा को सत्ता से बाहर रखने के लिए चुनाव बाद जिस तरह कांग्रेस और जद (एस) की गठबंधन की सरकार बनी। इसी से प्रेरित होकर चंद्रबाबू नायडू ने तेलंगाना में भी कॉग्रेस के साथ गठबंधन बना लिया है। जिसके बारे कुछ रोज पहले तक कोई सोच भी नहीं सकता था। बतातें चलें कि नायडू की टीडीपी की स्थापना 1980 के दशक में उनके ससुर एनटी रामा राव ने की थी। इसका मुख्य उद्देश्य कांग्रेस को सबक सिखाना था। मगर अब करीब चार दशक के बाद नायडू, केसीआर को हराने के लिए उसी कांग्रेस से हाथ मिला चुके हैं।

राजनीतिक आधार

वेशक, तेलंगाना के गठन के बाद मुख्यमत्री केसीआर ने अपने सरप्लस बजट के साथ लोक-कल्याण के कई कार्यक्रम शुरू किए और अपना राजनीतिक आधार को मजबूत भी बनाया। वास्तव में केसीआर को यह उम्मीद थी कि वह भाजपा और कांग्रेस को दूर रखते हुए एक फेडरल फ्रंट का नेतृत्व करेंगे। मगर केंद्र से आंध्र प्रदेश के लिए विशेष राज्य का दर्जा पाने में विफल रहने वाले नायडू ने एनडीए से नाता तोड़ लिया। अब वह विपक्षी एकता की बात कर रहे हैं, जिसमें कांग्रेस भी शामिल है।

सियासी आकलन

पहली नजर में तो यही लगता है कि कांग्रेस और टीडीपी के साथ आने से विधानसभा चुनावों में उनके वोट बढ़ने चाहिए। मगर चूंकि राजनीति कोई अंकगणित नहीं है। लिहाजा, आलोचकों का कहना है कि यह समझौता कांग्रेस को नुकसान पहुंचा सकता है। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि टीआरएस और भाजपा दोनों के लिए नायडू सियासी दुश्मन हैं। टीआरएस नेताओं का तो यह भी कहना है कि आखिर वह पार्टी यानी टीडीपी कैसे वोट मांग सकती है, जो खुलकर यहां के विकास का विरोध करती रही हो? कांग्रेस ने इसका कोई मुखर जवाब अभी तक नहीं दिया है।

तेलंगाना में मुस्लिम वोट

बतातें चलें कि केसीआर ने असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम के साथ गठबंधन किया हुआ है। जबकि भाजपा के साथ चुनाव बाद गठबंधन का विकल्प खुला रखा गया है। भाजपा ने भी यही घोषणा की है कि वह अकेली चुनाव में उतरेगी। मगर, संसदीय चुनावों का सामना करने के लिए भाजपा को टीआरएस जैसे क्षेत्रीय दलों की जरूरत है। देखा जाए, तो तेलंगाना का चुनाव दो विचारों की जंग है। पहले के खेवनहार क्षेत्रीय विकास के साथ केसीआर हैं। दूसरा है महागठबंधन, जो केंद्र में कांग्रेस की वापसी करा सकता है।

केसीआर को मिल सकती हे लीड

बहरहाल, अभी केसीआर लीड लेते दिख रहे हैं। कांग्रेस अब भी राज्य में अपने पैर जमाने की कोशिश कर रही है। वह सत्ता-विरोधी रुझान और गठबंधन की ताकत में ही अपने लिए उम्मीद देख सकती है। केसीआर ने बड़ी चालाकी से समय-पूर्व चुनाव का दांव खेलकर कांग्रेस और भाजपा, दोनों से यह मौका छीन लिया है कि वे चुनावी जंग को राष्ट्रीय मुकाम पर ले जाएं। हालांकि केसीआर की पहली चुनौती यही होगी कि वह एक बार फिर उत्तरी तेलंगाना में फतह करें।

KKN लाइव WhatsApp पर भी उपलब्ध है, खबरों की खबर के लिए यहां क्लिक करके आप हमारे चैनल को सब्सक्राइब कर सकते हैं।

KKN Public Correspondent Initiative

Latest articles

47 साल बाद साथ आए रजनीकांत और कमल हासन, नए फिल्म प्रोमो ने बढ़ाई उत्सुकता

भारतीय सिनेमा के दो दिग्गज—राजनीकांत और कमल हासन एक बार फिर साथ नज़र आने...

Everything Apple Sale में बड़ी छूट: iPhone 17 रुपये 45,000 से कम में उपलब्ध

रिटेल चेन Croma ने अपनी ‘Everything Apple Sale’ के तहत iPhone मॉडल्स पर भारी...

Siliguri Corridor क्या कर रहा है चीन-बांग्लादेश साजिश का कैसे हुआ खुलाशा

क्या आप जानते हैं कि भारत का एक 20 किलोमीटर चौड़ा इलाका देश के...

India-US Trade Deal से खतरे में MSP? | किसानों की नई चिंता का पूरा सच

देश में खामोशी है… लेकिन खेतों में बेचैनी। भारत-अमेरिका के नए ट्रेड फ्रेमवर्क के...

More like this

बिहार विधानसभा चुनाव के बाद सक्रिय हुए प्रशांत किशोर, 8 फरवरी से शुरू करेंगे बिहार यात्रा

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में करारी हार के बाद जन सुराज पार्टी के नेता...

झपहां बने मुजफ्फरपुर का पूर्वी अनुमंडल?

मुख्यमंत्री की समृद्धि यात्रा में उठी मांग, विधायक अजय कुमार की मांग के मायने...

बाजार समिति कार्यक्रम में महिलाओं के स्टॉल पर सबसे अधिक समय बिताया मुख्यमंत्री ने

बाजार समिति परिसर में शुक्रवार को आयोजित कार्यक्रम के दौरान मौजूद सभी महिलाएं चाह...

आज मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे

बिहार की राजनीति में नई सरकार के गठन के बाद एक महत्वपूर्ण हलचल देखने...

पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल का 91 वर्ष की आयु में निधन

केंद्रीय गृह मंत्री रहे शिवराज पाटिल का 91 वर्ष की आयु में निधन हो...

बिहार पंचायत चुनाव 2026: ईवीएम से मतदान और आरक्षण में बदलाव की तैयारी

बिहार में 2026 में होने वाले पंचायत चुनावों को लेकर तैयारियां तेज हो गई...

बिहार विधानसभा शीतकालीन सत्र : चौथे दिन की कार्यवाही और महत्वपूर्ण घटनाएँ

बिहार विधानसभा का शीतकालीन सत्र आज अपने चौथे दिन में प्रवेश कर चुका है।...

बिहार विधानसभा ‘मिथिलामय’ हो गई, 14 विधायकों ने मैथिली में शपथ ली

18वीं बिहार विधानसभा के शीतकालीन सत्र का उद्घाटन सोमवार को बिहार की सांस्कृतिक विविधता...

कांग्रेस की हार पर मंथन के बीच दिल्ली रवाना हुए तेजस्वी यादव

बिहार के महागठबंधन (ग्रैंड अलायंस) को हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में करारी...

कंगना रनौत का बयान : पीएम मोदी के नेतृत्व में सनातन धर्म और राष्ट्र की गरिमा का उभार

हिमाचल प्रदेश की मंडी सीट से भाजपा सांसद और फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत ने...

प्रशांत किशोर ने जन सुराज पार्टी की हार पर तोड़ी चुप्पी, कहा- ‘लालू के जंगलराज का डर’

बिहार विधानसभा चुनाव में अपनी नवगठित पार्टी जन सुराज की करारी हार के बाद,...

प्रशांत किशोर का बड़ा ऐलान : जन सुराज के लिए अपनी सारी संपत्ति दान की

जन सुराज पार्टी (जेएसपी) के नेता प्रशांत किशोर ने एक महत्वपूर्ण घोषणा की है।...

शपथ ग्रहण समारोह के बाद तेजस्वी यादव ने ट्विटर पर नीतीश कुमार को बधाई दी

बिहार में 20 नवम्बर 2025 को एक ऐतिहासिक दिन था, जब नीतीश कुमार ने...

बिहार का नया मंत्रिमंडल : रिकॉर्ड महिला मतदान के बावजूद महिलाओं का प्रतिनिधित्व सिर्फ़ 11%

नीतीश कुमार ने बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में 10वीं बार शपथ ली है।...

नीतीश कुमार ने दसवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, एनडीए ने बनाई नई सरकार

20 नवम्बर 2025 को बिहार के इतिहास में एक ऐतिहासिक पल आया जब नीतीश...