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दिल्ली में हवा की गुणवत्ता ‘बेहद खराब’, लोगों को होगी परेशानी

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सोमवार, 3 नवंबर 2025 को दिल्ली में प्रदूषण की स्थिति बेहद गंभीर रही। शहर में धुंध की चादर छाई रही, जिससे वायु गुणवत्ता ‘बेहद खराब’ श्रेणी में बनी रही। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के अनुसार, सोमवार सुबह 6:05 बजे दिल्ली का कुल एयर क्वालिटी इंडेक्स (ए.क्यू.आई.) 324 रिकॉर्ड किया गया, जो कि ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है। इससे पहले रविवार को भी दिल्ली की वायु गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ श्रेणी में रही, जहां ए.क्यू.आई. 366 तक पहुंच गया।

सीपीसीबी के डेटा से यह भी पता चला कि दिल्ली के तीन मॉनिटरिंग स्टेशनों पर ए.क्यू.आई. 400 से ऊपर था, जो कि ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है। इन स्टेशनों में आनंद विहार (371), बवाना (371), बुराड़ी क्रॉसिंग (384), जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम (331), मुंडका (343), नरेला (386), रोहिणी (363) और वज़ीरपुर (389) शामिल हैं।

इसके साथ ही, दिल्ली एनसीआर के अन्य पड़ोसी शहरों जैसे नोएडा (311), गाजियाबाद (334) और गुरुग्राम (304) में भी हवा की गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ रही।

ए.क्यू.आई. के मानक

ए.क्यू.आई. को विभिन्न श्रेणियों में बांटा गया है, ताकि वायु गुणवत्ता का सही मूल्यांकन किया जा सके। ये श्रेणियां इस प्रकार हैं:

  • 0 से 50: “अच्छा”

  • 51 से 100: “संतोषजनक”

  • 101 से 200: “मध्यम”

  • 201 से 300: “खराब”

  • 301 से 400: “बहुत खराब”

  • 401 से 500: “गंभीर”

दिल्ली में इस साल अभी तक किसी भी दिन ए.क्यू.आई. गंभीर श्रेणी में नहीं पहुंचा था, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इस हफ्ते ऐसा हो सकता है। पिछले साल 23 दिसंबर 2024 को ए.क्यू.आई. 406 रिकॉर्ड किया गया था, जो एक गंभीर स्थिति थी।

प्रदूषण के बढ़ने के कारण

दिल्ली की वायु गुणवत्ता में बढ़ोतरी के कई कारण हैं। एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम (AQEWS) के अनुसार, रविवार शाम और रात के समय उत्तर-पश्चिम से हवाओं की गति 8 किमी प्रति घंटे से कम हो गई, जिससे प्रदूषकों का फैलाव कम हो गया। इसका परिणाम यह हुआ कि हवा में धुंआ और धूल के कण जम गए, जिससे सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। विशेषकर उन लोगों को समस्या हो सकती है जिनके फेफड़े या दिल कमजोर हैं, साथ ही बच्चों और बुजुर्गों के लिए भी यह स्थिति खतरनाक हो सकती है। AQEWS ने यह भी कहा कि दिल्ली में 4 नवंबर तक हवा की गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ श्रेणी में बनी रह सकती है।

सीपीसीबी के आंकड़ों के अनुसार, रविवार शाम को PM2.5 का स्तर 189.6 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर और PM10 का स्तर 316 था। PM2.5 और PM10 दोनों ही वायु में मौजूद छोटे और बड़े प्रदूषक कण होते हैं। PM2.5 कण 2.5 माइक्रोमीटर या उससे छोटे होते हैं, जो सांस में गहरे जाकर फेफड़ों में असर डाल सकते हैं। वहीं, PM10 कण 10 माइक्रोमीटर तक के होते हैं, जो भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं।

हवाओं का असर

स्काईमेट के उपाध्यक्ष महेश पालावत के अनुसार, रविवार को हवा की स्थिति प्रदूषकों के फैलाव के लिए उपयुक्त नहीं थी। हवा की गति कम होने के कारण प्रदूषक धीरे-धीरे जमते गए। हालांकि, दिन के दौरान हवा की गति लगभग 10 किमी प्रति घंटे तक बढ़ी, जिससे कुछ सुधार देखने को मिला। उन्होंने यह भी कहा कि रविवार को दिन में हवा की दिशा बदली, जो पश्चिमी और उत्तर-पश्चिमी हो गई। इस दिशा में हवा के साथ पराली जलाने के धुएं दिल्ली तक पहुंचे, जिससे प्रदूषण और बढ़ गया।

स्वास्थ्य पर असर

दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के कारण लोगों के लिए सांस लेना मुश्किल हो सकता है। खासकर उन लोगों को अधिक परेशानी हो सकती है जिनका स्वास्थ्य पहले से ही कमजोर है। प्रदूषण के उच्च स्तर के कारण गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं जैसे अस्थमा, श्वसन संक्रमण और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। बच्चों और बुजुर्गों को विशेष रूप से इस प्रदूषण से बचने के लिए सावधानी बरतने की आवश्यकता है।

सरकार और पर्यावरण एजेंसियां इस स्थिति की निगरानी कर रही हैं और प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है। इस मुद्दे के समाधान के लिए वाहन प्रदूषण को नियंत्रित करने और पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने की समस्या को हल करने की आवश्यकता है।

दिल्ली में प्रदूषण की स्थिति गंभीर बनी हुई है, और ए.क्यू.आई. के ‘बहुत खराब’ और ‘गंभीर’ स्तर तक पहुंचने से नागरिकों के लिए खतरे की घंटी बज चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति अगले कुछ दिनों तक जारी रह सकती है। शहर में प्रदूषण की समस्या को गंभीरता से लेना जरूरी है, और इसके समाधान के लिए तुरंत कदम उठाने होंगे। नागरिकों को भी सावधानी बरतते हुए स्वस्थ रहने के उपायों को अपनाना चाहिए।

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