दिल्ली सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया है, जिसके तहत छठ पूजा के लिए 1.5 दिन का सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है। इस वर्ष पहली बार, दिल्ली के निवासी जो छठ पूजा मनाते हैं, विशेष रूप से बिहार और उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्सों से आने वाले लोग, उन्हें एक विस्तारित अवकाश मिलेगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने यह घोषणा की कि 27 अक्टूबर 2025 को दोपहर 2 बजे के बाद सरकारी कार्यालय बंद कर दिए जाएंगे और 28 अक्टूबर को पूरी तरह से छुट्टी रहेगी। यह फैसला पिछले वर्षों के एक दिन की छुट्टी देने की परंपरा से एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे त्योहार को शहरभर में और भी महत्व दिया गया है।
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छठ पूजा: पूर्वांचली समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण त्योहार
छठ पूजा, बिहार और उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्सों के लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव है। यह त्योहार सूर्य देवता को धन्यवाद देने और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए मनाया जाता है। दिल्ली में बढ़ते हुए पूर्वांचली प्रवासियों के बीच इस त्योहार की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। सरकार द्वारा एक और आधे दिन का अवकाश देने का निर्णय इस समुदाय के प्रति एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
बिहार चुनाव के मद्देनजर राजनीतिक दृष्टिकोण
यह घोषणा राजनीतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, खासकर आगामी बिहार विधानसभा चुनावों को देखते हुए। दिल्ली में अनुमानित 5 लाख पूर्वांचली मतदाता हैं, जिनमें से कई लोग चुनावों में भाग लेने के लिए अपने गृह राज्य बिहार लौटते हैं। ऐसे में, छठ पूजा जैसे एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक आयोजन के दौरान इस समुदाय के साथ जुड़ना राजनीतिक दृष्टिकोण से एक रणनीतिक कदम है। यह कदम दिल्ली सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण वोट बैंक को आकर्षित करने का अवसर प्रस्तुत करता है।
दिल्ली में छठ पूजा की तैयारियों का विस्तार
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने यह स्पष्ट किया कि इस वर्ष छठ पूजा को दीवाली की तरह ही धूमधाम से मनाया जाएगा, जिससे यह सरकार की प्रतिबद्धता को दिखाता है कि वे इस महत्वपूर्ण त्योहार का सम्मान करते हैं। सरकार ने इस वर्ष छठ पूजा के आयोजन के लिए कई बड़े उपाय किए हैं।
दिल्ली सरकार ने 17 प्रमुख स्थानों पर यमुनाजी के किनारे मॉडल छठ घाटों का निर्माण किया है। इनमें से कुछ घाट पल्ला से कालिंदी कुंज तक कई किलोमीटर तक फैले हुए हैं। यह प्रयास श्रद्धालुओं को अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक स्थानों पर पूजा करने का अवसर प्रदान करने के लिए किया गया है।
छठ घाटों की संख्या में वृद्धि
इस वर्ष छठ पूजा के आयोजनों के लिए 1,000 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, जो पिछले साल के 929 आवेदनों से काफी अधिक हैं। इस बढ़ती मांग को देखते हुए, सरकार ने हर जिले में कम से कम एक मॉडल छठ घाट बनाने का वचन दिया है। यह कदम श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, ताकि उन्हें एक अच्छा और सुरक्षित स्थान मिल सके।
त्यौहार के लिए व्यापक तैयारियाँ
दिल्ली सरकार छठ पूजा के लिए सिर्फ घाटों के निर्माण तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अन्य कई व्यापक तैयारियां भी की जा रही हैं। इसमें स्वागत द्वारों की स्थापना, सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन, सफाई अभियान, और सुरक्षा उपायों को मजबूत करना शामिल है। इन सभी उपायों से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि इस पूजा के दौरान श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कई घाटों का निरीक्षण भी किया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी तैयारियाँ सही तरीके से हो रही हैं और श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार किया गया है।
छठ पूजा से जुड़ी पुरानी शिकायतों का समाधान
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस घोषणा में एक महत्वपूर्ण पहलू पर ध्यान दिया, और वह था छठ पूजा से जुड़ी पुरानी शिकायतों का समाधान। उन्होंने विशेष रूप से 2021 में यमुनाघाटों पर छठ पूजा पर लगाए गए प्रतिबंध और उस दौरान भक्तों के खिलाफ दर्ज किए गए मामलों का उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री ने यह वचन लिया कि उनकी सरकार उन सभी मामलों को वापस लेगी, जो पिछले प्रशासन के दौरान भक्तों के खिलाफ दर्ज किए गए थे। मंत्री कपिल मिश्रा ने भी इस बात की पुष्टि की कि सभी एफआईआर रद्द किए जाएंगे। यह कदम सरकार की समावेशिता और धार्मिक स्वतंत्रता के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
चुनावी संदर्भ: वोटरों के साथ जुड़ाव
इस निर्णय के समय और विस्तार को बिहार विधानसभा चुनावों से जोड़कर देखा जा रहा है। दिल्ली में रहने वाले पूर्वांचली समुदाय के वोटों को ध्यान में रखते हुए यह कदम राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह निर्णय दिल्ली सरकार द्वारा पूर्वांचली समुदाय के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने का एक अवसर है, जो दिल्ली में एक प्रभावशाली वोट बैंक के रूप में उभर कर सामने आया है।
छठ पूजा और दिल्ली की सांस्कृतिक विविधता
छठ पूजा का दिल्ली में बढ़ता हुआ महत्व न केवल इस समुदाय के लिए, बल्कि दिल्ली की सांस्कृतिक विविधता के लिए भी महत्वपूर्ण है। यह त्योहार अब शहर के विभिन्न हिस्सों में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है और इसका समाज पर गहरा प्रभाव पड़ता है। सरकार का यह कदम एक संकेत है कि दिल्ली अपनी सांस्कृतिक विविधताओं को न केवल स्वीकार करती है, बल्कि उन्हें बढ़ावा भी देती है।
दिल्ली में छठ पूजा के आयोजनों के लिए सरकार द्वारा किए गए इस प्रकार के इंतजाम इस बात को रेखांकित करते हैं कि दिल्ली सरकार इस पर्व को जितना सम्मान देती है, उतना ही यह सुनिश्चित करना चाहती है कि इस उत्सव के दौरान कोई भी श्रद्धालु परेशान न हो।
दिल्ली सरकार का छठ पूजा के लिए 1.5 दिन का सार्वजनिक अवकाश घोषित करना एक ऐतिहासिक कदम है। यह निर्णय न केवल इस त्योहार के महत्व को बढ़ाता है, बल्कि दिल्ली में पूर्वांचली समुदाय के साथ एक मजबूत संबंध बनाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके साथ ही, सरकार द्वारा किए गए ठोस उपायों से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि छठ पूजा का आयोजन सुरक्षित, समृद्ध और सम्मानजनक रूप से किया जाए। यह कदम दिल्ली की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने के साथ-साथ आगामी चुनावों में दिल्ली सरकार के लिए एक सकारात्मक संदेश भी भेजेगा।
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