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जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल स्वीकृत

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पक्ष में 366 और विपक्ष में 66 वोट पड़े

KKN लाइव न्यूज ब्यूरो। भारत के लोकसभा ने 66 के मुकाबले 366 मतो से जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल को पास कर दिया। राज्यसभा पहले ही इस बिल को मंजूर कर चुकी है। अब भारत के राष्ट्रपति के द्वारा इस पर हस्ताक्षर होते ही जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल को कानून का दर्जा प्राप्त हो जायेगा।

बिल को मिली मंजूरी

राज्यसभा के बाद अब लोकसभा से भी जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल पर मंजूरी मिल गई है। मंगलवार को लोकसभा ने जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल को पास कर दिया। जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल पर लोकसभा में वोटिंग के दौरान पक्ष में जहां 366 वोट पड़े। वहीं, विपक्ष में 66 वोट पड़े। हालांकि, इस दौरान समाजवादी पार्टी ने वोटिंग से खुद को अलग रखा और वॉक आउट कर दिया है।

कॉग्रेस और बीजेपी नेता में बहस

इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को लोकसभा में जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल पेश किया था। इसके बाद सदन में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि आप पीओके के बारे में सोच रहे हैं, आपने सभी नियमों का उल्लंघन किया और एक राज्य को रातोंरात केंद्र शासित प्रदेश में बदल दिया। लोकसभा में अमित शाह और अधीर रंजन के बीच तीखी तकरार देखने को मिली। अमित शाह ने कहा कि कश्मीर और पीओके के लिए जरुरत पड़ी तो कोई भी कुर्बानी देने को तैयार हैं।

देश में जश्न का माहौल

लोकसभा में नंबर को देखते हुए ऐसा माना जा रहा है कि वहां भी यह बिल आसानी से पास हो जाएगा। लोकसभा में मंगलवार को सरकार की ओर से जम्मू-कश्मीर से संबंधित संकल्प और विधेयक लाए जाने के मद्देनजर कांग्रेस ने सदन के अपने सभी सदस्यों को व्हिप जारी कर उपस्थित रहने को कहा था। जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल के मंजूर होते ही पुरे देश में जबरदस्त जश्न का माहौल है। हालांकि, कुछ राजनीतिक पार्टियां अभी भी इसका विरोध कर रहें हैं।

दो प्रदेश केन्द्र शासित प्रदेश बने

बता दें कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधान समाप्त करने, जम्मू कश्मीर को विधायिका वाला केंद्र शासित क्षेत्र और लद्दाख को बिना विधायिका वाला केंद्र शासित क्षेत्र बनाने संबंधी सरकार के दो साहसिक एवं जोखिम भरे संकल्पों एवं दो संबंधित विधेयकों को सोमवार को राज्यसभा की मंजूरी मिल गई थी। जम्मू कश्मीर पुनर्गठन विधेयक को पारित करने के लिए उच्च सदन में हुए मत विभाजन में संबंधित प्रस्ताव 61 के मुकाबले 125 मतों से मंजूरी दे दी गई थी।

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