गुरुवार की सुबह दिल्लीवालों के लिए बड़ी परेशानी लेकर आई। यमुना नदी का पानी रिंग रोड, आउटर रिंग रोड, कश्मीरी गेट और कालिंदी कुंज जैसे इलाकों तक पहुंच गया, जिससे राजधानी की रफ्तार थम सी गई। जलभराव के कारण जगह-जगह गाड़ियों की लंबी कतारें लग गईं और ऑफिस टाइम पर लोगों को घंटों तक जाम में फंसे रहना पड़ा।
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सुबह से ठप हुई आवाजाही
जैसे ही लोग सुबह दफ्तरों और स्कूलों की ओर निकले, उन्हें सड़कों पर यमुना के पानी का सामना करना पड़ा। कश्मीरी गेट से लेकर कालिंदी कुंज और रिंग रोड पर पानी भरने से गाड़ियों की रफ्तार रेंगने लगी। सोशल मीडिया पर लोगों ने अपने गुस्से का इजहार किया और बताया कि दो किलोमीटर का सफर तय करने में भी घंटों लग गए। कुछ लोगों ने गाड़ियां घर पर ही छोड़ दीं और Delhi Metro का सहारा लिया।
ट्रैफिक पुलिस का एक्शन
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने हालात को संभालने के लिए तुरंत कदम उठाए। अधिकारियों के मुताबिक, यमुना किनारे वाली कई सड़कें पूरी तरह जलमग्न हो गईं। कश्मीरी गेट, कालिंदी कुंज और आउटर रिंग रोड पर भारी जाम को देखते हुए पुलिस ने डायवर्जन लागू किए।
एडवाइजरी में चांदगी राम अखाड़ा से राजघाट जाने वाले लोगों को सिग्नेचर ब्रिज, पुस्ता रोड और राजा राम कोहली मार्ग का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, “हमने वैकल्पिक रास्तों का इंतजाम किया है। लोग कृपया इन्हीं रास्तों का इस्तेमाल करें।”
दिल्ली मेट्रो बनी सहारा
जिन सड़कों पर पानी भर गया, वहां से बचने के लिए लोगों ने Delhi Metro का रुख किया। मेट्रो सेवाएं इस बाढ़ से अछूती रहीं और हजारों यात्रियों के लिए राहत साबित हुईं। कालिंदी कुंज से सफर कर रहे एक यात्री ने बताया, “सड़क पूरी तरह बंद थी, गाड़ियां एक ही लेन पर चल रही थीं। जाम इतना भयानक था कि मेट्रो ही एकमात्र विकल्प बचा।”
PWD का दावा और जनता का विरोध
पीडब्ल्यूडी अधिकारियों ने दावा किया कि सड़कों पर जमा पानी यमुना की बाढ़ का नहीं बल्कि बारिश का है, जो खराब ड्रेनेज सिस्टम की वजह से निकल नहीं पाया। एक अधिकारी ने कहा, “यमुना का बहाव सामान्य है। यह पानी सिर्फ बारिश का है जो निकासी की कमी से जमा हुआ।”
हालांकि, सोशल मीडिया पर लोगों ने इस दावे को खारिज करते हुए वीडियो शेयर किए। इन वीडियो में यमुना का पानी मुद्रिका मार्ग पर मजनू का टीला, चांदगी राम अखाड़ा और निगम बोध घाट तक बहता नजर आया। एक यूजर ने लिखा, “ये सिर्फ बारिश नहीं, यमुना का तांडव है। घंटों से जाम में फंसे हैं और गाड़ियां इंच-इंच खिसक रही हैं।”
पड़ोसी इलाकों पर असर
जलभराव का असर केवल मुख्य सड़कों तक सीमित नहीं रहा। वजीराबाद, आईएसबीटी, सराय काले खां और आश्रम की ओर जाने वाली सड़कों पर भी भारी जाम देखा गया। इससे दिल्ली के अन्य हिस्सों में भी ट्रैफिक का दबाव बढ़ गया और कई इलाकों में आवाजाही पूरी तरह प्रभावित हो गई।
बार-बार उठता ढांचागत सवाल
दिल्ली में हर साल बारिश और यमुना के उफान के दौरान यही हाल देखने को मिलता है। ड्रेनेज सिस्टम की खामियां, अवैध निर्माण और लापरवाही बार-बार उजागर होती हैं। इस बार भी लोगों ने सवाल उठाया कि जब हर साल ऐसी समस्या होती है तो स्थायी समाधान क्यों नहीं निकाला जाता।
गुरुवार को यमुना का पानी दिल्ली की प्रमुख सड़कों पर चढ़ जाने से राजधानी का ट्रैफिक सिस्टम पूरी तरह चरमरा गया। घंटों तक जाम, गाड़ियों की लंबी कतारें और जनता की परेशानी ने एक बार फिर दिल्ली की आधारभूत सुविधाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दिल्ली मेट्रो ने जहां हजारों लोगों को राहत दी, वहीं PWD और प्रशासन की दलीलों पर जनता ने सोशल मीडिया पर नाराजगी जताई। जब तक स्थायी ड्रेनेज समाधान और बाढ़ प्रबंधन की ठोस योजनाएं लागू नहीं होतीं, तब तक दिल्लीवालों को हर साल इस तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।



