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सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट से श्रेष्ठ नहीं, स्वतंत्रता दिवस पर बोले CJI BR Gavai

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मुख्य न्यायाधीश (CJI) BR Gavai ने 79वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट से श्रेष्ठ नहीं है और दोनों ही संवैधानिक अदालतें हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि संवैधानिक व्यवस्था के तहत न तो सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट से ऊपर है और न ही हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट से नीचे।

CJI Gavai ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट Collegium, हाईकोर्ट Collegium को जज पद के लिए किसी विशेष नाम की सिफारिश करने का निर्देश नहीं दे सकता।

जजों की नियुक्ति में हाईकोर्ट की अहम भूमिका

CJI ने बताया कि जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया की शुरुआत हाईकोर्ट Collegium से होती है। सुप्रीम कोर्ट केवल नामों की सिफारिश करता है और हाईकोर्ट से उन पर विचार करने का अनुरोध करता है।

उन्होंने कहा कि जब हाईकोर्ट Collegium किसी उम्मीदवार की योग्यता से संतुष्ट हो जाता है, तभी नाम सुप्रीम कोर्ट के पास भेजा जाता है और उसके बाद केंद्र सरकार को सिफारिश भेजी जाती है।

पूर्व CJI संजीव खन्ना की पहल

जस्टिस Gavai ने कहा कि पूर्व मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना के कार्यकाल में एक नई प्रथा शुरू हुई। इस प्रथा के तहत सुप्रीम कोर्ट Collegium, उम्मीदवारों से बातचीत करता है।

उनके मुताबिक, आधे घंटे की बातचीत से यह समझा जा सकता है कि उम्मीदवार समाज में योगदान देने के लिए कितना सक्षम है। यह तरीका सही उम्मीदवारों की पहचान में मददगार साबित हुआ है।

हर मामला महत्वपूर्ण है

CJI ने अपने संबोधन में स्वतंत्रता सेनानियों की विरासत का उल्लेख किया और उनसे प्रेरणा लेने की बात कही। उन्होंने कहा कि कोई भी मामला इतना छोटा नहीं होता कि उसे नजरअंदाज किया जाए।

उन्होंने कहा कि जो विवाद किसी को मामूली लगे, वह किसी अन्य के लिए जीवन, सम्मान या अस्तित्व का प्रश्न हो सकता है। अदालत द्वारा दिए गए हर फैसले और वकील द्वारा दिए गए हर तर्क से राष्ट्र के नैतिक और सामाजिक ढांचे को मजबूती मिलती है।

कार्यक्रम में मौजूद दिग्गज

इस मौके पर केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और सुप्रीम कोर्ट के अन्य न्यायाधीश भी मौजूद थे। CJI Gavai ने संथाल समुदाय के योगदान को भी याद किया, जिसने 1855 में अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह किया था।

उन्होंने कहा कि यह भारत का सौभाग्य है कि इस समुदाय की बेटी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, आज देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन हैं।

CJI BR Gavai का यह संबोधन न सिर्फ़ संवैधानिक अदालतों की समानता पर स्पष्ट संदेश देता है, बल्कि Collegium सिस्टम को लेकर भी पारदर्शिता को मजबूत करता है। उनका यह कहना कि सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट से श्रेष्ठ नहीं, न्यायपालिका में आपसी सम्मान और संतुलन के सिद्धांत को रेखांकित करता है।

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